
इस लेख में जानिए 2026 में अधिक दर्श अमावस्या की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।
अधिक दर्श अमावस्या विशेष रूप से पितरों की शांति और कृपा प्राप्त करने का अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से तर्पण, श्राद्ध और दान करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति, परिवार में सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। अधिक मास में पड़ने के कारण इस अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है, जिससे इसके पुण्य फल कई गुना अधिक माने जाते हैं।
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह वह दिन होता है जब चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य होता है और रात सबसे अधिक अंधकारमय होती है। इस दिन पितरों की पूजा, दान, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करने का विशेष महत्व होता है। जब यह अमावस्या अधिक मास (मलमास) में आती है, तो इसे “अधिक दर्श अमावस्या” कहा जाता है। यह समय आध्यात्मिक साधना, पितृ शांति और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
नीचे 2026 में आने वाली प्रमुख अमावस्या तिथियाँ दी गई हैं:
अधिक दर्श अमावस्या वह अमावस्या होती है जो अधिक मास (मलमास) के दौरान आती है। यह सामान्य अमावस्या की तुलना में अधिक शक्तिशाली और फलदायी मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है। इसलिए इस दिन किए गए दान, पूजा और तर्पण का कई गुना फल मिलता है।
2026 में अधिक दर्श अमावस्या 14 जून 2026, रविवार को पड़ेगी। यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पितृ दोष शांति इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होता है। नकारात्मक ऊर्जा का नाश अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। आध्यात्मिक साधना का समय ध्यान और जप करने से मन की शांति और एकाग्रता बढ़ती है। कर्मों की शुद्धि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से पुराने पाप समाप्त होते हैं।
हर अमावस्या का अपना विशेष महत्व होता है। यह दिन पितरों की पूजा, दान और स्नान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन पूजा और तर्पण की विधि बहुत सरल है: सुबह की तैयारी:
यह दिन आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन मन को शांत रखकर ध्यान करने से व्यक्ति को गहरे आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होते हैं। यह समय पुराने कर्मों को समाप्त करके नए जीवन की शुरुआत करने जैसा माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन पितृलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा करते हैं। यदि इस दिन श्रद्धा से पूजा की जाए, तो वे आशीर्वाद देकर वापस लौटते हैं। अधिक मास में आने वाली अमावस्या को विशेष शक्ति प्राप्त होती है, इसलिए इसे अधिक दर्श अमावस्या कहा जाता है।
इस दिन व्रत और पूजा करने से अनेक लाभ मिलते हैं:
2026 में अधिक दर्श अमावस्या 14 जून 2026 को पड़ रही है, जो पितृ शांति और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इसके अलावा पूरे वर्ष कई दर्श अमावस्या आती हैं, जो धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती हैं। यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ इस दिन पूजा, तर्पण और दान करता है, तो उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि अवश्य आती है।
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