
क्या आप जानते हैं आषाढ़ नवरात्रि 2026 में क्यों होती है खास महत्ता? जानिए तिथि, महत्व, पूजा विधि और घटस्थापना मुहूर्त की पूरी जानकारी
आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। यह शक्ति साधना और तंत्र साधना के लिए विशेष मानी जाती है। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा कर विशेष सिद्धि और आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
भक्तों नमस्कार, श्री मंदिर पर आपका स्वागत है। माता शक्ति की उपासना के लिए नवरात्रि के पर्व को बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। देवी पूजन का ये पावन पर्व साल में चार बार आता है, जिसमें पहली नवरात्रि चैत्र मास के शुक्लपक्ष में, दूसरी नवरात्रि आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष में, तीसरी अश्विन मास में और अंतिम नवरात्रि माघ के महीने में पड़ती है।
दिन 1 – प्रतिपदा (घटस्थापना) तिथि: 15 जुलाई 2026, बुधवार पूजा: घटस्थापना, मां शैलपुत्री पूजा दिन 2 – द्वितीया तिथि: 16 जुलाई 2026, गुरुवार पूजा: मां ब्रह्मचारिणी दिन 3 – तृतीया तिथि: 17 जुलाई 2026, शुक्रवार पूजा: मां चन्द्रघंटा और मां कूष्माण्डा दिन 4 – पंचमी तिथि: 18 जुलाई 2026, शनिवार पूजा: मां स्कन्दमाता दिन 5 – षष्ठी तिथि: 19 जुलाई 2026, रविवार पूजा: मां कात्यायनी दिन 6 – सप्तमी तिथि: 20 जुलाई 2026, सोमवार पूजा: मां कालरात्रि दिन 7 – अष्टमी तिथि: 21 जुलाई 2026, मंगलवार पूजा: दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी संधि पूजा समय: 28:52+ से 29:40+ दिन 8 – नवमी तिथि: 22 जुलाई 2026, बुधवार पूजा: मां सिद्धिदात्री दिन 9 – नवमी (पारण) तिथि: 23 जुलाई 2026, गुरुवार कार्य: नवरात्रि पारण
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नौ दिनों तक चलने वाली यह नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती है। इसमें देवी दुर्गा के 9 रूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना की जाती है। ये महाविद्याएं हैं: मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला। इस नवरात्रि को “गुप्त” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें की जाने वाली पूजा, मंत्र साधना व अनुष्ठान साधारण भक्तों के लिए नहीं, बल्कि साधकों और तांत्रिकों के लिए अत्यंत गोपनीय और प्रभावशाली मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में इन सभी देवियों की गुप्त रूप से आराधना करने पर जातक की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। आषाढ़ नवरात्रि जून या जुलाई के महीने में आती हैं। हर नवरात्रि की तरह इस नवरात्रि में भी मां दुर्गा की 9 दिनों तक उपासना की जाती है। इसके साथ ही इस नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का भी विशेष महत्व है।
तंत्र साधना के लिए आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के 9 दिन व रातें विशेष महत्व रखती हैं। इस दौरान अधिकांश तांत्रिक अनुष्ठान और साधनाएं गोपनीय रखकर की जाती हैं, इसलिए इसे 'गुप्त नवरात्रि' कहा जाता है,
वैदिक काल में इस गुप्त नवरात्रि के बारे में केवल कुछ ऋषियों व साधकों को ही जानकारी थी। उस समय साधक इस नवरात्रि के समय दस महाविद्या की साधना करके मनोवांछित शक्तियां प्राप्त करते थे।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जहां चैत्र व अश्विन नवरात्रि में शक्ति के नौ स्वरूप पूजे जाते हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी के दस महाविद्या स्वरूप, काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी एवं कमला की उपासना करने का विधान भी है।
गुप्त नवरात्रि को लेकर एक मान्यता ये भी प्रचलित है कि इस दौरान जब भगवान विष्णु शयन अवस्था में होते हैं, तब दिव्य शक्तियां कमज़ोर पड़ने लगती हैं। ऐसे में ब्रह्माण्ड को सुचारु रूप से चलाने के लिए माता शक्ति की गुप्त रूप से आराधना की जाती है, जिससे वो आने वाली विपत्तियों से इस संसार की रक्षा कर सकें।
मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में माता शक्ति के स्वरूपों की की गुप्त रूप से साधना करने पर जातक की समस्त शीघ्र ही पूरी होती हैं।
पुराणों में वर्णन मिलता है कि एक बार ऋषि श्रृंगी अपने भक्तों को दर्शन दे रहे थे। उन भक्तों में से एक स्त्री ने कहा कि हे मुनिवर! मेरे पति के दुर्व्यसन के कारण मैं पूजा पाठ, दान पुण्य आदि कोई धार्मिक कर्म नहीं कर पाती हूं। मेरा पति मांसाहार व मदिरापान करता है, वो जुआरी भी है, किंतु मैं मां दुर्गा की भक्ति साधना करना चाहती हूं, उनकी उपासना करके अपने परिवार के समस्त पाप कर्मों को नष्ट करना चाहती हूं।
श्रृंगी ऋषि ने स्त्री को उपाय बताते हुए कहा कि वासंतिक और शारदीय नवरात्रों में तो सभी भक्त माता शक्ति की पूजा करते है, किंतु दो नवरात्र ऐसे होते हैं, जिनके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं है। यदि तुम इस गुप्त नवरात्रि पर माता दुर्गा की उपासना करो, तो उन्हें अति शीघ्र प्रसन्न कर सकती हो, और मनोवांछित फल प्राप्त कर सकती हो। तब स्त्री ने विधि विधान से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का व्रत किया, और सभी पापों से मुक्त होकर सुखमय जीवन जीने लगी।
इस विशेष नवरात्रि के दौरान यदि कोई साधक या भक्त विधिपूर्वक मां दुर्गा की आराधना करता है, तो उसे शीघ्र ही चमत्कारिक फल की प्राप्ति होती है। पूजा की विधि इस प्रकार है:
गुप्त नवरात्रि में करें ये विशेष साधनाएं
तो यह थी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के महत्व से जुड़ी जानकारी। हमारी कामना है कि आपका व्रत फलित हो, और देवी शक्ति आप पर जीवन भर अपनी कृपा बनाए रखें। ऐसे ही व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए श्री मंदिर के इस धार्मिक मंच पर।
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