जन्माष्टमी का व्रत कब से शुरू होगा?
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जन्माष्टमी का व्रत कब से शुरू होगा?

कृष्ण जन्म के पावन पर्व पर व्रत की सही तिथि और समय जानें। यहां पाएं उपवास की शुरुआत से लेकर पूजा मुहूर्त तक पूरी जानकारी।

जन्माष्टमी के व्रत के बारे में

जन्माष्टमी का व्रत श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में रखा जाता है। भक्त उपवास रखते हैं, कथा सुनते हैं और रात 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। व्रत आत्मशुद्धि और भक्ति की भावना को प्रबल करता है।

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जन्माष्टमी का व्रत

संपूर्ण भारत में आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाने वाला ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ का पर्व इस बार भी विशेष उत्साह के साथ मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में रखा जाने वाला यह व्रत ‘अष्टमी तिथि’ और ‘रोहिणी नक्षत्र’ के संयोग पर रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

वर्ष 2026 में भगवान श्रीकृष्ण का 5253वाँ जन्मोत्सव शुक्रवार, 4 सितम्बर 2026 को मनाया जाएगा। यह पावन पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। अगले दिन यानी शनिवार, 5 सितम्बर 2026 को दही हांडी उत्सव मनाया जाएगा।

जन्माष्टमी का व्रत कब से शुरू होगा?

वर्ष 2026 में भगवान श्रीकृष्ण का 5253वाँ जन्मोत्सव शुक्रवार, 4 सितम्बर 2026 को मनाया जाएगा। यह पावन पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। अगले दिन यानी शनिवार, 5 सितम्बर 2026 को दही हांडी उत्सव मनाया जाएगा।

जन्माष्टमी 2026 पूजा और शुभ मुहूर्त

  • निशिता पूजा समय : रात 11:53 बजे से 12:40 बजे तक (5 सितम्बर)
  • पूजा अवधि : 47 मिनट
  • मध्यरात्रि क्षण : रात 12:16 बजे
  • चंद्रोदय समय : रात 12:08 बजे (5 सितम्बर)

अष्टमी तिथि

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ : 4 सितम्बर 2026, सुबह 02:25 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त : 5 सितम्बर 2026, रात 12:13 बजे

रोहिणी नक्षत्र

  • रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ : 4 सितम्बर 2026, रात 12:29 बजे
  • रोहिणी नक्षत्र समाप्त : 4 सितम्बर 2026, रात 11:04 बजे

व्रत पारण का समय

धर्म शास्त्रों के अनुसार व्रत का पारण 5 सितम्बर को सुबह 06:07 बजे के बाद किया जा सकता है, क्योंकि उस समय तक अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र समाप्त हो चुके होंगे। हालांकि, कई स्थानों पर परंपरा के अनुसार भक्त निशिता काल यानी मध्यरात्रि पूजा के बाद भी व्रत खोलते हैं। इसलिए कुछ लोग 5 सितम्बर को रात 12:40 बजे के बाद पारण करते हैं।

जन्माष्टमी पर व्रत रखने का महत्व

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृष्ण की पूजा व उपवास के लिए विशेष शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो जातक श्रद्धापूर्वक भगवान श्री कृष्ण की उपासना करते हैं, उन्हें तीन जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है, और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

शास्त्रों में भी इस अष्टमी तिथि को जया अष्टमी भी कहा जाता है। यह तिथि विजय दिलाने वाली मानी जाती है, इसलिए इस दिन उपवास रखने से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है। साथ ही, उपवास शरीर के लिए भी लाभदायक होता है। इस मौसम में जब पाचन तंत्र कमजोर होता है, व्रत रखने से मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है और बीमारियों से बचाव होता है।

जन्माष्टमी पर व्रत न कर पाएं तो क्या करें?

कई बार किसी स्वास्थ्य कारण या पारिवारिक जिम्मेदारी के चलते उपवास रखना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में अगर आप श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो भी कुछ उपाय करके आप इस दिन पुण्य कमा सकते हैं।

  • जातक यदि व्रत नहीं रख सकते तो भी विधि विधान से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें।
  • पूरे दिन भगवान श्री कृष्ण का सुमिरन करें और अपने मन में किसी के प्रति नकारात्मक भावना न लाएं।
  • इसके अलावा यदि संभव हो तो इस दिन गौवंश की सेवा करें।
  • जन्माष्टमी के दिन किसी गरीब को भोजन कराने या उन्हेंयथासंभव दान देने से भी विशेष फल प्राप्त होता है।
  • श्री कृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि को जागरण करें और हरि कीर्तन करें।

शास्त्रों में कहा गया है कि भक्ति में भाव सबसे महत्वपूर्ण होता है, नियम नहीं। इसीलिए जन्माष्टमी के दिन यदि तन से उपवास न हो पाए, तो मन से की गई भक्ति भी प्रभु श्रीकृष्ण को उतनी ही प्रिय होती है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत के लाभ

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाता है। शास्त्रों में इस व्रत से जुड़े अनेक चमत्कारी लाभ बताए गए हैं:

कार्यों में सफलता

भगवान श्रीकृष्ण स्वयं एक महान कर्मयोगी थे। जो व्यक्ति अपने जीवन में कार्यक्षेत्र में मनचाही सफलता पाना चाहता है, उसके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायक है। व्रत रखने के बाद जीवन में हर ओर से शुभ समाचार और सफलता के संकेत मिलने लगते हैं।

परिवार में सुख-शांति

यदि परिवार में लंबे समय से तनाव, कलह या अशांति हो, तो जन्माष्टमी का व्रत रखने से घर में प्रेम, मेल-जोल और सुख-शांति लौट आती है। यह व्रत रिश्तों में मिठास लाने वाला माना गया है।

धन-समृद्धि की प्राप्ति

जो व्यक्ति आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा हो या अपने जीवन में स्थिरता और समृद्धि चाहता हो, उसके लिए यह व्रत बहुत ही शुभ होता है। धन, अन्न, संपत्ति और समृद्धि पाने के लिए इससे बेहतर कोई व्रत नहीं माना गया है।

संतान प्राप्ति का आशीर्वाद

यदि कोई दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, तो वे जन्माष्टमी के दिन चांदी के श्रीकृष्ण की मूर्ति लाकर पूरे विधि-विधान से पूजा करें। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करने से उन्हें संतान प्राप्ति का वरदान अवश्य मिलता है।

प्रेम व वैवाहिक जीवन में मधुरता

मनचाहा जीवनसाथी पाना हो, विवाह में आ रही अड़चनें दूर करनी हों या विवाह के बाद दांपत्य जीवन में प्रेम और समझ बढ़ानी हो, इन सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी जन्माष्टमी का व्रत अत्यंत फलदायक है।

ये थी ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत’ से जुड़ी विशेष जानकारी। इस लेख में बताए गए मुहूर्त पर व्रत करें। जो लोग व्रत न सकें वे ऊपर दिए गए उपाय करके व्रत के बराबर फल प्राप्त कर सकते हैं। हमारी कामना है कि इस ‘जन्माष्टमी’ आपकी व्रत-उपासना विधिवत संपन्न हो और इसका संपूर्ण फल मिले।

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Published by Sri Mandir·September 1, 2026

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