
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप शांति, पवित्रता और करुणा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक है। 18 अक्टूबर को अष्टमी के अवसर पर भक्त अपनी परंपरा के अनुसार व्रत, पूजा और भोग अर्पित कर सकते हैं। पूजा की तैयारी को सही ढंग से व्यवस्थित करने के लिए आज की तिथि, नक्षत्र और शुभ समय की जानकारी के बारे में।
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18 अक्टूबर 2026 को रविवार है और पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 8:29 AM तक रहेगी। आज सूर्य राशि में तुला का उल्लेख है, जबकि चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेगा। दिन के समय को समझने के लिए नक्षत्र और करण की अवधि पर भी ध्यान देना जरूरी है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 12:49 PM तक रहेगा और सुकर्मा योग रात 11:56 PM तक प्रभावी रहेगा। सुबह 11:21 AM से 12:07 PM तक शुभ मुहूर्त है। रविवार की दिनचर्या के साथ इन समयों को ध्यान में रखकर पूजा-पाठ और दूसरे जरूरी काम व्यवस्थित किए जा सकते हैं।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष सप्तमी (8:29 AM तक) |
वार | रविवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:59 |
सूर्यास्त | 17:29 |
चंद्रोदय | 12:35 |
चंद्रास्त | 23:16 |
नक्षत्र | पूर्वाषाढ़ा (12:49 PM तक) |
योग | सुकर्मा (11:56 PM तक) |
करण | वणिज (8:27 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:21 AM से 12:07 PM |
राहुकाल | 4:03 PM से 5:29 PM |
गुलिक काल | 2:37 PM से 4:03 PM |
यमघण्टकाल | 11:44 AM से 1:10 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | धनु |
चंद्र निवास | पूर्व |
आज शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 8:29 AM तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। यदि सप्तमी तिथि के अनुसार कोई धार्मिक अनुष्ठान करना है, तो तिथि समाप्त होने का समय ध्यान में रखना उपयोगी है। व्रत और पर्व के मामले में उदया तिथि सहित संबंधित धार्मिक नियमों की भी जांच करनी चाहिए।
रविवार को परंपरागत रूप से सूर्यदेव की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कई लोग इस दिन सूर्य को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करते हैं। अपनी धार्मिक दिनचर्या में सूर्य उपासना शामिल करने वाले श्रद्धालु सूर्योदय के समय को ध्यान में रख सकते हैं।
आज अमांत और पूर्णिमांत, दोनों पद्धतियों में अश्विन मास है। ये भारतीय पंचांग में चंद्र मास की गणना करने की दो अलग प्रणालियां हैं। मास का नाम जानने के साथ तिथि और पक्ष को भी देखना जरूरी होता है, क्योंकि धार्मिक अवसरों का निर्धारण इन विवरणों के आधार पर किया जाता है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। पंचांग में संवत का उल्लेख पारंपरिक वर्ष गणना को दर्शाता है। पर्वों की तिथि, धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य पंचांग संबंधी जानकारियों को समझते समय इसका उपयोग किया जाता है।
18 अक्टूबर को शरद ऋतु है और अयन की गणना के अनुसार दक्षिणायन चल रहा है। इस मौसम में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुबह और शाम का वातावरण दिन के समय से अलग हो सकता है। बाहर के कामों या यात्रा की योजना बनाते समय मौसम की स्थिति देखना व्यावहारिक रहेगा।
पंचांग में ऋतु और अयन का उल्लेख भारतीय काल गणना की परंपरा का हिस्सा है। ऋतु मौसम के वार्षिक चरण को दर्शाती है, जबकि अयन सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित पारंपरिक गणना को स्पष्ट करता है।
आज सूर्योदय 5:59 AM पर और सूर्यास्त 5:29 PM पर होगा। सुबह की पूजा, दिनचर्या और शाम की गतिविधियों के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है। रविवार को सूर्य उपासना करने वाले लोगों के लिए सूर्योदय का समय विशेष रूप से प्रासंगिक है।
चंद्रमा का उदय 12:35 PM पर और चंद्रास्त 11:16 PM पर होगा। आज चंद्र राशि धनु है और चंद्र निवास पूर्व दिशा में बताया गया है। चंद्रमा की स्थिति को तिथि और नक्षत्र के साथ देखकर पंचांग की पूरी जानकारी समझी जा सकती है। चंद्रमा से संबंधित किसी विशेष व्रत या धार्मिक नियम के लिए उस अवसर की निर्धारित विधि का पालन करना उचित रहेगा।
आज पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 12:49 PM तक रहेगा। इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र आरंभ होगा। नक्षत्र परिवर्तन दोपहर में होने के कारण सुबह और दोपहर के पंचांग विवरण में अंतर रहेगा। यदि किसी धार्मिक कार्य का समय नक्षत्र के आधार पर तय किया जा रहा है, तो इस बदलाव को ध्यान में रखना चाहिए।
सुकर्मा योग रात 11:56 PM तक रहेगा। पंचांग में योग का उल्लेख तिथि और नक्षत्र के साथ दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति को समझने के लिए किया जाता है। आज इसकी अवधि लगभग पूरे दिन बनी रहेगी।
वणिज करण सुबह 8:27 AM तक रहेगा। इसके बाद करण में परिवर्तन होगा, जबकि सप्तमी तिथि सुबह 8:29 AM तक जारी रहेगी। दोनों समयों में केवल दो मिनट का अंतर है। इसलिए दिन की शुरुआत में करण और तिथि के समय को अलग-अलग समझना उपयोगी है।
आज शुभ मुहूर्त सुबह 11:21 AM से दोपहर 12:07 PM तक है। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए समय चुनते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त के रूप में देखा जा सकता है। विशेष धार्मिक संस्कारों के लिए संबंधित कार्य का अलग मुहूर्त देखना आवश्यक हो सकता है।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 4:03 PM से 5:29 PM
गुलिक काल: 2:37 PM से 4:03 PM
यमघण्टकाल: 11:44 AM से 1:10 PM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज गुलिक काल के तुरंत बाद राहुकाल शुरू होगा, इसलिए दोपहर बाद के समय की योजना बनाते हुए इन दोनों अवधियों पर ध्यान दिया जा सकता है।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार दिशाशूल को यात्रा की दिशा से जोड़कर देखा जाता है। यदि पश्चिम दिशा में यात्रा करनी हो, तो इस विवरण को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, यात्रा से संबंधित निर्णय लेते समय वास्तविक जरूरतों और परिस्थितियों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
राशिगत स्थिति के अनुसार सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। चंद्र निवास पूर्व दिशा में बताया गया है। दिशाशूल और चंद्र निवास अलग-अलग पंचांग विवरण हैं, इसलिए इनका अर्थ और उपयोग भी अलग संदर्भों में समझना चाहिए।
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