
क्या आप जानना चाहते हैं कि फुलेरा दूज 2026 कब है और इसे इतना शुभ क्यों माना जाता है? इस लेख में जानिए फुलेरा दूज की सही तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय – सब कुछ एक ही जगह।
फुलेरा दूज हिंदू धर्म का एक पावन और आनंदमय पर्व है, जो मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित माना जाता है। यह फाल्गुन मास में होली से पहले मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में फूलों से विशेष सजावट होती है और भगवान को पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इसे मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। वातावरण भक्तिभाव और उत्साह से भर जाता है।
भारतीय पर्व और त्योहार हमारी संस्कृति, आस्था और परंपराओं से गहराई से जुड़े होते हैं। इन्हीं पावन पर्वों में से एक है फुलेरा दूज। यह पर्व विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम, आनंद और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन मास में आने वाला यह त्योहार वसंत और होली के आगमन का संकेत देता है। इस दिन मंदिरों में विशेष सजावट होती है, भक्त फूलों से होली खेलते हैं और वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
आइए, फुलेरा दूज 2026 से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियों को विस्तार और सरल भाषा में समझते हैं।
वर्ष 2026 में फुलेरा दूज 19 फरवरी, बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। यह पर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है। फुलेरा दूज 2026 की तिथि और समय इस प्रकार है -
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 04:49 ए एम से 05:39 ए एम |
प्रातः सन्ध्या | 05:14 ए एम से 06:30 ए एम |
अभिजित मुहूर्त | 11:49 ए एम से 12:35 पी एम |
विजय मुहूर्त | 02:06 पी एम से 02:52 पी एम |
गोधूलि मुहूर्त | 05:52 पी एम से 06:17 पी एम |
सायाह्न सन्ध्या | 05:54 पी एम से 07:10 पी एम |
अमृत काल | 01:00 पी एम से 02:34 पी एम |
निशिता मुहूर्त | 11:46 पी एम से 12:37 ए एम, फरवरी 20 |
फुलेरा दूज हर वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व वसंत पंचमी और होली के बीच आता है। इस समय मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है, चारों ओर हरियाली और फूल दिखाई देने लगते हैं। यही कारण है कि इस पर्व का संबंध फूलों, प्रेम और आनंद से जोड़ा जाता है। ब्रज क्षेत्र, खासकर मथुरा और वृंदावन में फुलेरा दूज का विशेष महत्व होता है। यहां के मंदिरों में इस दिन भव्य आयोजन होते हैं।
फुलेरा दूज का धार्मिक दृष्टि से बहुत बड़ा महत्व माना गया है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन राधा-कृष्ण की विशेष पूजा करने से जीवन में प्रेम, सुख और सौभाग्य बढ़ता है। धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, फुलेरा दूज के दिन किया गया पूजन व्यक्ति के दुख, कष्ट और बाधाओं को दूर करता है। जो लोग विवाह की इच्छा रखते हैं या दांपत्य जीवन में मधुरता चाहते हैं, उनके लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फुलेरा दूज अबूझ मुहूर्त होती है। इसका अर्थ है कि इस दिन विवाह, सगाई या अन्य मांगलिक कार्य करने के लिए अलग से शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन किए गए शुभ कार्यों पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की विशेष कृपा मानी जाती है।
फुलेरा दूज से जुड़ी एक प्रमुख पौराणिक मान्यता भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से संबंधित है। कहा जाता है कि फाल्गुन मास में एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के साथ फूलों की होली खेली थी। उस दिन वातावरण फूलों की खुशबू और आनंद से भर गया था। इसी प्रसंग के कारण इस पर्व को “फुलेरा दूज” कहा गया। “फुलेरा” शब्द फूलों से जुड़ा है, जो प्रेम, कोमलता और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। तभी से यह दिन राधा-कृष्ण के प्रेम उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। आज भी ब्रज में इस दिन रंगों की जगह फूलों से होली खेलने की परंपरा है, जो इसे अन्य त्योहारों से अलग बनाती है।
फुलेरा दूज के दिन कुछ विशेष कार्य करने से इसका पुण्य और शुभ फल बढ़ जाता है -
फुलेरा दूज के दिन कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक माना जाता है -
फुलेरा दूज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का पर्व है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि जीवन में प्रेम और सौहार्द का कितना महत्व है। वर्ष 2026 में फुलेरा दूज 19 फरवरी को मनाई जाएगी, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की कृपा पाने का एक शुभ अवसर है। इस दिन श्रद्धा, सरलता और प्रेम भाव से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता लेकर आती है। फुलेरा दूज हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और होली के रंगीन पर्व की ओर एक सुंदर कदम साबित होता है।
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