झूलेलाल जयंती कब है 2026
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झूलेलाल जयंती कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि झूलेलाल जयंती 2026 में कब मनाई जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव की सही तिथि, सिंधी समाज में इस पर्व का महत्व और इससे जुड़ी विशेष परंपराओं के बारे में।

झूलेलाल जयंती के बारे में

चैत्र शुक्ल द्वितीया को सिंधी नववर्ष की शुरुआत होती है और इस दिन भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है जिसे झूलेलाल जयंती के नाम से जाना जाता है। यह पर्व सिंधियों के संरक्षक और आराध्य देव भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना के रूप में मनाया जाता है। आइए अब हम इस पर्व के महत्व और विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

झूलेलाल जयंती

झूलेलाल जयंती हिन्दू धर्म के विशेष पर्वों में से एक है, जो सिन्धी समुदाय द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व चेटी चण्ड के रूप में भी प्रसिद्ध है और हर साल चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। चेटी चण्ड (चैत्र मास को सिंधी भाषा में चेट और चांद को चण्ड कहा जाता है) विशेष रूप से भगवान झूलेलाल की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो सिन्धी समाज के आराध्य देवता हैं। भगवान झूलेलाल को उडेरोलाल के नाम से भी जाना जाता है और वे सिन्धियों के प्रमुख संरक्षक सन्त माने जाते हैं। इस दिन का आयोजन सिन्धी हिन्दुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व होता है, जो केवल पूजा-अर्चना के माध्यम से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

झूलेलाल जयंती क्या है?

झूलेलाल जयंती एक पवित्र पर्व है जो सिन्धी समुदाय द्वारा भगवान झूलेलाल के जन्म और उनके द्वारा किए गए चमत्कारों की याद में मनाया जाता है। यह दिन चेटी चण्ड के रूप में भी मनाया जाता है और इस दिन विशेष रूप से जल देवता वरुण देव की पूजा की जाती है। जानकारी के अनुसार, भगवान झूलेलाल का जन्म 10वीं शताब्दी में सिन्ध प्रांत में हुआ था और उनका जन्म नदी के देवता के रूप में माना जाता है। झूलेलाल जयंती पर भगवान झूलेलाल के जन्म की खुशी में सिन्धी हिन्दू समुदाय विशेष पूजा और अनुष्ठान करते हैं।

झूलेलाल जयंती कब है

  • झूलेलाल जयंती चेटी चण्ड के दिन मनाई जाती है, जो हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को आती है।
  • यह तिथि प्रायः मार्च महीने में पड़ती है और यह दिन विशेष रूप से उगादी और गुड़ी पड़वा के एक दिन बाद मनाया जाता है।
  • 2026 में झूलेलाल जयंती का पर्व 20 मार्च को मनाया जाएगा।
  • चेटी चण्ड 20 मार्च 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।
  • इस दिन का मुहूर्त शाम 06:32 बजे से लेकर 07:59 बजे तक रहेगा, जो 1 घंटा 26 मिनट का होगा।
  • प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे होगा
  • इसका समापन 20 मार्च 2026 को सुबह 04:52 बजे होगा।
  • इस दिन विशेष पूजा और अन्य धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जो दिनभर चलते हैं।

कौन हैं भगवान झूलेलाल?

भगवान झूलेलाल को उडेरोलाल भी कहा जाता है। वे वरुण देव के अवतार माने जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब सिन्धी हिन्दू मिरखशाह के अत्याचारों से परेशान थे, तब उन्होंने वरुण देव से मदद मांगी। वरुण देव के आशीर्वाद से एक दिव्य शिशु का जन्म हुआ, जिसे लोग भगवान झूलेलाल के नाम से पूजा करने लगे। भगवान झूलेलाल ने समाज को न केवल धार्मिक स्वतंत्रता दी, बल्कि सिन्धी संस्कृति और आध्यात्मिकता को भी सशक्त किया। उनका अवतार जल देवता के रूप में हुआ था, और उन्हें समाज में शांति, सुरक्षा और भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

झूलेलाल जयंती क्यों मनाई जाती है

झूलेलाल जयंती भगवान झूलेलाल के जन्म को याद करने का अवसर है। जानकारी के उनुसार, सिन्धी हिन्दू समाज मिरखशाह नामक एक अत्याचारी शासक के अत्याचारों से परेशान था। मिरखशाह ने सभी हिन्दूओं को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया और जो लोग धर्म परिवर्तन करने से इंकार करते थे, उन्हें मौत की सजा दी जाती थी। इस संकट से बचने के लिए, सिन्धी समाज ने वरुण देव, जो नदी के देवता माने जाते हैं से प्रार्थना की। चालीस दिन की पूजा के बाद वरुण देव ने वचन दिया कि वह इस अत्याचारी शासक से उनका बचाव करेंगे। और फिर, मिरखशाह की क्रूरता से बचने के लिए नसरपुर नामक स्थान पर एक दिव्य शिशु का जन्म हुआ, जिसे सिन्धी समाज ने झूलेलाल के नाम से पूजा। भगवान झूलेलाल के इस चमत्कारी जन्म ने सिन्धी समाज को न केवल मिरखशाह से बचाया, बल्कि उन्हें एक नया जीवन और धार्मिक स्वतंत्रता भी दी।

कैसे मनाते हैं झूलेलाल जयंती

झूलेलाल जयंती के दिन सिन्धी समाज के लोग विशेष रूप से सिंहासन और मंदिरों में पूजा करते हैं। इस दिन लोग लकड़ी का मंदिर बनाते हैं, जिसमें लोटे से जल और ज्योति प्रज्वलित की जाती है। श्रद्धालु इस मंदिर को सिर पर उठाकर पूरे गांव या समुदाय में घुमाते हैं, जिसे बहिराणा साहब कहा जाता है। इस पूजा के दौरान विशेष रूप से जल और वरुण देव की पूजा की जाती है, क्योंकि भगवान झूलेलाल को वरुण देव का अवतार माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान झूलेलाल के जन्म का उत्सव मनाते हैं और जल की महिमा का अनुभव करते हैं। साथ ही, इस दिन भजन-कीर्तन और सामूहिक पूजा का आयोजन भी होता है, जहां लोग मिलकर झूलेलाल के गुणगान करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा के अंत में, श्रद्धालु संतुलन, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए जल में दीपक भी रखते हैं।

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Published by Sri Mandir·March 16, 2026

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