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अन्नपूर्णा जयंती 2025

अन्नपूर्णा जयंती 2025: जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि! देवी अन्नपूर्णा की कथा और इस पर्व का महत्व क्या है? जानें सब कुछ यहाँ।

अन्नपूर्णा जयंती के बारे में

अन्नपूर्णा जयंती मां अन्नपूर्णा की आराधना का पावन दिन है, जो मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। मां अन्नपूर्णा को भोजन और समृद्धि की देवी माना गया है। इस दिन भक्त उपवास रखकर मां को अन्न, फल और मिठाइयों का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि मां की कृपा से घर में अन्न, धन और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

अन्नपूर्णा जयंती कब है?

अन्न मानव जीवन का मूल आधार है, और इस अन्न को प्रदान करने वाली अन्नपूर्णा माता को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। अन्न का सम्मान, संरक्षण और वितरण हिंदू संस्कृति की सबसे प्रमुख परंपराओं में से है। इसी भावना को समर्पित विशेष पर्व अन्नपूर्णा जयंती कहलाता है, जिसे हर वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है

इस वर्ष अन्नपूर्णा जयंती 04 दिसंबर 2025, बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 04 दिसंबर 2025 को सुबह 08 बजकर 37 मिनट से
  • पूर्णिमा तिथि समापन- 05 दिसंबर 2025 को प्रातः 04 बजकर 43 मिनट तक

इस दिन के अन्य मुहूर्त

मुहूर्त

समय 

ब्रह्म मुहूर्त

04:42 ए एम से 05:35 ए एम

प्रातः सन्ध्या

05:09 ए एम से 06:29 ए एम

अभिजित मुहूर्त

11:27 ए एम से 12:09 पी एम

विजय मुहूर्त

01:35 पी एम से 02:17 पी एम

गोधूलि मुहूर्त

05:05 पी एम से 05:32 पी एम

सायाह्न सन्ध्या

05:08 पी एम से 06:28 पी एम

अमृत काल

12:48 पी एम से 02:12 पी एम

निशिता मुहूर्त

11:22 पी एम से 12:15 ए एम, दिसम्बर 05

क्या है अन्नपूर्णा जयंती?

अन्नपूर्णा जयंती वह पावन दिन है जब माँ पार्वती ने पूरी सृष्टि के पालन-पोषण के लिए अन्नपूर्णा के रूप में अवतार लिया था। यह पर्व “अन्न की देवता” माता अन्नपूर्णा की उत्पत्ति को स्मरण करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन को अन्न के संरक्षण, सम्मान और दान की भावना को समर्पित माना जाता है।

क्यों मनाते हैं अन्नपूर्णा जयंती?

अन्नपूर्णा जयंती मनाने के पीछे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सामाजिक कारण हैं -

  • अन्न को जीवन का प्राण माना गया है, और इसका सम्मान धर्म का एक मुख्य आधार है।
  • इस दिन अन्न की देवी से घर-संसार में कभी न खत्म होने वाली समृद्धि, भोजन और प्रसन्नता का आशीर्वाद मिलता है।
  • यह दिन हमें याद दिलाता है कि - “अन्न ही ब्रह्म है। जो अन्न का आदर करता है, वही समृद्ध होता है।”
  • अन्नदान को सबसे बड़ा दान माना गया है। इस दिन भोजन करवाना या अन्न दान करने से अनेक गुणा पुण्य प्राप्त होता है।

अन्नपूर्णा जयंती का महत्व

  • मान्यताओं के अनुसार,अन्नपूर्णा जयंती के दिन ही माँ पार्वती, पूरी सृष्टि के भरण-पोषण के लिए देवी अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट हुईं थीं। अन्नपूर्णा माँ की कृपा से व्यक्ति के घर में अन्न की कभी भी कोई कमी नहीं आती है।
  • जो भी व्यक्ति अन्न का सम्मान करता है और माँ अन्नपूर्णा की आराधना करता है, उसपर हमेशा देवी की कृपा बनी रहती है। माँ अन्नपूर्णा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • शास्त्रों में अन्नपूर्णा जयंती को भोजन और धन-संपदा का विशेष दिन माना गया है।
  • यह वर्ष का वह दिन है जब अन्न का अपव्यय करना अत्यंत निषेध है।
  • इस दिन किए गए अन्नदान, गौसेवा, कन्याभोज, और साधु-संत भोजन का फल कई जन्मों तक मिलता है।

माँ अन्नपूर्णा की पूजा से:

  • घर में अन्न की कमी दूर होती है
  • दरिद्रता का नाश होता है
  • घर में शांति, संतुष्टि और बरकत आती है
  • देवताओं की कृपा और पितरों का आशीर्वाद मिलता है

अन्नपूर्णा जयंती के दिन किसकी पूजा होती है?

