
यह स्तोत्र भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन है, जो पापों का नाश, कष्टों से मुक्ति और आत्मिक शुद्धि प्रदान करता है। जानिए इसका सम्पूर्ण पाठ और महत्व।
श्री शिवमङ्गलाष्टकम् भगवान शिव को समर्पित एक सुंदर और मंगलमय स्तोत्र है, जिसमें उनके आठ पवित्र मंगल श्लोकों का वर्णन मिलता है। इस स्तोत्र के पाठ से जीवन में शांति, सौभाग्य और पापों से मुक्ति प्राप्त होती है। श्रद्धा और भक्ति से इसका जप करने पर भगवान शिव की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं। इस लेख में जानिए श्री शिवमङ्गलाष्टकम् का महत्व और इसके पाठ से मिलने वाले लाभ।
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शिव मंगलाष्टक एक मंगल स्तोत्र है जिसे शिव पूजा के अंत में तब पढ़ा जाता है जब कोई भक्त कई स्तोत्र का पाठ कर रहा होता है। शिव मंगलाष्टक पाठ तब भी किया जाता है जब कई धार्मिक गीत गाए जा रहे हो या फिर कोई शुभ समारोह या अनुष्ठान संपन्न होता है। मंगल स्तोत्र में भक्त मूल रूप से भगवान से मंगल की कामना कर रहा होता है। मंगलम् का अर्थ "शुभकामनाएं", या "सुखद अंत की कामना" भी है।
भगवान शिव, ब्रह्मा-विष्णु के साथ 3 प्रमुख हिंदू देवताओं में से एक हैं। जबकि ब्रह्मा निर्माता हैं और विष्णु संरक्षक हैं, शिव वह हैं जो सब कुछ नष्ट कर देते हैं ताकि इसे नए सिरे से बनाया जा सके। शिव मंगलाष्टकम एक 8 श्लोक वाला स्तोत्र है जिसका पाठ शिव पूजा के दौरान या उससे पहले किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह स्त्रोत बहुत ही लाभकारी और शुभ फल देने वाला होता है।
भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने।
कालकालाय रुद्राय नीलग्रीवाय मङ्गलम्॥ १ ॥
वृषारूढाय भीमाय व्याघ्रचर्माम्बराय च।
पशूनां पतये तुभ्यं गौरीकान्ताय मङ्गलम्॥ २ ॥
भस्मोद्धूलितदेहाय व्यालयज्ञोपवीतिने।
रुद्राक्षमालाभूषाय व्योमकेशाय मङ्गलम्॥ ३ ॥
सूर्यचन्द्राग्निनेत्राय नमः कैलासवासिने।
सच्चिदानन्दरूपाय प्रमथेशाय मङ्गलम्॥ ४ ॥
मृत्युंजयाय सांबाय सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे।
त्र्यंबकाय सुशान्ताय त्रिलोकेशाय मङ्गलम्॥ ५ ॥
गंगाधराय सोमाय नमो हरिहरात्मने।
उग्राय त्रिपुरघ्नाय वामदेवाय मङ्गलम्॥ ६ ॥
सद्योजाताय शर्वाय दिव्यज्ञानप्रदायिने।
ईशानाय नमस्तुभ्यं पञ्चवक्त्राय मङ्गलम्॥ ७ ॥
सदाशिवस्वरूपाय नमस्तत्पुरुषाय च।
अघोरायच घोराय महादेवाय मङ्गलम्॥ ८ ॥
मङ्गलाष्टकमेतद्वै शंभोर्यः कीर्तयेद्दिने।
तस्य मृत्युभयं नास्ति रोगपीडाभयं तथा॥ ९ ॥
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