
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
अक्टूबर की शुरुआत होते ही साल का एक और महत्वपूर्ण चरण शुरू हो जाता है। 1 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक और दैनिक दृष्टि से कई लोगों के लिए खास हो सकता है, खासकर जब महीने की शुरुआत पंचांग देखकर करने की परंपरा हो। आज की तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल दिन की योजना को समझने में मदद करते हैं। अब जानते हैं आज के पंचांग में क्या खास है।
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1 अक्टूबर 2026 को कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि दोपहर 12:36 PM तक रहेगी और गुरुवार का दिन है। आज पंचांग में सुबह 6:03 AM तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जबकि दोपहर से पहले करण और तिथि दोनों में बदलाव होगा। दिन का शुभ मुहूर्त 11:25 AM से 12:11 PM तक रहेगा और रात 9:06 PM पर चंद्रोदय होगा। ऐसे में आज के पंचांग को केवल तिथि के आधार पर नहीं, बल्कि दिन के बदलते समय-क्रम के साथ देखना अधिक उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष पंचमी (12:36 PM तक) |
वार | गुरुवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:51 |
सूर्यास्त | 17:46 |
चंद्रोदय | 21:06 |
चंद्रास्त | 10:29 |
नक्षत्र | कृतिका (6:03 AM तक) |
योग | सिद्धि (9:19 PM तक) |
करण | तैतिल (12:35 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:25 AM से 12:11 PM |
राहुकाल | 1:18 PM से 2:47 PM |
गुलिक काल | 8:50 AM से 10:19 AM |
यमघण्टकाल | 5:51 AM से 7:20 AM |
दिशाशूल | दक्षिण |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | वृष |
चंद्र निवास | दक्षिण |
आज कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि दोपहर 12:36 PM तक रहेगी। इसके बाद तिथि में बदलाव होगा। दिन के मध्य से पहले ही पंचांग की तिथि बदलने के कारण आज किसी तिथि-आधारित धार्मिक कार्य या आयोजन का समय तय करते समय 12:36 PM को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
आज गुरुवार है, जिसे परंपरागत रूप से बृहस्पति ग्रह से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में गुरुवार को ज्ञान, अध्ययन, गुरु-आदर और आध्यात्मिक गतिविधियों से संबंधित दिन माना जाता है। इसलिए आज की दिनचर्या में सीखने, आत्मचिंतन या धार्मिक कार्यों के लिए समय निकालना उपयोगी हो सकता है।
आज अमांत पद्धति के अनुसार भाद्रपद मास और पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। दोनों मास गणना प्रणालियों के आधार अलग होने के कारण पंचांग में आज दोनों नाम दिखाई देते हैं। तिथि और पर्व से संबंधित जानकारी देखते समय इस अंतर को समझना जरूरी है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में इन संवतों का उल्लेख पारंपरिक काल गणना को स्पष्ट करता है और किसी तिथि की पहचान को अधिक व्यवस्थित बनाता है।
आज शरद ऋतु चल रही है। वर्षा के बाद मौसम में बदलाव का दौर जारी है और दिन के साथ सुबह-शाम के वातावरण में अंतर महसूस हो सकता है। बाहर निकलने, यात्रा या अन्य गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
अयन की दृष्टि से दक्षिणायन चल रहा है। भारतीय पंचांग परंपरा में इसे सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी अवधि माना जाता है। धार्मिक पंचांगों में अयन का उल्लेख काल गणना के साथ किया जाता है।
आज सूर्योदय 5:51 AM पर और सूर्यास्त 5:46 PM पर होगा। सुबह से शाम तक के कार्यों की योजना बनाते समय इन दोनों समयों को आधार बनाया जा सकता है। विशेष रूप से सुबह की पूजा और दिन के अंतिम हिस्से की गतिविधियों के लिए सूर्यास्त का समय ध्यान देने योग्य रहेगा।
आज चंद्रोदय 9:06 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 10:29 AM पर होगा। यानी आज चंद्रमा देर शाम दिखाई देगा और अगले दिन सुबह तक इसकी स्थिति बनी रहेगी। पंचांग के अनुसार चंद्रमा वृष राशि में रहेगा और चंद्र निवास दक्षिण दिशा में माना गया है।
आज कृतिका नक्षत्र 6:03 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र बदल जाएगा। चूंकि कृतिका की अवधि सूर्योदय के कुछ ही समय बाद समाप्त हो रही है, इसलिए दिन की शुरुआत में ही पंचांग की नक्षत्र स्थिति बदल जाएगी।
सिद्धि योग 9:19 PM तक रहेगा। आज इसका अधिकांश समय दिन और शाम के दौरान प्रभावी रहेगा। पंचांग में योग की स्थिति को दिन के अलग-अलग समय को समझने के लिए देखा जाता है और आज सिद्धि योग की अवधि देर शाम तक बनी रहेगी।
आज तैतिल करण 12:35 PM तक रहेगा। इसके ठीक एक मिनट बाद, 12:36 PM पर पंचमी तिथि भी समाप्त होगी। इसलिए दोपहर के आसपास पंचांग में करण और तिथि दोनों में लगातार बदलाव देखने को मिलेगा। इस समय को आज की पंचांग गणना का एक प्रमुख परिवर्तन बिंदु माना जा सकता है।
आज शुभ मुहूर्त 11:25 AM से 12:11 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य का समय निर्धारित करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 1:18 PM से 2:47 PM
गुलिक काल: 8:50 AM से 10:19 AM
यमघण्टकाल: 5:51 AM से 7:20 AM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरी कार्यों के लिए परिस्थिति, सुविधा और कार्य की आवश्यकता के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। यदि दक्षिण दिशा की यात्रा करनी हो, तो पंचांग में दी गई इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। इसके साथ यात्रा की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय जानकारी को भी देखना व्यावहारिक रहेगा।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा वृष राशि में स्थित रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्र निवास दक्षिण दिशा में है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति को तिथि, नक्षत्र और योग के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति को समझा जाता है।
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