
बटुक भैरव आरती से होती है भक्ति और शांति की प्राप्ति। यहां पढ़ें पूरी आरती हिंदी में, विधि और इसके लाभों के साथ।
बटुक भैरव आरती भगवान भैरव के बालरूप की स्तुति में गाई जाती है। यह आरती भय, बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करती है। भक्त इसे श्रद्धा से गाकर शक्ति, साहस और आध्यात्मिक शांति की अनुभूति करते हैं।
आपके लिए चुनी गई पूजाएँ
अपने नाम और गोत्र से पूजा करवाएं और अपने परिवार के लिए ईश्वर का आशीर्वाद पाएं।
भगवान शिव के अनेक सौम्य और रौद्र रूपों में से एक हैं श्री बटुक भैरव। इन्हें भगवान भैरव का बाल, सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप माना जाता है। बटुक भैरव की उपासना विशेष रूप से भक्तों को नकारात्मक शक्तियों, ऊपरी बाधाओं, शत्रुओं और अनिष्टों से रक्षा प्रदान करती है। वे अपने भक्तों की सभी बाधाओं को हरने वाले और उनकी मनोकामनाओं को तुरंत पूरा करने वाले देवता के रूप में पूजे जाते हैं। इनकी पूजा से जीवन में सुरक्षा, साहस और स्थिरता आती है।
ॐ जय बटुक भैरव देवा,
प्रभु जय बटुक भैरव देवा।
सुर नर मुनि सब करते,
प्रभु तुम्हरी सेवा॥ ॐ जय बटुक भैरव देवा...
तुम्ही पाप उद्धारक,
दुःख सिन्धु तारक।
भक्तों के सुखकारक,
भीषण वपु धारक॥ जय भैरव देवा...
वाहन श्वान विराजत,
कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी,
जय जय भयहारी॥ जय भैरव देवा...
तुम बिन शिव सेवा,
सफल नहीं होवे।
चतुर्मुख दीपक,
दर्शन दुःख खोवे॥ जय भैरव देवा...
तेल चटकी दधि मिश्रित,
भाषावलि तेरी।
कृपा कीजिए भैरव,
करिए नहीं देरी॥ जय भैरव देवा...
पाँवों घुँघरू बाजत,
डमरू डमकावत।
बटुकनाथ बन बालक,
जन मन हरषावत॥ जय भैरव देवा...
बटुकनाथ की आरती,
जो कोई नर गावे।
कहे धरणीधर वह नर,
मन वांछित फल पावे॥ जय भैरव देवा...
Did you like this article?

ॐ जय जगदीश हरे आरती - सुनें और पढ़ें अनुराधा पौडवाल द्वारा गाए गए भजन के बोल। जानें 'Om Jai Jagdish Hare' आरती के सुंदर और भक्तिमय शब्द।

भगवान गणेश की आरती, जो उनकी बुद्धि, समृद्धि और शुभता का गुणगान करती है। इस आरती के पाठ से जीवन में विघ्नों का नाश होता है, सफलता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

अम्बे गौरी की आरती एक भक्तिपूर्ण स्तुति है, जो देवी दुर्गा के शक्ति स्वरूप को समर्पित है। यह आरती देवी गौरी (माँ पार्वती) की महिमा का गुणगान करती है और उनके भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।