
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
पितृपक्ष में आने वाली एकादशी का धार्मिक महत्व अलग माना जाता है और 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी। आज कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे भगवान विष्णु की आराधना और पितरों के स्मरण से जोड़ा जाता है। व्रत, पूजा या तर्पण की तैयारी कर रहे हैं तो आज की तिथि और शुभ समय को करीब से जानना उपयोगी रहेगा।
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6 अक्टूबर 2026 को कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रात 12:35 AM तक रहेगी और मंगलवार का दिन है। आज पंचांग में सुबह 7:21 AM पर सिद्ध योग समाप्त होगा, दोपहर 1:21 PM तक बव करण रहेगा और रात 10:19 PM तक अश्लेषा नक्षत्र प्रभावी रहेगा। शुभ मुहूर्त 11:24 AM से 12:10 PM तक है। एकादशी तिथि होने के कारण आज व्रत और धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाते समय तिथि के समय के साथ दिन के शुभ-अशुभ काल को देखना विशेष रूप से उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष एकादशी (12:35 AM तक) |
वार | मंगलवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:53 |
सूर्यास्त | 17:41 |
चंद्रोदय | 01:25 |
चंद्रास्त | 14:59 |
नक्षत्र | अश्लेषा (10:19 PM तक) |
योग | सिद्ध (7:21 AM तक) |
करण | बव (1:21 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:24 AM से 12:10 PM |
राहुकाल | 2:44 PM से 4:12 PM |
गुलिक काल | 11:47 AM से 1:15 PM |
यमघण्टकाल | 8:50 AM से 10:18 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | कर्क |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रात 12:35 AM तक रहेगी। एकादशी तिथि को हिंदू धार्मिक परंपरा में व्रत, उपवास, पूजा और भगवान विष्णु की आराधना से जोड़ा जाता है। आज तिथि का अधिकांश समय दिन में रहेगा, इसलिए व्रत या धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाते समय एकादशी की अवधि को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
आज मंगलवार है, जिसका संबंध परंपरागत रूप से मंगल ग्रह और भगवान हनुमान से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार को साहस, आत्मविश्वास और अनुशासन से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दिन की शुरुआत अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करके करना उपयोगी हो सकता है।
आज अमांत पद्धति के अनुसार भाद्रपद मास और पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। दोनों पंचांग प्रणालियों की गणना अलग होने के कारण आज दोनों मासों के नाम दिखाई देते हैं। धार्मिक तिथि या व्रत की जानकारी पढ़ते समय इस अंतर को समझना आवश्यक है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में संवत की जानकारी पारंपरिक काल गणना को दर्शाती है और तिथि के संदर्भ को स्पष्ट करती है।
आज शरद ऋतु चल रही है। मौसम में बदलाव के इस दौर में सुबह और शाम के समय तापमान में अंतर हो सकता है। यात्रा या बाहरी गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
अयन की दृष्टि से दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग में अयन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी अवधि को दर्शाता है। धार्मिक परंपरा में इसका उल्लेख समय और ऋतु की पारंपरिक गणना के साथ किया जाता है।
आज सूर्योदय 5:53 AM पर होगा और सूर्यास्त 5:41 PM पर होगा। सुबह की पूजा, दैनिक दिनचर्या और शाम के कार्यों को तय करते समय इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय 1:25 AM पर और चन्द्रास्त 2:59 PM पर होगा। इसका अर्थ है कि चंद्रमा दोपहर तक आकाश में रहेगा और फिर अस्त होगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा तथा चंद्र निवास उत्तर दिशा में माना गया है।
आज अश्लेषा नक्षत्र रात 10:19 PM तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में अश्लेषा नक्षत्र को गहराई, एकाग्रता और सूक्ष्म विषयों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए आज जरूरी कामों में जल्दबाजी के बजाय ध्यानपूर्वक आगे बढ़ने पर जोर दिया जा सकता है।
सिद्ध योग सुबह 7:21 AM तक रहेगा। इसके बाद योग में परिवर्तन होगा। चूंकि यह बदलाव सुबह के शुरुआती समय में ही हो रहा है, इसलिए सूर्योदय के बाद पंचांग की स्थिति में जल्दी परिवर्तन दिखाई देगा।
आज बव करण दोपहर 1:21 PM तक रहेगा। इसके बाद करण बदलेगा। इस समय के बाद दिन के पंचांग में एक और प्रमुख परिवर्तन आएगा। इसलिए दोपहर से पहले और बाद के कार्यों की योजना बनाते समय समय-सीमा को अलग-अलग देखना उपयोगी रहेगा।
आज शुभ मुहूर्त 11:24 AM से 12:10 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य का समय निर्धारित करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 2:44 PM से 4:12 PM
गुलिक काल: 11:47 AM से 1:15 PM
यमघण्टकाल: 8:50 AM से 10:18 AM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरी काम होने पर उसकी प्रकृति और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। यदि उत्तर दिशा की यात्रा करनी हो, तो पंचांग में दी गई इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। साथ ही यात्रा की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय जानकारी को भी ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्र निवास उत्तर दिशा में है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति को तिथि, नक्षत्र और योग के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति को समझा जाता है।
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