वट पूर्णिमा व्रत 2026 कब है?
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वट पूर्णिमा व्रत 2026 कब है? | Vat Purnima Vrat 2026 Kab Hai

इस लेख में जानिए 2026 में वट पूर्णिमा व्रत की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।

वट पूर्णिमा व्रत के बारे में

वट पूर्णिमा व्रत विशेष रूप से माता सावित्री और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने तथा वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और दीर्घायु की कामना के लिए एक अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा, व्रत और कथा सुनने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वट पूर्णिमा व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा अत्यंत फलदायी होता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि, स्थिरता और पारिवारिक खुशहाली का संचार होता है।

वट पूर्णिमा व्रत 2026 कब है?

वट पूर्णिमा व्रत हिंदू धर्म में विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं और माता सावित्री तथा सत्यवान की कथा सुनती हैं।

वट पूर्णिमा व्रत 2026: तिथि और समय

वर्ष 2026 में वट पूर्णिमा व्रत इस प्रकार मनाया जाएगा:

  • तिथि: 29 जून 2026, सोमवार
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 28 जून 2026 को 27:06+ बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जून 2026 को 29:26+ बजे

उदया तिथि के अनुसार वट पूर्णिमा व्रत 29 जून 2026 को रखा जाएगा।

संबंधित व्रत:

  • वट सावित्री अमावस्या व्रत:** 16 मई 2026, शनिवार

वट पूर्णिमा व्रत का महत्व

वट पूर्णिमा व्रत का संबंध माता सावित्री और उनके पति सत्यवान की कथा से जुड़ा है। यह व्रत पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख के लिए किया जाता है। वट (बरगद) वृक्ष को इस दिन विशेष रूप से पूजा जाता है, क्योंकि इसे अमरत्व और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक महत्व:

  • पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा जाता है
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख बना रहता है
  • परिवार में समृद्धि आती है
  • महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है

वट वृक्ष का महत्व

वट (बरगद) का वृक्ष हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना जाता है।

  • इसकी जड़ में ब्रह्मा का वास
  • तने में विष्णु का वास
  • शाखाओं में शिव का वास माना जाता है इसलिए इस वृक्ष की पूजा करने से सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

वट सावित्री व्रत कथा

वट पूर्णिमा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा सावित्री और सत्यवान की है। प्राचीन समय में सावित्री नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी, जिनका विवाह सत्यवान नाम के राजकुमार से हुआ था। एक दिन यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। सावित्री ने अपने तप, भक्ति और बुद्धिमत्ता से यमराज को प्रसन्न किया और अपने पति के प्राण वापस ले लिए। इस प्रकार उन्होंने अपने पति को मृत्यु से बचा लिया। तभी से यह व्रत महिलाओं के लिए पति की दीर्घायु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि

1. सुबह की तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • साफ और सुंदर वस्त्र पहनें (अधिकतर लाल या पीले रंग के)
  • व्रत का संकल्प लें

2. पूजा सामग्री

  • रोली, अक्षत
  • फूल, फल
  • धूप, दीप
  • कच्चा सूत (धागा)
  • मिठाई

3. वट वृक्ष की पूजा

  • वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें
  • वृक्ष के चारों ओर कच्चा धागा लपेटें (7 या 11 बार)
  • माता सावित्री और सत्यवान का स्मरण करें

4. कथा सुनना

  • वट सावित्री व्रत कथा सुनें या पढ़ें

5. आरती और प्रसाद

  • पूजा के बाद आरती करें
  • प्रसाद बांटें

व्रत के नियम

  • दिनभर व्रत रखें (कुछ महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं)
  • सात्विक भोजन करें
  • पति के प्रति सम्मान और सेवा भाव रखें
  • झूठ और क्रोध से दूर रहें

वट पूर्णिमा व्रत कैसे मनाया जाता है?

  • भारत के कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात में यह व्रत बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

प्रमुख परंपराएं:

  • महिलाएं समूह में वट वृक्ष के पास पूजा करती हैं
  • गीत और भजन गाए जाते हैं
  • कथा सुनने की परंपरा होती है
  • नई साड़ी और श्रृंगार किया जाता है

वट पूर्णिमा व्रत के लाभ

  • पति की आयु लंबी होती है
  • वैवाहिक जीवन सुखमय होता है
  • परिवार में खुशहाली आती है
  • महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है

आध्यात्मिक संदेश

वट पूर्णिमा व्रत हमें यह सिखाता है:

  • सच्चा प्रेम और समर्पण सबसे बड़ी शक्ति है
  • धैर्य और विश्वास से हर कठिनाई दूर हो सकती है
  • परिवार और रिश्तों का महत्व समझना चाहिए

रोचक तथ्य

  • यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं करती हैं
  • वट वृक्ष को अमरता का प्रतीक माना जाता है
  • सावित्री-सत्यवान की कथा इस व्रत का आधार है
  • यह व्रत वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाता है

निष्कर्ष

वट पूर्णिमा व्रत एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है, जो पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने और परिवार में सुख-शांति लाने का प्रतीक है। यह व्रत महिलाओं के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास को दर्शाता है। वर्ष 2026 में वट पूर्णिमा व्रत 29 जून, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से माता सावित्री का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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Published by Sri Mandir·May 14, 2026

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