श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है?
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श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि श्रावण पुत्रदा एकादशी कब मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए इस पावन एकादशी की तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों की पूरी जानकारी।

श्रावण पुत्रदा एकादशी के बारे में

श्रावण पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। यह व्रत संतान प्राप्ति, धर्म, पुण्य व मानसिक शांति के लिए रखा जाता है। इस लेख में जानिए श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां।

श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है?

श्रावण पुत्रदा एकादशी रविवार, 23 अगस्त 2026 को है और पारण सोमवार, 24 अगस्त 2026 को किया जाएगा।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 अगस्त 2026, 02:00 एएम
  • एकादशी तिथि समाप्त: 24 अगस्त 2026, 04:18 एएम.
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय: 24 अगस्त 2026, 01:41 पीएम से 04:16 पीएम.
  • हरि वासर समाप्ति समय (पारण तिथि के दिन): 24 अगस्त 2026, 10:49 एएम

श्रावण पुत्रदा एकादशी क्या है?

साल में दो एकादशियां पुत्रदा एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हैं। ये एकादशी श्रावण और पौष माह के शुक्ल पक्ष में आती है। जैसे सभी एकादशी तिथियां भगवान विष्णु को समर्पित होती हैं, वैसे ही पुत्रदा एकादशी भी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। पहली पुत्रदा एकादशी श्रावण माह में आती है, जबकि दूसरी पौष माह में। पुत्रदा का अर्थ है पुत्र प्रदान करने वाली और श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इसे पवित्रा एकादशी और पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी है, जो संतान सुख की इच्छा रखते हैं। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा, उपवास, व्रत और विष्णु सहस्त्रनाम के जप से संतान सुख प्राप्ति की कामना करते हैं और प्रभु की कृपा प्राप्त करते हैं।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धार्मिक महत्व: श्रावण पुत्रदा एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। जानकारी अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही यह व्रत पूरे परिवार के सुख-शांति और समृद्धि के लिए लाभकारी होता है। इस व्रत से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और भक्ति से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

सांस्कृतिक महत्व: सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी श्रावण पुत्रदा एकादशी का विशेष स्थान है। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की पूजा की जाती है, जिससे उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। विशेष रूप से सावन मास में आने वाली यह एकादशी और भी अधिक महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि यह समय भगवान शिव के पूजन का होता है और यह दोनों देवताओं की कृपा प्राप्त करने का अद्भुत अवसर प्रदान करता है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

जानकारी के अनुासर, द्वापर युग में महिष्मति पुरी के राजा महीजित पुत्रहीन थे और संतान सुख की प्राप्ति के लिए बहुत दुखी थे। उन्होंने कई उपाय किए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। एक दिन राजा ने अपने मंत्रियों के साथ ऋषि लोमश से मदद मांगी। ऋषि ने बताया कि राजा के पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य थे, जिन्होंने एक प्यासी गाय को जल पीते हुए हटा दिया था, जिसके कारण उन्हें पुत्रहीनता का शाप मिला। ऋषि ने राजा को श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत करने और जागरण करने की सलाह दी, जिससे पूर्व जन्म के पाप का नाश होगा। राजा और उसकी प्रजा ने व्रत किया और द्वादशी को पुण्य का फल प्राप्त किया। रानी गर्भवती हुई और उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। इस प्रकार श्रावण शुक्ल एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाने लगा जो संतान सुख की इच्छा रखने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी कैसे मनाई जाती है?

