
जानें इसे पढ़ने के अद्भुत लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में संतान सुरक्षा, मातृत्व में शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा पाने का सरल उपाय।
महाभारत में ईश्वर-भक्त प्रेम के दो प्रसंग प्रसिद्ध हैं—द्रौपदी के चीरहरण में श्रीकृष्ण की रक्षा और उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित को ब्रह्मास्त्र से बचाने के लिए कृष्ण का गर्भ में प्रवेश। इसी घटना से गर्भ रक्षा मंत्र का उल्लेख मिलता है, जिसे गर्भस्थ शिशु की रक्षा के लिए प्रभावशाली माना जाता है।
गर्भ रक्षा मंत्र वैदिक परंपरा और पुराणों में वर्णित एक पवित्र मंत्र है, जिसका उद्देश्य गर्भवती स्त्री और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा करना है। महाभारत की घटना के अनुसार, उत्तरा ने अपने अजन्मे पुत्र की रक्षा के लिए जिस मंत्र का जप कर भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की, उसे ही 'गर्भ रक्षा मंत्र' कहा गया।
गर्भ रक्षा मंत्र विशेष रूप से उन स्त्रियों के लिए लाभकारी माना गया है, जिन्हें बार-बार गर्भपात की समस्या से गुजरना पड़ता है या जिनका गर्भ किसी कारणवश टिक नहीं पाता। ऐसे समय में गर्भधारण के पहले दिन से ही इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
इस मंत्र का कोई कठोर नियम नहीं है। गर्भवती स्त्री इसे दिन के किसी भी समय, किसी भी स्थान पर श्रद्धा और आस्था से जप सकती है। सामान्यतः इसकी एक माला, यानी 108 बार का जाप करना श्रेष्ठ माना गया है। जाप से पहले संकल्प लेना चाहिए कि जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर उनके पुत्र परीक्षित की रक्षा की थी, वैसे ही वे आपके गर्भ की भी रक्षा करें।
1. गर्भ रक्षा कृष्ण मंत्र
“कृष्णाय वासुदेवाय, देवकी नंदनाय च।
नंद गोप कुमाराय गोविंदाय नमो नमः॥”
अर्थ: “हे वासुदेव! हे देवकीनंदन! हे नंदगोपाल के लाड़ले श्रीकृष्ण! आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। आप ही मेरे गर्भ की रक्षा करें।”
यह मंत्र गर्भस्थ शिशु को सुरक्षित रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण का आह्वान करता है। माना जाता है कि जो स्त्री सच्चे मन और विश्वास के साथ इस मंत्र का जाप करती है, उसके गर्भ पर आने वाले बड़े से बड़े संकट भी टल जाते हैं।
2. संतान प्राप्ति के लिए कृष्ण मंत्र
“ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत॥”
अर्थ: “हे देवकी के पुत्र, गोविंद, वासुदेव और जगत के स्वामी श्रीकृष्ण! मुझे संतान का आशीर्वाद दें। मैं आपकी शरण में आया हूँ।”
यह मंत्र उन दंपत्तियों के लिए लाभकारी माना गया है, जिन्हें संतान प्राप्ति में कठिनाई हो रही हो।
3. गर्भ रक्षा मूल मंत्र
“ॐ हरिं लज्जा जल्यां तः तह लैः ॐ हरिम स्वाहा”
अर्थ: सर्वशक्तिमान से प्रार्थना है कि वे कृपा करके संतान का आशीर्वाद दें और गर्भवती स्त्री व उसके शिशु की रक्षा करें।
4. गर्भरक्षम्बिगा स्तोत्र
श्री माधवी काननस्ये गर्भ
रक्षांबिके पाही भक्ताम् स्थुवन्तम्।
वापी तटे वाम भागे, वाम देवस्य देवी स्थिता त्वां,
मानया वारेन्या वादानया, पाही,
गर्भस्या जन्थुन तथा भक्ता लोकान ॥ १ ॥
श्री गर्भ रक्षा पुरे या दिव्या,
सौंन्दर्या युक्ता ,सुमंगलया गात्री,
धात्री, जनीत्री जनानाम, दिव्या,
