
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
पूर्णिमा की तिथि भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है और इससे जुड़े दिन पूजा-पाठ व आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 26 सितंबर 2026 के पंचांग में तिथि के साथ नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त और राहुकाल जैसे विवरण भी शामिल हैं। आइए आज की इस विशेष तिथि के समय-संबंधी पहलुओं को समझते हैं।
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26 सितंबर 2026 को शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 10:18 PM तक रहेगी और शनिवार का दिन है। आज भाद्रपद मास की पूर्णिमा होने के कारण दिन की धार्मिक दृष्टि से विशेष पहचान है। पंचांग के अनुसार सुबह नक्षत्र और करण में बदलाव होगा, दोपहर के आसपास योग की स्थिति बदलेगी और शाम 5:32 PM पर चंद्रोदय होगा। पूजा-पाठ, व्रत, धार्मिक अनुष्ठान या दिन के जरूरी काम तय करने से पहले इन समय परिवर्तनों पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष पूर्णिमा (10:18 PM तक) |
वार | शनिवार |
पूर्णिमांत मास | भाद्रपद |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:49 |
सूर्यास्त | 17:51 |
चंद्रोदय | 17:32 |
चंद्रास्त | 05:13 |
नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद (11:33 AM तक) |
योग | गंड (1:18 PM तक) |
करण | विष्टि (10:44 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:26 AM से 12:14 PM |
राहुकाल | 8:49 AM से 10:20 AM |
गुलिक काल | 5:49 AM से 7:19 AM |
यमघण्टकाल | 1:20 PM से 2:51 PM |
दिशाशूल | पूर्व |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | मीन |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 10:18 PM तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि को हिंदू पंचांग में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इस दिन चंद्रमा की पूर्णता से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण पूजा, ध्यान, जप और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए दिन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
आज शनिवार है, जिसे परंपरागत रूप से शनि ग्रह से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में शनिवार को संयम, सेवा, अनुशासन और आत्मचिंतन से जुड़ी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए आज धार्मिक कार्यों के साथ अपनी दिनचर्या में धैर्य और अनुशासन बनाए रखने पर ध्यान दिया जा सकता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों पद्धतियों के अनुसार भाद्रपद मास चल रहा है। इस कारण दोनों प्रकार की मास गणना में आज भाद्रपद पूर्णिमा ही दर्ज होती है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग की पारंपरिक काल गणना में संवत का अपना महत्व है। धार्मिक तिथियों, व्रत और पर्व से संबंधित जानकारी देखते समय इन संवतों का उल्लेख काल निर्धारण को स्पष्ट करता है।
आज पंचांग के अनुसार शरद ऋतु चल रही है। मौसम में वर्षा के बाद बदलाव का दौर आगे बढ़ रहा है और दिन के तापमान तथा वातावरण में अंतर महसूस हो सकता है। इसलिए यात्रा या बाहर के काम की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की स्थिति को भी ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
अयन की दृष्टि से दक्षिणायन चल रहा है। भारतीय परंपरा में इसे सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर गति से जुड़ी अवधि माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस समय पूजा, साधना और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियों को महत्व दिया जाता है।
आज सूर्योदय 5:49 AM पर होगा और सूर्यास्त 5:51 PM पर होगा। सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच का अंतर दिन की गतिविधियों की योजना बनाने में उपयोगी है। पूजा-पाठ, सुबह की दिनचर्या या शाम के जरूरी काम तय करते समय इन समयों को आधार बनाया जा सकता है।
आज चंद्रोदय 5:32 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 5:13 AM पर होगा। पूर्णिमा के दिन शाम के समय चंद्रमा का उदय विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है। चंद्रमा मीन राशि में रहेगा और पंचांग के अनुसार चंद्र निवास उत्तर दिशा में माना गया है।
आज पूर्व भाद्रपद नक्षत्र 11:33 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र में परिवर्तन होगा। ज्योतिषीय परंपरा में पूर्व भाद्रपद को गंभीर चिंतन, आध्यात्मिकता, अनुशासन और आंतरिक परिवर्तन से जुड़े गुणों के साथ देखा जाता है। इसलिए आज आत्मचिंतन या आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए समय निकालना उपयोगी माना जा सकता है।
गंड योग 1:18 PM तक रहेगा। इसके बाद योग बदल जाएगा। पंचांग में योग को दिन की अलग-अलग समयगत स्थितियों को समझने के लिए देखा जाता है। इसलिए दोपहर के बाद किसी महत्वपूर्ण कार्य की योजना बनाते समय समय परिवर्तन को ध्यान में रखना उचित रहेगा।
आज विष्टि करण 10:44 AM तक रहेगा। इसके बाद करण में बदलाव होगा। नक्षत्र और करण दोनों में सुबह के समय परिवर्तन होने के कारण दिन की पहली पाली में पंचांग की स्थिति तेजी से बदलती है।
आज शुभ मुहूर्त 11:26 AM से 12:14 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य का समय निर्धारित करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 8:49 AM से 10:20 AM
गुलिक काल: 5:49 AM से 7:19 AM
यमघण्टकाल: 1:20 PM से 2:51 PM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि जरूरी काम होने पर परिस्थिति और कार्य की आवश्यकता के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। यदि आज पूर्व दिशा की यात्रा करनी हो, तो पंचांग में दी गई इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। यात्रा की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय जानकारी को भी साथ में देखना व्यावहारिक रहेगा।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा का निवास उत्तर दिशा में माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति पंचांग के दैनिक विवरण का हिस्सा है और इसे तिथि, नक्षत्र तथा योग के साथ मिलाकर देखा जाता है।
26 सितंबर के पंचांग में दिन की शुरुआत और शाम के समय के बीच खास अंतर देखने को मिलता है। सुबह 10:44 AM पर करण बदलता है, 11:33 AM पर नक्षत्र बदलता है और 1:18 PM के बाद योग में परिवर्तन होता है। यानी दोपहर तक पंचांग की कई प्रमुख गणनाएं बदल चुकी होंगी।
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