
आइए जानते हैं सिल-बट्टा किस दिन खरीदना शुभ माना जाता है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएँ क्या हैं।
सिल-बट्टा खरीदना रसोई और गृहस्थ जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शुभ दिन पर खरीदी गई रसोई की वस्तुएँ घर में सुख-समृद्धि और अन्नपूर्णा की कृपा लाती हैं। सही वार और मुहूर्त का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है। इस लेख में जानिए सिल-बट्टा किस दिन खरीदना चाहिए और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएँ।
भारतीय संस्कृति में सिल–बट्टा का विशेष महत्व माना गया है। यह केवल रसोई का एक उपयोगी उपकरण नहीं है, बल्कि शुद्धता, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। प्राचीन समय से ही सिल–बट्टा का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाने और ताज़े मसाले पीसने के लिए किया जाता रहा है। खासकर नए घर में प्रवेश, रसोई की स्थापना, पूजा-पाठ या किसी भी शुभ अवसर पर सिल–बट्टा लाना शुभ माना जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिल–बट्टा खरीदने का भी एक शुभ और अशुभ समय होता है? वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष दिन और तिथियाँ ऐसी होती हैं जब सिल–बट्टा खरीदने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का वास होता है, वहीं कुछ दिनों में इसकी खरीदारी करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इस लेख में हम जानेंगे कि सिल–बट्टा किस दिन खरीदना चाहिए, किन दिनों में इसे नहीं खरीदना चाहिए, और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियाँ कौन-सी हैं, ताकि घर में हमेशा शुभता बनी रहे।
वास्तु शास्त्र के अनुसार सिल–बट्टा सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। भारतीय परंपरा में सिल–बट्टा को प्राकृतिक पत्थर से बना होने के कारण अत्यंत पवित्र और सात्त्विक माना गया है। इसमें पीसे गए मसाले और औषधियाँ भोजन को न केवल स्वादिष्ट बनाती हैं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी होती हैं। वास्तु शास्त्र की मान्यता है कि सिल–बट्टा घर की रसोई में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर शुभ प्रभाव डालता है। विशेष रूप से नए घर में प्रवेश, गृहस्थ जीवन की शुरुआत या रसोई स्थापना के समय सिल–बट्टा लाना शुभ संकेत माना जाता है। यह समृद्धि, अन्नपूर्णा कृपा और घर में सुख–शांति का प्रतीक है।
हालाँकि, शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि सिल–बट्टा को उचित दिन, दिशा और विधि के अनुसार ही खरीदना और स्थापित करना चाहिए। सही समय और सही तरीके से लाया गया सिल–बट्टा घर में सौभाग्य, स्वास्थ्य और स्थायित्व को बढ़ाता है।
सोमवार और शुक्रवार- इन दिनों सिल–बट्टा खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सोमवार चंद्रमा का दिन है, जो शांति, भावनात्मक संतुलन और मानसिक सुख का प्रतीक है, जबकि शुक्रवार शुक्र ग्रह से जुड़ा होता है, जो सुख–समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्रदान करता है।
बुधवार- इसके अलावा बुधवार का दिन भी सिल–बट्टा खरीदने के लिए उपयुक्त माना गया है, क्योंकि यह दिन रसोई, भोजन और गृहस्थ जीवन से जुड़ी वस्तुओं के लिए शुभ होता है।
विशेष अवसरों की बात करें तो दिवाली और धनतेरस के समय सिल–बट्टा या अन्य रसोई के पत्थर के बर्तन घर लाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों खरीदी गई वस्तुएँ घर में लक्ष्मी कृपा, अन्नपूर्णा का वास और स्थायी सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती हैं। इसलिए प्रयास करें कि सिल–बट्टा हमेशा शुभ दिनों और पर्वों में ही खरीदा जाए, ताकि घर में सुख, शांति और शुभता बनी रहे।
मंगलवार और शनिवार- मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से है, जो उग्रता और टकराव का प्रतीक माना जाता है, जबकि शनिवार शनि ग्रह का दिन होता है, जो विलंब, संघर्ष और कठिनाइयों से जुड़ा है। इन दिनों सिल–बट्टा खरीदने से गृहस्थ जीवन में अनावश्यक तनाव या बाधाएँ आ सकती हैं।
अमावस्या तिथि- अमावस्या को नई चीजें लाने से बचने की सलाह दी जाती है, विशेषकर यदि कोई विशेष शुभ मुहूर्त न हो। यह दिन शांति साधना के लिए तो अच्छा माना जाता है, लेकिन नई शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
ग्रहण काल- सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय किसी भी प्रकार की खरीदारी को अशुभ माना जाता है। इस दौरान सिल–बट्टा खरीदना या घर लाना नहीं चाहिए।
अशुभ मुहूर्त (राहुकाल / यमगंड)- इन समयों में सिल–बट्टा खरीदने से बचना चाहिए।
श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष)- श्राद्ध के दिनों में किसी भी नई वस्तु की खरीद, विशेषकर घरेलू या शुभ वस्तुओं की, वर्जित मानी जाती है। इन दिनों सिल–बट्टा खरीदने से बचना चाहिए।
वास्तु शास्त्र के अनुसार सिल–बट्टा को रखने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख–शांति और पारिवारिक सामंजस्य बना रहता है।
बहुत अधिक टूटा या दरार वाला सिल–बट्टा नहीं खरीदना चाहिए।
यदि संभव हो तो शुभ दिन और शुभ मुहूर्त में ही सिल–बट्टा खरीदें।
सिल–बट्टा को ईशान कोण (उत्तर–पूर्व दिशा) में नहीं रखना चाहिए।
इसे हमेशा पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखना शुभ माना जाता है।
सिल–बट्टा को हमेशा रसोई घर में ही रखें।
उपयोग से पहले सिल–बट्टा साफ करना आवश्यक माना जाता है।
सिल और बट्टा को कभी अलग-अलग नहीं रखें, दोनों को साथ रखें।
सिल–बट्टा को जमीन पर लिटाकर नहीं रखना चाहिए।
सिल–बट्टा को लिटाकर रखना नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।
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