इस दिन खासकर दो देवताओं की पूजा की जाती है -

1. माता अन्नपूर्णा

  • अन्न, पोषण, उन्नति और सौभाग्य की देवी
  • हाथ में अन्न का घड़ा और करछुल लिए हुए सौम्य स्वरूप

2. भगवान शिव

  • क्योंकि शिव स्वयं भिक्षुक का रूप लेकर माता से अन्न ग्रहण करते हैं
  • इस दिन शिव-पार्वती दोनों की संयुक्त पूजा करने का विधान है

कैसे मनाएं अन्नपूर्णा जयंती?

अन्नपूर्णा जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य है -

  • अन्न का सम्मान
  • अन्न का दान
  • और अन्न को देवी का दिव्य प्रसाद समझकर ग्रहण करना।

इस दिन लोग:

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं
  • घर के देवालय को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है
  • दीपक जलाकर शिव-पार्वती की पूजा की जाती है
  • अन्नपूर्णा स्तोत्र, अन्नपूर्णा सहस्रनाम का पाठ किया जाता है
  • ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और पशु-पक्षियों को भोजन कराया जाता है

अन्नपूर्णा जयंती पूजा की सामग्री

पूजा के लिए आवश्यक सामग्रियाँ -

  • गंगाजल
  • चंदन, कुमकुम, अक्षत
  • फूल, माला
  • दीपक (घी या तिल के तेल का)
  • नैवेद्य: खीर, हलवा, चावल, तिल-गुड़
  • बिल्वपत्र (शिव के लिए)
  • श्रृंगार सामग्री (माता के लिए)
  • पंचामृत
  • तांबे या पीतल का लोटा
  • प्रसाद के लिए अन्न या भोजन
  • दान सामग्री: चावल, गेहूं, गुड़, तिल, कंबल

अन्नपूर्णा जयंती की पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर को साफ कर गंगाजल से पवित्र करें।
  • तांबे के दीपक में घी या तिल का तेल डालकर प्रज्वलित करें।
  • शिव-पार्वती की प्रतिमा/चित्र को स्थापित करें।
  • शिव को चंदन और बिल्वपत्र अर्पित करें।
  • माता अन्नपूर्णा को कुमकुम, रोली, चावल, पुष्प और नैवेद्य चढ़ाएं।
  • पंचामृत का अभिषेक करें या प्रतीक रूप से अर्पित करें।
  • कपूर या घी से आरती करें।
  • ‘अन्नपूर्णा स्तोत्र’ या देवी के मंत्रों का पाठ करें।
  • अन्न, खीर, चावल या मिठाई का प्रसाद चढ़ाएं।
  • जरूरतमंदों को भोजन कराएं - यह अनिवार्य माना गया है।

अन्नपूर्णा जयंती का व्रत कैसे करें?

  • उपवास नियमसहित या फलाहार के रूप में रखा जा सकता है।
  • चावल, गुड़, तिल से बने व्यंजन खाएं।
  • उपवास के दौरान -

शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप गरीबों को भोजन गौसेवा जलदान

  • शाम को पुनः पूजा करके व्रत का समापन किया जाता है।

अन्नपूर्णा जयंती पर करें ये विशेष उपाय

  • घर के अन्न भंडार में तिल और हल्दी डालें – इससे अन्न वृद्धि होती है।
  • तुलसी के पास दीपक जलाएं – घर में बरकत बढ़ती है।
  • गौमाता को हरा चारा दें – दरिद्रता का नाश होता है।
  • चावल का दान करें – ग्रह दोष शांत होते हैं।
  • गरीबों को कंबल या खाद्य सामग्री दें – पुण्य में बढ़ोतरी होती है।

अन्नपूर्णा जयंती व्रत के लाभ

  • घर में अन्न की कभी कमी नहीं रहती
  • कष्ट, दरिद्रता और अशुभता दूर होती है
  • भोजन और धन में वृद्धि होती है
  • शांति, स्थिरता और संतुष्टि मिलती है
  • पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है
  • अन्न अपव्यय करने की आदत समाप्त होती है

अन्नपूर्णा जयंती पर पढ़ें ये मंत्र

1. अन्नपूर्णा स्तोत्र मंत्र

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
निर्धूकैकरि कौशलैकरणी नित्यं स्मिताभासिनी।
सा मां पातु अन्नपूर्णा भगवती भिक्षां देहि च पार्वति

2. अन्नपूर्णा देवी मूल मंत्र

ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे
शङ्करप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं
भिक्षां देहि च पार्वति॥

3. शिव-अन्नपूर्णा संयुक्त मंत्र

ॐ शिवायै अन्नपूर्णायै नमः।

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Published by Sri Mandir·November 27, 2025

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