भीष्म द्वादशी कब है
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भीष्म द्वादशी कब है

क्या आप जानते हैं भीष्म द्वादशी 2026 कब है? यहां जानें तिथि, पूजा विधि, व्रत नियम, मुहूर्त, महत्व और भीष्म पितामह से जुड़ी पौराणिक कथा — सब कुछ एक ही जगह!

भीष्म द्वादशी के बारे में

भीष्म एकादशी हिन्दू धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु की विशेष उपासना और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका नाम महाभारत के भीष्म पितामह के नाम पर रखा गया है, जिनकी धर्मपरायणता और जीवनचर्या के कारण इस दिन को विशेष महत्व प्राप्त है।

भीष्म एकादशी कब है?

भीष्म एकादशी, जिसे जया एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, 2026 में 29 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी।

  • तिथि: 29 जनवरी 2026
  • दिन: गुरुवार

भीष्म एकादशी का महत्व

भीष्म एकादशी हिन्दू धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मनाई जाती है। इसे जया एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और महाभारत के धर्मनिष्ठ पितामह भीष्म के नाम से जुड़ा हुआ है।

पापों से मुक्ति: भीष्म एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त होता है और जीवन में आध्यात्मिक शुद्धि आती है।

भगवान विष्णु की कृपा: इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

आध्यात्मिक लाभ: व्रत और भक्ति से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से सशक्त होता है और पितरों और देवताओं की कृपा प्राप्त करता है।

जीवन में सफलता और विजय: भीष्म का अर्थ है स्थायित्व और विजय। यह व्रत जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय दिलाता है और सभी कार्य सफल बनाता है।

स्वास्थ्य और मानसिक शांति: फलाहारी या निर्जल व्रत से शरीर शुद्ध होता है और भजन, मंत्र जाप तथा ध्यान से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

भीष्म द्वादशी के लाभ

भीष्म द्वादशी जया एकादशी के अगले दिन आती है और इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ मिलते हैं।

1. पापों से मुक्ति: भीष्म द्वादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और वह धर्म और सदाचार की ओर अग्रसर होता है।

2. भगवान विष्णु की कृपा: इस दिन की पूजा से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, घर और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

3. मानसिक और आध्यात्मिक लाभ: व्रत और भक्ति से मन शांत रहता है। भजन, मंत्र जाप और ध्यान से सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।

4. जीवन में सफलता और स्थायित्व: भीष्म द्वादशी का पालन कठिनाइयों पर विजय दिलाता है और सभी कार्यों में सफलता और स्थिरता लाता है।

5. स्वास्थ्य और दान: फलाहारी या निर्जल व्रत शरीर को शुद्ध करता है। इस दिन जरूरतमंदों को दान देने से अतिरिक्त पुण्य प्राप्त होता है।

भीष्म द्वादशी: क्या करें और क्या न करें

भीष्म द्वादशी जया एकादशी के अगले दिन आती है और इसे भगवान विष्णु व पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ होते हैं।

भीष्म द्वादशी में क्या करें

व्रत रखें

  • फलाहारी या निर्जल व्रत करें।
  • व्रत का उद्देश्य भगवान विष्णु की भक्ति और पापों से मुक्ति है।
  • इससे आत्मिक शांति और मानसिक स्थिरता मिलती है।

भगवान विष्णु की पूजा

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ स्थान पर पूजा करें।
  • दीपक जलाएं, फूल चढ़ाएं और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • विष्णु सहस्रनाम या अन्य भक्ति स्तोत्र का पाठ करें।

दान और सेवा करें

  • जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक चीजें दें।
  • दान करने से व्रत अधिक फलदायी और पुण्यदायक बनता है।

भजन और मंत्र जाप करें

  • दिनभर भजन, कीर्तन और मंत्र जाप में समय बिताएं।
  • ध्यान और भक्ति से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

सत्य और धर्म का पालन करें

  • झूठ, छल और अन्य नकारात्मक क्रियाओं से दूर रहें।
  • ईमानदारी और संयम बनाए रखें।

भीष्म द्वादशी में क्या न करें

  • हिंसा और झगड़े से बचें
  • लड़ाई-झगड़ा और नकारात्मक कार्य न करें।
  • अशुद्ध भोजन और नशे से परहेज करें
  • मांस, शराब, तंबाकू या अन्य हानिकारक चीजों का सेवन न करें।
  • सांसारिक व्यस्तताओं और तनाव से दूर रहें
  • दिन को भक्ति, ध्यान और संयम में बिताएं।
  • झूठ और धोखा न दें
  • किसी को धोखा देना या परेशान करना वर्जित है।

निष्कर्ष

भीष्म द्वादशी का दिन भक्ति, व्रत और दान के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के पाप दूर होते हैं, भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में सफलता व समृद्धि आती है।

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Published by Sri Mandir·December 12, 2025

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