
2026 में इस्कॉन जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी? जानें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तारीख और इस्कॉन मंदिरों में होने वाले भव्य कार्यक्रमों की पूरी जानकारी।
जन्माष्टमी इस्कॉन मंदिरों में भव्य रूप से मनाई जाती है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव कीर्तन, नृत्य, भागवत कथा और रात्रि 12 बजे अभिषेक के साथ होता है। भक्त उपवास रखते हैं और भक्ति-भाव से श्रीकृष्ण का स्मरण करते हैं।
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है। International Society for Krishna Consciousness यानी ISKCON मंदिरों में यह पर्व विशेष भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में ISKCON के अनुसार जन्माष्टमी 2 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन आधी रात को मथुरा की जेल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। ISKCON में इस दिन को केवल एक त्योहार नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण दिवस के रूप में देखा जाता है। ISKCON मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और झांकियों से सजाया जाता है।
भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष आरती और कीर्तन करते हैं। “हरे कृष्ण” महामंत्र का जाप पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देता है। इस दिन भगवान कृष्ण को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं। दूध, दही, मक्खन, फल और मिठाइयों का विशेष भोग लगाया जाता है। भक्त श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण भी करते हैं। ISKCON में जन्माष्टमी केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता का उत्सव माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस प्रकार जन्माष्टमी का पर्व भक्तों के लिए श्रद्धा, आनंद और भगवान कृष्ण से जुड़ने का विशेष अवसर माना जाता है।
इस्कॉन जन्माष्टमी वह उत्सव है जिसे अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (ISKCON - International Society for Krishna Consciousness) द्वारा पूरे विश्व में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य दिवस के रूप में अत्यंत भव्य रूप से मनाया जाता है। इसे “वैष्णव जन्माष्टमी” भी कहा जाता है क्योंकि इसे वैष्णव परंपरा और पंचांग के अनुसार मनाया जाता है।
इस्कॉन जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य स्मृति में मनाई जाती है। इस दिन को आध्यात्मिक शुद्धि, भक्ति, सेवा और श्रीकृष्ण के श्रीविग्रह के दर्शन, अभिषेक व भजन कीर्तन से पूरित किया जाता है। श्रीकृष्ण को केवल एक ऐतिहासिक पुरुष नहीं, बल्कि भगवान का पूर्णावतार माना जाता है, जिन्होंने धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश हेतु अवतार लिया।
इस्कॉन मंदिरों में जन्माष्टमी अत्यंत दिव्यता और भक्ति भाव से भरा भव्य पर्व होता है, जिसे वैष्णव परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। यहां जन्माष्टमी निशित काल (मध्यरात्रि) के दौरान मनाई जाती है क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म इसी काल में हुआ था। इस्कॉन में जन्माष्टमी की प्रमुख विशेषताएं हैं:
श्री मंदिर पर आज हम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर आपके लिए संपूर्ण पूजा विधि लेकर आए हैं। यह त्योहार कृष्ण भक्तों के लिए एक उत्सव के समान होता है, जिसे हर हिंदू घर में पूरी भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दौरान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की ज़ोरों-शोरों से तैयारियां की जाती हैं, और उसी में आपकी मदद करने के लिए आज आपको इस पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं।
सबसे पहले ये जान लेते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा के लिए उपासकों को किन किन चीज़ों की आवश्यकता होगी-
जिसमें बालगोपाल के लिए झूला, बालगोपाल की धातु की मूर्ति, बांसुरी, बालगोपाल के वस्त्र, श्रृंगार के गहने, बालगोपाल के झूले को सजाने के लिए फूल, तुलसी के पत्ते, चंदन, कुमकुम, अक्षत, मिश्री, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, तुलसी की माला, खड़ा धनिया, लाल वस्त्र, केले के पत्ते, शहद, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मक्खन, गंगाजल, धूप बत्ती, कपूर, केसर, फल और गंगा जल।
तो इस लेख में आपने जाना कि किस प्रकार आप विधि-विधान से कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा कर सकते हैं और किस मुहूर्त पर पूजा कर सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पावन कथा सुनने के लिए श्री मंदिर ऐप पर बने रहें।
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