
जानिए तांबे का बर्तन किस दिन खरीदना शुभ माना जाता है।
तांबे का बर्तन खरीदना धर्म और ज्योतिष दोनों दृष्टि से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सही वार और मुहूर्त में खरीदा गया तांबा घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। इस लेख में जानिए तांबे का बर्तन किस दिन खरीदना चाहिए और कौन-सा दिन सबसे शुभ माना जाता है।
तांबे के बर्तन भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद में विशेष महत्व रखते हैं। जल शुद्धिकरण से लेकर स्वास्थ्य लाभ तक, तांबे के बर्तन आज फिर से हर घर की ज़रूरत बनते जा रहे हैं। लेकिन कई लोग यह जानना चाहते हैं कि तांबे के बर्तन कब खरीदने चाहिए, ताकि वे शुभ भी हों और लाभकारी भी। शास्त्रों और लोक-मान्यताओं के अनुसार, सही समय पर खरीदे गए तांबे के बर्तन घर में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि लाते हैं।
धनतेरस
धनतेरस तांबे के बर्तन खरीदने के लिए सबसे शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन धातु से बनी वस्तुएँ खरीदना धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक होता है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदा गया तांबा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है।
अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया को ऐसा दिन माना जाता है जिसका फल कभी नष्ट नहीं होता। इस दिन तांबे के बर्तन खरीदने से स्वास्थ्य और सौभाग्य में स्थायी वृद्धि होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन की गई कोई भी शुभ खरीद लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम देती है, इसलिए तांबे के बर्तन के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ है।
गुरुवार
गुरुवार का दिन बृहस्पति ग्रह से जुड़ा होता है, जो ज्ञान, स्वास्थ्य और पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन तांबे के बर्तन खरीदने से मानसिक शांति, शारीरिक संतुलन और सकारात्मक सोच में वृद्धि होती है। नियमित उपयोग के लिए तांबे के बर्तन खरीदने हेतु गुरुवार को बहुत अच्छा माना जाता है।
पूर्णिमा
पूर्णिमा का दिन चंद्रमा की पूर्ण ऊर्जा से युक्त होता है। इस दिन तांबे के बर्तन खरीदने से घर में शांति, सौहार्द और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। माना जाता है कि पूर्णिमा पर खरीदे गए तांबे के बर्तन पारिवारिक सुख और मानसिक स्थिरता को बढ़ाते हैं।
अमावस्या के दिन
अमावस्या को शास्त्रों में नकारात्मक ऊर्जा और पितृ तर्पण से जुड़ा दिन माना गया है। इस दिन नई वस्तुओं की खरीद, विशेषकर धातु के बर्तन, शुभ नहीं मानी जाती। मान्यता है कि अमावस्या पर खरीदे गए तांबे के बर्तन अपेक्षित सकारात्मक फल नहीं देते।
राहुकाल और यमगण्ड काल में
राहुकाल और यमगण्ड काल को अशुभ समय माना जाता है। इस अवधि में किसी भी प्रकार की खरीदारी, खासकर पूजा या दैनिक उपयोग की वस्तुओं की, टालनी चाहिए। तांबे के बर्तन भी इन कालों में नहीं खरीदने चाहिए, क्योंकि इससे शुभ ऊर्जा का प्रवाह बाधित माना जाता है।
मंगलवार और शनिवार
मंगलवार और शनिवार को सामान्यतः धातु के बर्तन खरीदने की सलाह नहीं दी जाती, खासकर यदि वह पूजा या स्वास्थ्य से जुड़ा उपयोग हो। शनिवार शनि ग्रह से जुड़ा होता है और इस दिन की गई खरीदारी विलंब या बाधा का कारण मानी जाती है, जबकि मंगलवार उग्रता से जुड़ा माना गया है।
श्राद्ध या पितृ पक्ष के दौरान
पितृ पक्ष को दान, तर्पण और आत्मिक शांति का समय माना जाता है। इस अवधि में नई वस्तुओं की खरीद, विशेषकर तांबे के बर्तन, वर्जित मानी जाती है। मान्यता है कि इस समय केवल दान करना शुभ होता है, न कि संग्रह या नई शुरुआत।
अशुद्ध या टूटा हुआ तांबा
यदि तांबे के बर्तन में दरार हो, वह अत्यधिक काला पड़ा हो या पहले उपयोग में रहा हो, तो उसे खरीदने से बचना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार अशुद्ध या टूटा तांबा नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और इसका उपयोग शुभ नहीं माना जाता।
स्वास्थ्य संबंधी लाभ
आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तन में रखा पानी त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने में सहायक माना जाता है।
इससे पाचन शक्ति बेहतर होती है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
तांबा पानी को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करता है और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करता है।
नियमित रूप से तांबे के पात्र का जल पीने से गैस, अम्लता और कमजोरी जैसी समस्याओं में लाभ माना गया है।
धार्मिक लाभ
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