ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 कब है?
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ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 कब है? | Jyeshtha Adhik Amavasya 2026 Kab Hai

इस लेख में जानिए 2026 में ज्येष्ठ अधिक अमावस्या की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या के बारे में

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या विशेष रूप से पितरों की कृपा प्राप्त करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से तर्पण, श्राद्ध और दान करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। ज्येष्ठ मास और अधिक मास के संयोग के कारण इस अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है, जिससे इसके पुण्य फल कई गुना अधिक माने जाते हैं।

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 कब है?

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन जब यह अमावस्या अधिक मास (मलमास) में आती है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसे अधिक अमावस्या कहा जाता है। 2026 में आने वाली ज्येष्ठ अधिक अमावस्या अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जा रही है। यह दिन पितरों की शांति, दान-पुण्य, पूजा और आत्मशुद्धि के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 कब है?

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को है

इस दिन की विशेष जानकारी: तिथि: ज्येष्ठ (अधिक) मास, कृष्ण पक्ष, अमावस्या विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी) स्थान: नई दिल्ली, भारत

इस दिन के प्रमुख योग:

  • ज्येष्ठ अधिक मास समाप्त
  • मिथुन संक्रांति
  • इष्टि
  • सर्वार्थ सिद्धि योग
  • अमृत सिद्धि योग
  • आडल योग यह सभी योग इस दिन को अत्यंत शुभ और शक्तिशाली बनाते हैं।

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या क्या होती है?

जब अमावस्या तिथि अधिक मास में आती है और वह ज्येष्ठ महीने में होती है, तो उसे ज्येष्ठ अधिक अमावस्या कहा जाता है। अधिक मास को “पुरुषोत्तम मास” भी कहा जाता है और यह समय भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस मास में आने वाली अमावस्या विशेष रूप से पितृ पूजा और दान के लिए अत्यंत फलदायी होती है।

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या का महत्व

इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है।

प्रमुख महत्व:

1. पितृ शांति का सर्वोत्तम दिन इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। 2. पापों का नाश अधिक मास में की गई पूजा और दान से व्यक्ति के पाप समाप्त होते हैं। 3. विशेष योगों का प्रभाव सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं। 4. जीवन में सकारात्मक बदलाव इस दिन की साधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

मिथुन संक्रांति का विशेष संयोग

15 जून 2026 को मिथुन संक्रांति भी है। यानी इस दिन सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। यह संयोग इस दिन को और भी शुभ बना देता है। इस दिन सूर्य पूजा, दान और स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पूजा विधि

इस दिन पूजा करने की विधि सरल है लेकिन नियमों का पालन आवश्यक है।

सुबह की तैयारी:

  • सूर्योदय से पहले उठें
  • पवित्र नदी या घर पर स्नान करें
  • साफ वस्त्र पहनें

पूजा सामग्री:

  • जल
  • काले तिल
  • कुश
  • दीपक
  • फूल
  • धूप

पूजा विधि:

  • पितरों का स्मरण करें
  • तिल और जल से तर्पण करें
  • “ॐ पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप करें
  • दीपक जलाकर पूजा करें
  • भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें
  • जरूरतमंदों को दान दें

इस दिन क्या करें और क्या न करें?

इस दिन क्या करें?

  • पवित्र नदी में स्नान करें
  • पितरों का तर्पण करें
  • भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें
  • दान-पुण्य करें
  • ध्यान और जप करें

इस दिन क्या न करें?

  • मांसाहार और शराब से दूर रहें
  • झगड़ा और क्रोध न करें
  • किसी का अपमान न करें
  • नकारात्मक सोच से बचें

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या के लाभ

इस दिन व्रत और पूजा करने से कई लाभ मिलते हैं:

  • पितृ दोष समाप्त होता है
  • परिवार में सुख-शांति आती है
  • आर्थिक समस्याएँ दूर होती हैं
  • मानसिक तनाव कम होता है
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है

पौराणिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा करते हैं। यदि इस दिन श्रद्धा से पूजा की जाए, तो वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। अधिक मास में आने वाली अमावस्या को विशेष शक्ति प्राप्त होती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

कौन लोग यह व्रत कर सकते हैं?

  • सभी आयु वर्ग के लोग
  • गृहस्थ जीवन जीने वाले
  • पितृ दोष से परेशान लोग
  • आध्यात्मिक साधक

विशेष सुझाव

  • तर्पण करते समय सही विधि अपनाएँ
  • ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएँ
  • घर में दीपक जलाएँ
  • अधिक मास में दान का विशेष महत्व होता है

कौन लोग यह व्रत कर सकते हैं?

  • सभी आयु वर्ग के लोग
  • गृहस्थ जीवन जीने वाले
  • पितृ दोष से परेशान लोग
  • आध्यात्मिक साधक

विशेष सुझाव

  • तर्पण करते समय सही विधि अपनाएँ
  • ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएँ
  • घर में दीपक जलाएँ
  • अधिक मास में दान का विशेष महत्व होता है

निष्कर्ष

2026 में ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 15 जून, सोमवार को पड़ रही है। यह दिन अत्यंत शुभ है क्योंकि इस दिन मिथुन संक्रांति, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा, तर्पण और दान करता है, तो उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि अवश्य आती है।

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Published by Sri Mandir·May 14, 2026

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