मत्स्य जयंती कब है 2026
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मत्स्य जयंती कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि मत्स्य जयंती 2026 में कब मनाई जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की जयंती की सही तिथि, पूजा का महत्व और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताओं के बारे में।

मत्स्य जयंती के बारे में

मत्स्य जयंती भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य अवतार की स्मृति में मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने मछली का रूप धारण कर मनु को प्रलय से बचाया और वेदों की रक्षा की थी। यह पर्व धर्म, संरक्षण और सृष्टि की रक्षा का संदेश देता है। इस दिन व्रत, पूजा और दान का विशेष महत्व माना जाता है।

मत्स्य जयंती 2026

मत्स्य जयंती की तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि की विस्तृत जानकारी

सनातन धर्म में भगवान विष्णु के दस अवतारों का विशेष महत्व बताया गया है। जब-जब सृष्टि पर संकट आया, तब-तब श्रीहरि ने विभिन्न रूप धारण कर धर्म की रक्षा की। इन्हीं अवतारों में पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण अवतार है मत्स्य अवतार। चैत्र शुक्ल तृतीया को भगवान विष्णु ने मछली का रूप लेकर सृष्टि और वेदों की रक्षा की थी। उसी पावन घटना की स्मृति में हर वर्ष मत्स्य जयंती मनाई जाती है।

यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संरक्षण और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक दिवस है। वर्ष 2026 में मत्स्य जयंती विशेष संयोगों के साथ मनाई जाएगी। आइए विस्तार से जानते हैं, मत्स्य जयंती क्या है?, कब है?, इसका धार्मिक महत्व क्या है? और इस दिन कौन-कौन से अनुष्ठान किए जाते हैं?

मत्स्य जयंती क्या है?

मत्स्य जयंती भगवान विष्णु के प्रथम अवतार की जयंती के रूप में मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार सतयुग में एक समय ऐसा आया जब असुर हयग्रीव ने ब्रह्मा जी से वेदों का अपहरण कर लिया। वेदों के लुप्त हो जाने से सृष्टि में अज्ञान और अधर्म का अंधकार फैल गया। तब भगवान विष्णु ने विशाल मत्स्य (मछली) का रूप धारण कर वेदों को पुनः प्राप्त किया और ब्रह्मा जी को सौंपा।

एक अन्य कथा के अनुसार, प्रलय के समय राजा सत्यव्रत (जो आगे चलकर वैवस्वत मनु बने) को भगवान ने मत्स्य रूप में दर्शन देकर आने वाली आपदा की सूचना दी और जीव-जंतुओं तथा ज्ञान की रक्षा का मार्ग बताया। इस प्रकार मत्स्य अवतार केवल वेदों की रक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के संरक्षण का प्रतीक बन गया।

आज भी आंध्र प्रदेश के नागालपुरम स्थित प्रसिद्ध वेद नारायण स्वामी मंदिर को भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जोड़ा जाता है। यह मंदिर इस दिव्य स्वरूप की विशेष उपासना का केंद्र माना जाता है।

मत्स्य जयंती 2026 कब है?

  • मत्स्य जयंती हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।
  • वर्ष 2026 में यह पावन पर्व: 21 मार्च 2026, शनिवार को मनाया जाएगा।

तिथि संबंधी जानकारी

  • तृतीया तिथि प्रारम्भ: 21 मार्च 2026 को प्रातः 02 बजकर 30 मिनट से
  • तृतीया तिथि समाप्त: 21 मार्च 2026 को रात्रि 11 बजकर 56 मिनट तक
  • उदयातिथि के अनुसार 21 मार्च को ही मत्स्य जयंती मनाई जाएगी।

मत्स्य जयंती 2026 का पूजा मुहूर्त

  • मत्स्य जयंती पूजा मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 18 मिनट से 03 बजकर 44 मिनट तक
  • अवधि: 02 घंटे 26 मिनट
  • इस समय भगवान विष्णु के मत्स्य स्वरूप की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

  • यदि आप विशेष जप, हवन, दान या व्रत संकल्प करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए शुभ समय उपयोगी रहेंगे -
  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन प्रातः सन्ध्या 04 बजकर 50 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 08 मिनट से 06 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन सायाह्न सन्ध्या 06 बजकर 09 मिनट से 07 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन अमृत काल शाम 05 बजकर 58 मिनट से 07 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 41 मिनट से 22 मार्च की रात्रि 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।

विशेष योग

  • इस दिन रवि योग 22 मार्च को रात्रि 12 बजकर 37 मिनट से प्रातः 06 बजकर 00 मिनट तक रहेगा।
  • रवि योग को अत्यंत शुभ और सिद्धिदायक माना जाता है। इस योग में किए गए मांगलिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

मत्स्य जयंती का धार्मिक महत्व

मत्स्य जयंती केवल एक पौराणिक कथा की स्मृति नहीं है, बल्कि यह धर्म की रक्षा और ज्ञान के संरक्षण का संदेश देती है। जब संसार अज्ञान और अधर्म में डूब गया था, तब श्रीहरि ने स्वयं अवतार लेकर वेदों को पुनः स्थापित किया। यह घटना दर्शाती है कि सत्य और धर्म कभी नष्ट नहीं होते, बल्कि समय-समय पर उनकी पुनर्स्थापना होती है।मत्स्य अवतार यह भी सिखाता है कि संकट के समय धैर्य और श्रद्धा बनाए रखना आवश्यक है। जैसे भगवान ने प्रलय के समय सृष्टि को सुरक्षित किया, वैसे ही भक्तों के जीवन में आने वाली कठिनाइयों को भी वे दूर करते हैं।

मत्स्य जयंती के प्रमुख अनुष्ठान

1. प्रातःकालीन स्नान और संकल्प

  • भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।

2. व्रत और उपवास

  • इस दिन उपवास रखने की परंपरा है। कई लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ निर्जल व्रत भी रखते हैं। व्रत का पारण अगले दिन प्रातः किया जाता है।

3. भगवान मत्स्य की पूज

  • पूजा में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप, धूप, पुष्प, तुलसी पत्र और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना गया है।

4. पवित्र ग्रंथों का पाठ

  • इस दिन विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत कथा या मत्स्य पुराण का पाठ करना लाभकारी होता है।

5. दान-पुण्य

  • ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना पुण्यदायक माना गया है।

मत्स्य जयंती पर मिलने वाले लाभ

  • इस व्रत को श्रद्धा से करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है।
  • पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
  • दान करने से आर्थिक स्थिरता और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • मत्स्य अवतार का स्मरण हमें यह सिखाता है कि ज्ञान और धर्म की रक्षा ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। जब मनुष्य सच्चे मन से ईश्वर की शरण में जाता है, तो हर संकट से पार पा सकता है।
  • यह दिवस हमें धर्म, ज्ञान और संरक्षण की प्रेरणा देता है। आइए इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु के मत्स्य स्वरूप का स्मरण करें, व्रत-पूजन करें और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प लें। आपके जीवन में श्रीहरि की कृपा सदैव बनी रहे।
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Published by Sri Mandir·March 16, 2026

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