वृषभ संक्रांति कब है 2026?
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वृषभ संक्रांति कब है 2026?

क्या आप जानना चाहते हैं कि 2026 में वृषभ संक्रांति कब मनाई जाएगी और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए वृषभ संक्रांति की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों की पूरी जानकारी।

वृषभ संक्रांति के बारे में

वृषभ संक्रांति को दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। यह दिन आस्था के साथ-साथ सेवा और आत्मिक शुद्धि का अवसर भी है। इस दिन किए गए शुभ कार्य जीवन को सकारात्मक बनाते हैं। तो आइए जानते हैं वृषभ संक्रांति के बारे में अधिक जानकारी।

वृषभ संक्रांति कब है?

वर्ष 2026 में वृषभ संक्रांति शुक्रवार, 15 मई 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है।

संक्रांति का क्षण (सूर्य प्रवेश समय):

  • प्रातः 06:28 बजे

पुण्य काल मुहूर्त:

  • प्रातः 05:30 बजे से 06:28 बजे तक
  • अवधि: 58 मिनट

महा पुण्य काल:

  • प्रातः 05:30 बजे से 06:28 बजे तक
  • अवधि: 58 मिनट

वृषभ संक्रांति क्या है?

वृषभ संक्रांति वह दिन है जब सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस घटना को संक्रांति कहा जाता है। इस दिन को सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। वृषभ संक्रांति के साथ ही प्रकृति में बदलाव देखने को मिलता है। इसका सकारात्मक प्रभाव खेती-किसानी, व्यापार और स्वास्थ्य पर पड़ता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल अक्षय होता है तथा पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।

वृषभ संक्रांति का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में वृषभ संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व है। इस शुभ दिन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा नदी सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और पुण्य अर्जित करते हैं। स्नान के बाद भक्तजन सूर्य देव की विधिपूर्वक पूजा, जप-तप और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की आराधना करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और जीवन के कष्टों से राहत मिलती है। साथ ही शारीरिक समस्याओं में भी कमी आती है। इस दिन किया गया दान विशेष फलदायी माना जाता है, जो व्यक्ति को दीर्घकाल तक शुभ परिणाम प्रदान करता है।

वृषभ संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष से निकलकर वृषभ राशि में गोचर करते हैं। यह परिवर्तन खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह संक्रांति आध्यात्मिक उन्नति, पवित्र स्नान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह समय आत्मिक विकास, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में स्थिरता लाने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार, वृषभ संक्रांति न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी अवसर है।

वृषभ संक्रांति कैसे मनाई जाती है?

वृषभ संक्रांति के दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर आत्मा की शुद्धि करते हैं और इस अवसर पर व्रत-उपवास, दान-पुण्य तथा सूर्य की पूजा करने की प्राचीन परंपरा निभाई जाती है।मान्यता है कि इस दिन गंगा आदि तीर्थों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को दिव्य पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने से आयु, स्वास्थ्य और तेज में वृद्धि होती है।इस संक्रांति पर यदि कोई शुभ योग भी बनता है, तो व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान की शक्ति और भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि वृषभ संक्रांति को धर्म, श्रद्धा और आत्मिक जागरूकता का पर्व माना जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मकता का संचार करता है।

वृषभ संक्रांति के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

वृषभ संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन किए गए दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अन्न का दान: हिंदू धर्म में अन्न दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन गेहूं, चावल, दाल या अन्य अनाज जरूरतमंदों को दान करने से घर में अन्न की कमी नहीं होती। वस्त्रों का दान: सूती वस्त्र जैसे धोती, कुर्ता, चादर आदि का दान करना पुण्यदायी होता है और जरूरतमंदों को राहत देता है। जल का दान: प्यासे लोगों को इस दिन जल पिलाना या प्याऊ लगवाना अत्यंत शुभ माना गया है। मिट्टी के घड़े या सुराही दान करना भी लाभकारी होता है। गुड़ का दान: गुड़ सूर्य देव को प्रिय होता है। इसका दान करने से जीवन में मिठास और सुख-समृद्धि आती है। घी का दान: घी को पवित्र माना जाता है। इसका दान करने से स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि होती है। तांबे के बर्तन का दान: तांबा सूर्य देव से संबंधित धातु है। इस दिन तांबे के बर्तन दान करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस दिन दान औऱ स्नान का महत्व

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है, विशेष रूप से गंगा नदी में स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। स्नान के बाद दान-पुण्य और सूर्य देव की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति आती है। यह दिन दूसरों की सहायता कर आत्मिक संतोष प्राप्त करने का भी अवसर प्रदान करता है।

वृषभ संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को जल अर्पित करें, जल में लाल फूल, चावल और कुमकुम मिलाएं और मंत्रों का श्रद्धा पूर्वक जाप करें।
  • घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और पूजा स्थल को पवित्र रखें।
  • सूर्य देव को गुड़, फल या मिठाई का भोग लगाएं और विधिपूर्वक आरती करें।
  • अंत में पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और अपनी क्षमता अनुसार दान अवश्य करें।

वृषभ संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व

वृषभ संक्रांति आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा से सूर्य देव की पूजा और दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, रोग-दोष दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। मान्यता है कि इस दिन की गई उपासना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में निरंतर उन्नति होती है।

वृषभ संक्रांति के दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

वृषभ संक्रांति के दिन पवित्रता और संयम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन गाय को हरा चारा खिलाना शुभ माना जाता है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए और मन में सकारात्मक विचार बनाए रखने चाहिए, ताकि आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सके।

वृषभ संक्रांति से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थल और आयोजन

वृषभ संक्रांति के अवसर पर कई स्थानों पर विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन किया जाता है। गवी गंगाधरेश्वर मंदिर में इस दिन विशेष दर्शन और पूजा होती है। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु और केरल में इसे फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जहां लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हैं।

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Published by Sri Mandir·March 31, 2026

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