माँ चंद्रघंटा को क्या भोग लगाना चाहिए?
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माँ चंद्रघंटा को क्या भोग लगाना चाहिए? | Maa Chandraghanta Ko Kya Bhog Lagana Chahiye?

क्या आप जानते हैं माँ चंद्रघंटा को कौन सा भोग अर्पित करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को विशेष फल प्रदान करती हैं? यहाँ पढ़ें पूरी जानकारी सरल शब्दों में।

माँ चंद्रघंटा के भोग के बारे में

माँ चंद्रघंटा को भोग स्वरूप दूध और उससे बने व्यंजन (खीर, पायसम, मिष्ठान्न) विशेष प्रिय हैं। इन्हें भोग लगाने से साधक के जीवन में शांति, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। माँ को दूध से बनी खीर अर्पित करने से मनोबल बढ़ता है और संकटों से रक्षा मिलती है।

माँ चंद्रघंटा कौन हैं?

माँ चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा रूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। उनका नाम उनके मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचंद्र के कारण पड़ा है। वह शांति, शक्ति और वीरता की प्रतीक हैं और महिषासुर राक्षस का वध कर देवताओं की रक्षा के लिए अवतरित हुई थीं। माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी (घंटा) जैसी आकृति होती है, जिसके कारण उन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। उनका वर्ण स्वर्ण समान चमकदार है और वे सिंह की सवारी करती हैं। उनके दस हाथ होते हैं, जिनमें शस्त्र और कमल पुष्प रहते हैं। वे अपने भक्तों के लिए शांत और कल्याणकारी, लेकिन शत्रुओं के लिए अत्यंत उग्र और विनाशकारी मानी जाती हैं।

माँ चंद्रघंटा की पूजा से साधक के भीतर धैर्य, वीरता और आत्मविश्वास का विकास होता है। उनकी आराधना से जीवन में नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और भय का नाश होता है। यह रूप भक्तों को शांति, सुख और समृद्धि प्रदान करता है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और माँ दुर्गा का संकल्प लें।
  • एक मिट्टी या तांबे के पात्र में जल भरकर उस पर नारियल और आम के पत्ते रखें।
  • कलश को माँ शक्ति का प्रतीक मानकर पूजन करें।
  • माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • धूप, दीप, अक्षत, फूल, रोली, चंदन, और गंगाजल से उनका पूजन करें।
  • माँ चंद्रघंटा को दूध और दूध से बने व्यंजन विशेष रूप से प्रिय हैं।
  • इस दिन खीर का भोग लगाने का विशेष महत्व है।
  • पूजा के समय इस मंत्र का जाप करें- ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः
  • कम से कम 108 बार जप करने से मन की शांति और साहस की प्राप्ति होती है।
  • अंत में माँ की आरती करें और परिवार तथा समाज की सुख-शांति की कामना करें।

माँ चंद्रघंटा को क्या भोग लगाना चाहिए?

  • माँ चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई और खीर का भोग लगाना चाहिए। विशेष रूप से केसर की खीर या दूध से बनी अन्य मिठाई, जैसे पेड़ा या बर्फी चढ़ाना शुभ होता है। इस भोग को लगाने से मानसिक शांति मिलती है और सभी दुख दूर होते हैं।
  • घर के कलेश और कामकाज में बाधाओं को दूर करने के लिए मां चंद्रघंटा को दूध और चावल से बनी खीर का भोग लगाया जा सकता है।
  • मां चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है।
  • इन चीजों का भी भोग लगाया जा सकता है, जो मां को प्रसन्न करते हैं।

माँ चंद्रघंटा के भोग से मिलने वाले लाभ

माँ चंद्रघंटा को दूध और उससे बने व्यंजन अर्पित करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं।

माँ चंद्रघंटा के भोग से मिलने वाले लाभ

  • दूध का भोग चढ़ाने से मनुष्य के जीवन से भय और मानसिक अशांति दूर होती है।
  • साधक के अंदर साहस और आत्मबल बढ़ता है।
  • घर-परिवार में शांति, सौभाग्य और समृद्धि आती है।
  • माना जाता है कि माँ का यह भोग भक्त की वाणी और व्यक्तित्व को मधुर व आकर्षक बनाता है।
  • दूध का भोग मन और शरीर को पवित्र और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है।
  • साधना में स्थिरता आती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।

माँ चंद्रघंटा को भोग लगाते समय ध्यान देने योग्य बातें

  • भोग हमेशा सात्विक हो, यानी इसमें लहसुन, प्याज़ या मांसाहार का प्रयोग न करें।
  • माँ चंद्रघंटा को दूध और उससे बने व्यंजन प्रिय हैं, इसलिए ताज़ा और शुद्ध दूध का ही उपयोग करें।
  • यथासंभव सफेद रंग के व्यंजन (जैसे खीर, पेड़ा, रसगुल्ला) अर्पित करें, यह माँ को अत्यंत प्रिय है।
  • भोग बनाने से पहले स्नान कर लें और मन को शुद्ध रखें।
  • भोग साफ-सुथरे बर्तन में ही तैयार करें।
  • भोग को सीधे माँ के सामने रखें, उस पर तुलसी पत्र या फूल चढ़ाएं।
  • पहले माँ को भोग अर्पित करें, उसके बाद ही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।
  • भोग अर्पित करते समय ‘ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • सबसे महत्वपूर्ण है कि भोग पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ अर्पित किया जाए, तभी उसका पूर्ण फल मिलता है।

निष्कर्ष

माँ चंद्रघंटा की पूजा और उन्हें दूध या दूध से बने भोग अर्पित करने से भक्त के जीवन में शांति, साहस और समृद्धि आती है। नवरात्रि के तीसरे दिन माँ की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। भोग लगाते समय शुद्धता और श्रद्धा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भक्ति भाव ही पूजा का सार है। माँ चंद्रघंटा के आशीर्वाद से भय और बाधाएँ दूर होकर आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस प्रकार उनकी आराधना साधक के जीवन को सुख, शांति और दिव्यता से भर देती है।

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Published by Sri Mandir·January 13, 2026

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