रुपाम ध्यारर्दाम मनोगनाम भजे तं ॥ २ ॥
आषाढ मासे सुपुन्ये, शुक्र,
वारे सुगंन्धेना गंन्धेना लिप्ता,
दिव्याम्बरा कल्प वेशा वाजा,
पेयाधी याग्यस्या भक्तस्या सुद्रष्टा ॥ ३ ॥
ब्रम्होत्सव विप्र विद्ययाम वाद्य
घोषेण तुष्टाम रथेना सन्निविष्टाम्
सर्व अर्थ धात्रीं भजेअहम, देव
व्रुन्दैरा पीडायाम जगन मातरम त्वां ॥ ५ ॥
येतथ कृतम स्तोत्र रत्नम, दीक्षीथ
अनन्त रामेन देव्या तुष्टाच्यै
नित्यम् पाठयस्तु भक्तया,पुत्र-पौत्रादि भाग्यं
भवे तस्या नित्यं ॥ ६ ॥
इति श्री ब्रह्म श्री अनंत रामा दीक्षिता विरचितम् गर्भ रक्षाअम्बिका स्तोत्रं संपूर्णम्
गर्भ की सुरक्षा
गर्भ रक्षा मंत्र का प्रमुख लाभ यह है कि यह गर्भस्थ शिशु को हर प्रकार की बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रखने में सहायक माना जाता है। नियमित जप से एक दिव्य सुरक्षा कवच का निर्माण होता है, जो गर्भ की स्थिरता और शिशु की सुरक्षा को मजबूत करता है। यह सुरक्षा माँ और शिशु दोनों के लिए लाभकारी होती है।
बार-बार गर्भपात से मुक्ति
जिन स्त्रियों को बार-बार गर्भपात का सामना करना पड़ता है, उनके लिए यह मंत्र अत्यंत प्रभावी है। नियमित जप से गर्भ धारण स्थिर होता है और गर्भपात की संभावना कम हो जाती है।
मानसिक शांति और आत्मविश्वास
गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों को चिंता, डर और बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भ रक्षा मंत्र का जप करने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। जब माँ का मन शांत और सकारात्मक रहता है तो उसका असर सीधे शिशु पर भी पड़ता है। इस मंत्र के जाप से मां का आत्मविश्वास बढ़ता है और पूरी गर्भावस्था आसान लगने लगती है।
प्रसव में सुरक्षा
प्रसव का समय हर स्त्री के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। गर्भ रक्षा मंत्र का लाभ यह है कि यह माँ के शरीर और मन को संतुलित रखता है। इससे प्रसव के समय महिला को अधिक धैर्य और ऊर्जा मिलती है। माना जाता है कि मंत्र की शक्ति से प्रसव प्रक्रिया आसान और सुरक्षित हो जाती है।
शिशु का संपूर्ण विकास
गर्भ रक्षा मंत्र का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शिशु के विकास में भी मदद करता है। जब माँ का मन शांत और स्थिर रहता है तो शिशु भी उसी ऊर्जा को ग्रहण करता है। इससे बच्चे का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास संतुलित तरीके से होता है।
भगवान की कृपा
गर्भ रक्षा मंत्र को नियमित रूप से जपने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यह केवल गर्भस्थ शिशु की रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि उसके संसार में आने बाद संपूर्ण जीवन के लिए शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इस मंत्र के जाप से माँ के मन में भी सकारात्मकता बनी रहती है और शिशु का जीवन सुरक्षित और मंगलमय होने की संभावना बढ़ती है।
यदि आप गर्भवती हैं या संतान प्राप्ति की इच्छा रखती हैं, तो पूर्ण आस्था से ‘गर्भ रक्षा मंत्र’ का नियमित जप करना आपके और आपकी संतान दोनों के लिए कल्याणकारी होगा। जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा की थी, वैसे ही वे आपके गर्भस्थ शिशु को भी हर संकट से बचाएँगे।
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