
5 नवंबर 2026 को कौन-सी तिथि और नक्षत्र रहेगा, शुभ मुहूर्त कब है और राहु काल का समय क्या होगा? आज के पंचांग में इन सभी जानकारियों के साथ सूर्योदय और सूर्यास्त का विवरण भी पढ़ें।
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष एकादशी को राम एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और आत्मचिंतन के लिए विशेष माना जाता है। 5 नवंबर 2026, गुरुवार को एकादशी तिथि सुबह लगभग 10:35 बजे तक रहेगी, फिर द्वादशी शुरू होगी। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा के साथ पारण के नियमों और समय को भी पहले से समझ लें।
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5 नवंबर 2026, गुरुवार को कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सुबह 10:37 AM तक रहेगी। कार्तिक मास में पड़ने वाली यह एकादशी व्रत और भगवान विष्णु की उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आज सूर्योदय से पहले ही योग और नक्षत्र में बदलाव हो चुका होगा, जबकि सुबह 10:37 AM पर तिथि और करण दोनों समाप्त होंगे। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए तिथि के समय के साथ पूजा और पारण से जुड़े नियमों को समझना भी जरूरी है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष एकादशी (10:37 AM तक) |
वार | गुरुवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:09 |
सूर्यास्त | 17:16 |
चंद्रोदय | 02:20 |
चंद्रास्त | 14:43 |
नक्षत्र | उत्तर फाल्गुनी (3:56 AM तक) |
योग | इंद्र (6:27 AM तक) |
करण | बालव (10:37 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:20 AM से 12:04 PM |
राहुकाल | 1:06 PM से 2:29 PM |
गुलिक काल | 8:56 AM से 10:19 AM |
यमघण्टकाल | 6:09 AM से 7:32 AM |
दिशाशूल | दक्षिण |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | सिंह |
चंद्र निवास | पूर्व |
आज कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सुबह 10:37 AM तक रहेगी। एकादशी को भगवान विष्णु की उपासना और व्रत के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत, पूजा, मंत्र-जप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं। एकादशी व्रत रखने वालों को तिथि के साथ पारण का समय और विधि भी संबंधित पंचांग से जांचनी चाहिए।
आज गुरुवार भी है, जिसे बृहस्पति ग्रह और भगवान विष्णु की उपासना से जोड़ा जाता है। ऐसे में आज का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंदों की सहायता या दान-पुण्य जैसे कार्य भी अपनी श्रद्धा के अनुसार कर सकते हैं।
आज पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास और अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। हिंदू पंचांग में इन दोनों प्रणालियों के माध्यम से चंद्र मास की गणना की जाती है। इसी कारण एक ही दिन के लिए दोनों पद्धतियों में मास का नाम अलग हो सकता है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) है। पंचांग में इन संवतों का उल्लेख पारंपरिक वर्ष की पहचान और काल गणना के लिए किया जाता है।
आज शरद ऋतु है और दक्षिणायन चल रहा है। भारतीय पंचांग में ऋतु और अयन का उल्लेख समय के मौसमी तथा खगोलीय संदर्भ को समझने के लिए किया जाता है। शरद ऋतु वर्षा के बाद आने वाला मौसम है, जिसमें वातावरण और तापमान में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिलता है।
दक्षिणायन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी पारंपरिक अवधि को दर्शाता है। धार्मिक पंचांगों में इसे तिथि, मास और संवत के साथ दर्ज किया जाता है।
आज सूर्योदय 6:09 AM पर और सूर्यास्त 5:16 PM पर होगा। सुबह की पूजा, दिन की शुरुआत और शाम की धार्मिक गतिविधियों के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय 2:20 AM पर और चंद्रास्त 2:43 PM पर होगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा और चंद्र निवास पूर्व दिशा में बताया गया है। चंद्रमा के उदय-अस्त का समय और राशि उसकी दिनभर की स्थिति को समझने के लिए उपयोगी विवरण हैं।
आज उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र सुबह 3:56 AM तक रहेगा। इसके बाद हस्त नक्षत्र आरंभ होगा। चूंकि उत्तर फाल्गुनी का समय सूर्योदय से पहले समाप्त हो रहा है, इसलिए दिन के समय अगला नक्षत्र प्रभावी रहेगा।
इंद्र योग सुबह 6:27 AM तक रहेगा। इसके बाद योग में परिवर्तन होगा। सुबह के शुरुआती समय में योग बदलने के कारण दिन के अधिकांश हिस्से में अगला योग प्रभावी रहेगा। किसी विशेष धार्मिक कार्य के लिए योग के साथ तिथि और नक्षत्र की स्थिति भी देखनी चाहिए।
आज बालव करण सुबह 10:37 AM तक रहेगा। एकादशी तिथि भी इसी समय समाप्त होगी। यानी तिथि और करण का समय एक साथ पूरा हो रहा है। व्रत या धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े निर्णय लेते समय इस समय को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
आज का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक रहेगा। पंचांग के अनुसार इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जा सकता है। हालांकि, एकादशी व्रत या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए संबंधित विधि और तिथि के नियमों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 1:06 PM से 2:29 PM
गुलिक काल: 8:56 AM से 10:19 AM
यमघण्टकाल: 6:09 AM से 7:32 AM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए अपनी सुविधा और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा की यात्रा करते समय दिशाशूल का विचार किया जाता है। यदि आज इस दिशा में यात्रा करनी हो, तो अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार उचित उपायों पर विचार कर सकते हैं। यात्रा की सुरक्षा और व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।
राशिगत स्थिति के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। पंचांग में चंद्र निवास पूर्व दिशा बताया गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशियों को तिथि, नक्षत्र तथा योग के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझी जाती है।
आज की एकादशी में तिथि और बालव करण दोनों सुबह 10:37 AM पर समाप्त हो रहे हैं। हालांकि, व्रत का संकल्प, पूजा और पारण केवल इस समय के आधार पर तय नहीं करना चाहिए। एकादशी व्रत के नियमों में तिथि के साथ अगले दिन के द्वादशी समय और पारण मुहूर्त का भी महत्व होता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पूरी व्रत-विधि और पारण का समय जांचकर ही दिनचर्या तय करें।
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