
जानें इसे पढ़ने के अद्भुत लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में साहस, ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाने का सरल उपाय।
उग्रं वीरं मंत्र का सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह मंत्र साहस, भय से मुक्ति और आंतरिक शक्ति को जाग्रत करने वाला बताया गया है। श्रद्धा के साथ इसके जाप से नकारात्मक ऊर्जा का नाश और आत्मबल की वृद्धि होती है। इस लेख में जानिए उग्रं वीरं मंत्र का अर्थ, महत्व और इसके जाप से मिलने वाले लाभ।
उग्रं वीरं मंत्र ‘भगवान नृसिंह’ को समर्पित है। भगवान नृसिंह, भगवान विष्णु के चौथे अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने ये अवतार भक्त प्रह्लाद की रक्षा और दैत्यराज हिरण्यकश्यप के अंत के लिए लिया था। नृसिंह अवतार में भगवान विष्णु आधे नर और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए, और अपनी उग्र शक्ति से अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की।
‘उग्रं वीरं मंत्र’ को नृसिंह कवच और नृसिंह स्तोत्रों में भी विशेष स्थान दिया गया है। यह मंत्र प्राचीन काल से ही भक्तों द्वारा भय, बाधाओं और मृत्यु जैसे कष्टों से मुक्ति पाने के लिए जपा जाता रहा है। इसे "भय नाशक मंत्र" भी कहा जाता है, क्योंकि यह साधक को निर्भयता और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
उग्रं वीरं महा-विष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युर्मृत्युं नमाम्यहम्॥
अर्थ: मैं उस उग्र, वीर, और सर्वशक्तिमान महाविष्णु को प्रणाम करता हूँ, जो चारों ओर से प्रज्वलित अग्नि के समान दिखाई देते हैं। वे नृसिंह रूप में अत्यंत भीषण होने के बावजूद कल्याणकारी हैं। वे मृत्यु के भी मृत्यु हैं, अर्थात स्वयं मृत्यु का नाश करने वाले हैं। मैं उन भगवान नृसिंह को बार-बार नमस्कार करता हूँ।
विस्तृत व्याख्या
"उग्रं" का अर्थ है प्रचंड और कठोर। यह भगवान नृसिंह की अद्भुत शक्ति का प्रतीक है।
"वीरं" का अर्थ है पराक्रमी, जो हर प्रकार के असुर और बुराई का नाश करने वाले हैं।
"महा-विष्णुं" दर्शाता है कि नृसिंह भगवान वास्तव में स्वयं विष्णु का ही अवतार हैं।
"ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्" से तात्पर्य है कि उनकी दिव्य आभा अग्नि की ज्वालाओं की भाँति चारों ओर फैलती है।
"नृसिंहं" अर्थात् आधा नर, आधा सिंह रूप जो अनोखा और दिव्य है।
"भीषणं भद्रं" – भयंकर रूप में भी वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी और रक्षक हैं।
"मृत्युर्मृत्युं" का अर्थ है कि वे स्वयं मृत्यु के भी मृत्यु हैं, अर्थात जिनसे मृत्यु भी भयभीत रहती है।
"नमाम्यहम्" से तात्पर्य है कि मैं उन परम रक्षक को सादर प्रणाम करता हूँ।
भय और नकारात्मकता से मुक्ति
इस मंत्र के जप से व्यक्ति के मन में छिपा भय, असुरक्षा और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि जो साधक नियमित रूप से इसका जाप करता है, उसके जीवन से भय का अंधकार मिट जाता है और साहस आता है।
मृत्यु के भय का नाश
भगवान नृसिंह को ‘मृत्युर्मृत्युं’ कहा गया है, अर्थात मृत्यु के भी मृत्यु। इस मंत्र के जप से व्यक्ति के भीतर मृत्यु का भय समाप्त होता है और जीवन में स्थिरता व शांति आती है। गंभीर रोग या कष्ट में भी यह मंत्र आशा और शक्ति प्रदान करता है।
बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
उग्रं वीरं मंत्र को अत्यंत प्रभावशाली सुरक्षा कवच माना गया है। इसका जाप घर, परिवार और साधक को हर प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, बुरी दृष्टि और अदृश्य बाधाओं से सुरक्षित रखता है। यह एक प्रकार का दिव्य कवच बनकर कार्य करता है।
मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि
नियमित जाप से साधक के भीतर आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करने में यह मंत्र विशेष सहायक है। यह मन को स्थिर करता है और चिंता व तनाव को दूर करने में मदद करता है।
रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ
धार्मिक मान्यता है कि नृसिंह भगवान का यह मंत्र शरीर से जुड़ी कई समस्याओं और रोगों को दूर करने में सहायक होता है। विशेषकर मानसिक रोग, भय और अनिद्रा जैसी समस्याओं में इसका जाप लाभकारी माना गया है।
परिवार और घर की शांति
घर में यदि अक्सर अशांति, कलह या तनाव का माहौल रहता हो, तो इस मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह वातावरण को पवित्र और शांत बनाता है।
आध्यात्मिक उन्नति
उग्रं वीरं मंत्र केवल भय और रोग नाशक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक है। यह साधक को भक्ति, श्रद्धा और भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप से जोड़ता है। इससे साधक का ध्यान एकाग्र होता है और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है।
यदि साधक जीवन में सर्वसिद्धि और पूर्ण लाभ पाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई विधि से 'नृसिंह मंत्र’ का जप करना सर्वोत्तम माना गया है:
इस मंत्र का कुल पाँच लाख बार जप 40 दिनों में पूर्ण करना चाहिए।
प्रतिदिन रात्रि के समय शांत चित्त होकर इस मंत्र का जप करना सबसे श्रेष्ठ फल देता है।
मंत्र जाप के दौरान प्रतिदिन देसी घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें।
पहले दिन और अंतिम दिन भगवान नृसिंह को 2 लड्डू, 2 लौंग, 2 मीठे पान और 1 नारियल भेंट करें।
अंतिम दिन की भेंट अगले दिन किसी विष्णु मंदिर में अर्पित कर दें।
40वें दिन जब जप पूर्ण हो जाए, तब परंपरा के अनुसार दशांश हवन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
यदि किसी कारणवश हवन करना संभव न हो तो इसकी पूर्ति के लिए अतिरिक्त 50,000 मंत्र और जप करने चाहिए।
जप के लिए लाल रंग का आसन उपयोग करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
जाप के समय रक्त चंदन या मूंगे की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ माना गया है।
प्रतिदिन कम से कम 1000 बार मंत्र का जप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
‘उग्रं वीरं मंत्र’ साधक को भय, मृत्यु, रोग और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखता है। भगवान नृसिंह का यह मंत्र मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।
जो भी व्यक्ति इस मंत्र का श्रद्धा और भक्ति से जाप करता है, उसे जीवन में साहस, आत्मविश्वास और शांति प्राप्त होती है।
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