श्रावण पुत्रदा एकादशी मनाने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके एक चौकी स्थापित करें और इसे गंगाजल से पवित्र करें। इसके बाद चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और उसके दायीं ओर दीपक प्रज्वलित करें। फिर चौकी के सामने आसन बिछाकर बैठें। जल पात्र से अपने हाथों को शुद्ध करें और तिलक करें। अब चौकी पर अक्षत के दाने डालकर गणेश जी की प्रतिमा रखें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। भगवान गणेश और विष्णु जी पर पुष्प जल, हल्दी, कुमकुम, अक्षत और चन्दन से तिलक करें फिर उन्हें जनेऊ और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करते हुए पुष्प, जनेऊ और माला अर्पित करें। भगवान विष्णु को पंचामृत में तुलसी दल डालकर अर्पित करें। अब मिछाई और फल अर्पित करें। पूजा में विष्णु सहस्त्रनाम या श्री हरि स्त्रोतम का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु की आरती करें, भूल-चूक के लिए भगवान से क्षमा याचना करें और भोग को प्रसाद के रूप में सभी में वितरित करें।

श्रावण पुत्रदा एकादशी की तैयारी कैसे की जाती है?

श्रावण पुत्रदा एकादशी की तैयारी करने के लिए सबसे पहले दशमी तिथि की शाम को व्रत और पूजा का संकल्प लें। इस दिन रात्रि का भोजन करने के बाद, अगले दिन एकादशी पर किसी भी प्रकार का अन्न या निषेधित पदार्थ न खाएं। एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर दातुन करें, फिर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें। स्नान के पानी में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और चन्दन का तिलक करें। इसके बाद भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य देने के बाद उनकी पूजा करें और अपने व्रत को सफल बनाने के लिए प्रार्थना करें। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे चौकी, पीला वस्त्र, गंगाजल, भगवान विष्णु और गणेश जी की प्रतिमा, अक्षत, पुष्प, माला, धूप, दीप, पंचामृत, मिष्ठान्न आदि तैयार करें। फिर इन सभी सामग्रियों से भगवान विष्णु की पूजा करें और संतान सुख की प्राप्ति की कामना करें। अधिक जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ या पंडित से जानकारी ले सकते हैं

श्रावण पुत्रदा एकादशी में किए जाने वाले पवित्र कार्य

इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पहनाकर पूजा की जाती है। साथ ही, माता लक्ष्मी की पूजा भी इस दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। व्रत करने वाले भक्तों को इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम, विष्णु स्तोत्र और गोपीनाथ द्वादशी व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इन कार्यों के माध्यम से भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

श्रावण पुत्रदा एकादशी के दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों में प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलकारी होता है। तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाना और शाम को दीपक जलाना भी इस दिन की एक महत्वपूर्ण क्रिया है। तुलसी के पौधे में लाल धागा (कलावा) बांधना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, गरीब और जरूरतमंद व्यक्तियों को भोजन, वस्त्र या दक्षिणा दान करना पुण्यकारी होता है। पूरे दिन भगवान विष्णु के नामों का जाप करते रहें और रात्रि में भजन-कीर्तन कर जागरण करें। इसके अलावा, पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा पढ़ना या सुनना व्रत का पूरा फल दिलवाता है। इस दिन से लेकर सावन पूर्णिमा तक चलने वाले झूलन महोत्सव में भी भाग लिया जाता है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का ज्योतिषीय महत्व

श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में शुभता और समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से नव ग्रहों के दोषों का निवारण होता है और व्रत रखने वाले व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों का शुभ प्रभाव बढ़ता है। इसके अलावा, इस दिन किए गए दान और पूजा से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

हिंदू धर्म में श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व अत्यधिक है। यह व्रत भगवान विष्णु के भक्तों के सभी पापों और दोषों को नष्ट कर देता है। चतुर्मास में आने वाली यह एकादशी विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और उनकी पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। श्रावण माह जो शिव को समर्पित होता है, में आने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने से शिव और विष्णु दोनों देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत व्यक्ति की आत्मिक उन्नति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक शांति मिलती है। इस दिन का उपवास और पूजा व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन को प्रगति की ओर अग्रसर करते हैं। विशेष रूप से सावन मास में आने वाली यह एकादशी, भगवान विष्णु की पूजा का सर्वोत्तम अवसर है। यह व्रत व्यक्ति को पारिवारिक सुख, पापों से मुक्ति और भगवान के निकट होने का आशीर्वाद देता है।

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Published by Sri Mandir·June 9, 2026

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