मीन संक्रांति कब है 2026
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मीन संक्रांति कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि मीन संक्रांति 2026 में कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या होता है? इस लेख में जानिए सूर्य के मीन राशि में प्रवेश की सही तिथि, इस दिन के पुण्यकाल, दान-पुण्य और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

मीन संक्रांति के बारे में

मीन संक्रांति वह पावन दिन है जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और सूर्य देव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कर्मों से पुण्य फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह दिन आध्यात्मिक साधना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

चैत्र माह में सूर्य का गोचर और खरमास

ज्योतिष के अनुसार, चैत्र महीने में सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाता है। खरमास के समय शुभ कार्यों पर रोक मानी जाती है, जबकि स्नान, दान, जप-तप और पूजा जैसे पुण्य कार्य किए जाते हैं।

कब से कब तक रहेगा खरमास?

  • खरमास की शुरुआत: 15 मार्च 2026
  • खरमास का समापन: 13 अप्रैल 2026
  • शुभ कार्यों की शुरुआत: 14 अप्रैल 2026 से

इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। लेकिन धर्म-कर्म, दान-पुण्य और साधना के लिए यह समय उत्तम माना जाता है।

सूर्य राशि परिवर्तन (सूर्य गोचर 2026)

ज्योतिषीय गणना के अनुसार-

  • तिथि: 15 मार्च 2026
  • समय: देर रात 01 बजकर 08 मिनट इस समय सूर्य देव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। 14 मार्च तक सूर्य कुंभ राशि में रहेंगे।

मीन संक्रांति 2026: शुभ मुहूर्त

मीन संक्रांति के दिन सूर्य देव मीन राशि में गोचर करते हैं। इस दिन स्नान-दान और पूजा का विशेष महत्व होता है।

  • पुण्य काल- सुबह 06:07 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक
  • महा पुण्य काल- सुबह 06:07 बजे से 08:07 बजे तक
  • पुण्य क्षण- देर रात 01:08 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:31 ए एम से 05:19 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या - 04:55 ए एम से 06:07 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त - 11:43 ए एम से 12:31 पी एम
  • विजय मुहूर्त - 02:07 पी एम से 02:55 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त - 06:04 पी एम से 06:28 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या - 06:07 पी एम से 07:19 पी एम
  • अमृत काल - 07:03 पी एम से 08:43 पी एम
  • निशिता मुहूर्त - 11:43 पी एम से 12:31 ए एम, 16 मार्च
  • द्विपुष्कर योग - 05:56 ए एम, मार्च 16 से 06:06 ए एम, 16 मार्च

भक्त अपनी सुविधा अनुसार इन समयों में स्नान, पूजा, जप-तप और दान कर सकते हैं।

मीन संक्रांति का महत्व

मीन संक्रांति सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ खरमास की शुरुआत मानी जाती है। यह समय शुभ कार्यों से विराम लेकर धर्म, साधना और दान पर ध्यान देने का होता है। मीन संक्रांति से आध्यात्मिक साधना का विशेष काल शुरू होता है। इस दिन स्नान, दान, जप-तप और पूजा का बड़ा महत्व माना गया है। माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। सूर्य देव की उपासना से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता आती है।

मीन संक्रांति पर बनने वाले शुभ योग

  • मीन संक्रांति के दिन कुछ विशेष योग बन रहे हैं- शिववास योग, शिव योग, परिघ योग
  • इन योगों में सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति मानी जाती है।

मीन संक्रांति के लाभ

पापों से मुक्ति: पवित्र स्नान और दान से मन और आत्मा की शुद्धि होती है। सूर्य कृपा: सूर्य देव की पूजा से मान-सम्मान, आत्मबल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। आर्थिक शांति: दान-पुण्य करने से धन से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं। मानसिक शांति: जप-तप और ध्यान से मन शांत रहता है और तनाव घटता है।

मीन संक्रांति पर क्या करें?

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, संभव हो तो नदी या तीर्थ जल से।
  • सूर्य देव को अर्घ्य (जल) अर्पित करें।
  • गाय, गरीब, बुजुर्ग या जरूरतमंद को दान करें (अन्न, वस्त्र, तांबा, गुड़ आदि)।
  • मंत्र जप, ध्यान और पूजा करें।
  • सादा, सात्विक भोजन करें।
  • माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद लें।

मीन संक्रांति पर क्या न करें

  • विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ-मांगलिक कार्य न करें।
  • तामसिक भोजन (मांस, शराब आदि) से बचें।
  • झूठ, क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • किसी का अपमान या अनादर न करें।
  • आलस्य और गलत आदतों से बचें।

चैत्र माह सनातन धर्म में आस्था और साधना का विशेष समय है। मीन संक्रांति से खरमास शुरू होता है, जिसमें शुभ कार्य नहीं होते, लेकिन पूजा-पाठ और दान का बड़ा महत्व होता है। सही मुहूर्त में किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सकारात्मक फल देते हैं।

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Published by Sri Mandir·March 9, 2026

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