
क्या आप जानना चाहते हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती 2026 कब है और इसे क्यों मनाया जाता है? इस लेख में जानिए जयंती की सही तिथि, शिवाजी महाराज का इतिहास, उनका शौर्य और राष्ट्र के प्रति उनका योगदान – सब कुछ सरल भाषा में।
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्म जयंती के रूप में बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यह दिन उनके साहस, पराक्रम और स्वराज्य के आदर्शों को याद करने का अवसर देता है। इस दिन जगह-जगह शोभायात्राएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित होती हैं। लोग उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का संकल्प लेते हैं।
छत्रपति शिवाजी जयंती मराठा साम्राज्य के एक महान योद्धा व राजा शिवाजी भोसले के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। भारतीय इतिहास के पन्नों में छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम एक ऐसे महानायक के रूप में दर्ज है, जिन्होंने अपनी वीरता और बुद्धिमानी से मराठा साम्राज्य की नींव रखी। शिवाजी महाराज केवल एक कुशल योद्धा ही नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी शासक भी थे। शिष्टता और उदारता के प्रतीक शिवाजी महाराज ने ही मराठा साम्राज्य की स्थापना की थी।
हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार हर साल शिवाजी जयन्ती चैत्र कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस साल ये तिथि 06 मार्च 2026, शुक्रवार को पड़ रही है। वहीं तारीख के अनुसार हर वर्ष '19 फरवरी' को शिवाजी जयंती मनाई जाती है। हालांकि हम शिवाजी जयंती की तिथि या तारीख़ से जुड़ी जानकारी की पुष्टि होने का दावा नहीं कर रहे हैं। यहां दी गई जानकारी अन्य माध्यमों पर उपलब्ध शिवाजी जयंती से संबंधित जानकारियों के आधार पर दी गई है।
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती का महत्व केवल एक महान योद्धा के जन्मदिन को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वराज्य, साहस, न्याय और आत्मसम्मान के विचार को सम्मान देने का दिन है। शिवाजी महाराज ने कठिन परिस्थितियों में मराठा साम्राज्य की नींव रखी और विदेशी शासन के विरुद्ध खड़े होकर स्वशासन का सपना साकार किया।
यह जयंती हमें उनकी वीरता, दूरदर्शी शासन, धर्मनिरपेक्ष सोच और प्रजा-हितैषी नीति की याद दिलाती है। शिवाजी महाराज ने महिलाओं का सम्मान, किसानों की रक्षा और स्थानीय भाषा व संस्कृति को बढ़ावा देकर एक आदर्श शासक का उदाहरण प्रस्तुत किया। शिवाजी जयंती समाज में देशप्रेम, एकता और आत्मविश्वास की भावना जगाती है और नई पीढ़ी को अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देती है। इसलिए यह दिन भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष स्थान रखता है।
इतिहासकारों के बीच शिवाजी महाराज के जन्म के वर्ष को लेकर अलग-अलग राय रही है। कुछ पुराने दस्तावेजों और विद्वानों के अनुसार उनका जन्म 6 अप्रैल 1627 को हुआ माना जाता था। वहीं, अन्य शोधकर्ताओं का मानना है कि उनका जन्म 19 फरवरी 1630 को हुआ था। काफी विचार-विमर्श के बाद महाराष्ट्र सरकार ने 19 फरवरी 1630 को ही आधिकारिक जन्मतिथि के रूप में मान्यता दी, ताकि पूरे राज्य में एक ही दिन उत्सव मनाया जा सके।
शिवाजी के जन्मस्थान की बात करें तो उनका जन्म महाराष्ट्र के पुणे जनपद के शिवनेरी किले में हुआ था। शाहजी भोसले तथा जीजाबाई इनके माता-पिता थे।
शिवाजी जयंती मनाने की परंपरा का इतिहास काफी प्रेरणादायक है। इसकी शुरुआत किसी राजा ने नहीं, बल्कि समाज सुधारकों ने की थी:
महात्मा ज्योतिराव फुले: शिवाजी जयंती मनाने की शुरुआत सबसे पहले 1870 में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले ने की थी। उन्होंने ही रायगढ़ किले पर शिवाजी महाराज की समाधि की खोज की थी और पुणे में पहला जयंती उत्सव आयोजित किया था।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक: बाद में स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक ने इस उत्सव को और बड़ा रूप दिया। उन्होंने शिवाजी महाराज के जीवन को युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाया ताकि लोग एकजुट होकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ सकें।
शिवाजी महाराज का शासन काल भारतीय इतिहास का एक स्वर्ण युग माना जाता है। उनका योगदान केवल युद्धों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाज और प्रशासन में भी क्रांतिकारी बदलाव किए।
स्वराज्य की स्थापना: जिस समय भारत के बड़े हिस्से पर मुगल और अन्य विदेशी आक्रमणकारियों का शासन था, उस समय मात्र 16 साल की उम्र में शिवाजी ने 'तोरना किले' पर कब्जा कर स्वराज्य का सपना साकार करना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने रायगढ़, प्रतापगढ़ और कोंडाना जैसे कई महत्वपूर्ण किले जीते। गुरिल्ला युद्ध नीति: शिवाजी महाराज ने 'गनीमी कावा' (गुरिल्ला युद्ध) की शुरुआत की। इसमें छोटी सेना के साथ बड़े दुश्मन को ऊबड़-खाबड़ रास्तों और जंगलों में छकाकर हराया जाता था। नौसेना के जनक: शिवाजी महाराज पहले भारतीय शासकों में से एक थे जिन्होंने समुद्र की सुरक्षा के महत्व को समझा। उन्होंने एक मजबूत नौसेना तैयार की, इसीलिए उन्हें 'भारतीय नौसेना का पिता' भी कहा जाता है। भाषा और संस्कृति का संरक्षण: उन्होंने अपने दरबार में फारसी के बजाय मराठी और संस्कृत भाषा के प्रयोग को बढ़ावा दिया। उन्होंने 'राज्य व्यवहार कोष' जैसा शब्दकोश तैयार करवाया ताकि शासन की भाषा भारतीय हो सके। धर्मनिरपेक्ष और न्यायप्रिय शासक: शिवाजी महाराज ने हमेशा महिलाओं का सम्मान किया और किसानों के हित में काम किया। उनकी सेना में कई मुस्लिम सैनिक और सेनापति भी थे, जो उनकी न्यायप्रियता का प्रमाण है
आज शिवाजी जयंती केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। मुंबई, पुणे, नागपुर सहित देश के बड़े शहरों में इस दिन भव्य झांकियां निकाली जाती हैं। ढोल-ताशों की गूँज के साथ 'जय भवानी, जय शिवाजी' के नारे लगाए जाते हैं। किलों पर जाकर लोग दीये जलाते हैं और महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं।
लगातार युद्धों और प्रशासनिक कार्यों के दबाव के कारण शिवाजी महाराज का स्वास्थ्य गिरने लगा था। 50 वर्ष की आयु में, तेज बुखार के कारण 3 अप्रैल 1680 को रायगढ़ किले में इस महान नायक का निधन हो गया। छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि एक विचार है - अपने देश, अपनी संस्कृति और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का विचार। सरल शब्दों में कहें तो, शिवाजी महाराज एक ऐसे राजा थे, जिन्होंने प्रजा को अपना परिवार माना और स्वराज्य को अपनी पूजा।
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