6 सितंबर 2025 को क्या है?
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6 सितंबर 2025 को क्या है?

6 सितंबर 2025 को क्या है? जानिए इस दिन का पंचांग, अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन और अनंत पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

आज के दिन के बारे में

6 सितंबर 2025 का दिन आस्था और परंपराओं से भरा खास दिन होगा। इस दिन कौन-कौन से व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, इनके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं और कौन से शुभ मुहूर्त आपके कार्यों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे, यह जानना दिलचस्प होगा। इस लेख में जानिए 6 सितंबर 2025 से जुड़ी हर खास जानकारी, जो इस दिन को विशेष बनाती है।

6 सितंबर 2025: क्या है खास?: जानें इस दिन से जुड़ी खास बातें

क्या आप जानना चाहते हैं कि 6 सितंबर 2025 को कौन-सा पर्व है और यह दिन क्यों खास है? 6 सितंबर 2025 शनिवार का दिन है और यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। इस दिन दो प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे: गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी। ये पर्व भक्तों और परिवारों के लिए खुशहाली, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक हैं।

पंचांग विवरण

  • तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी

  • वार: शनिवार (भगवान विष्णु और शनिदेव को समर्पित)

  • नक्षत्र: धनिष्ठा

  • योग: धृति

  • करण: वणिज

  • राहुकाल: 2:30 PM – 4:00 PM

  • अभिजीत मुहूर्त: 12:00 PM – 12:45 PM

  • दिशाशूल: उत्तर दिशा

  • चंद्रमा की स्थिति: धनु राशि

  • सूर्योदय: 5:40 AM

  • सूर्यास्त: 6:15 PM

  • चंद्र उदय: 2:30 PM

  • चंद्रास्त: 12:50 AM

अनंत चतुर्दशी का महत्व

अनंत चतुर्दशी विशेष रूप से भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा का पर्व है।

महत्त्व

  • श्रद्धालु इस दिन अनंत सूत्र (लाल या पीले धागे) को बांधते हैं।

  • यह पूरे वर्ष के लिए सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना का अवसर है।

  • भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में अखंड सौभाग्य और शांति आती है।

पूजा विधि

अनंत चतुर्दशी

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  • भगवान विष्णु की पूजा करें।

  • अनंत सूत्र अपने दाएं हाथ में बांधें।

  • मंत्र “ॐ अनंताय नमः” का जाप करें।

निष्कर्ष

6 सितंबर 2025 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। गणेश विसर्जन से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि आती है, जबकि अनंत चतुर्दशी से भगवान विष्णु की कृपा और अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। इस दिन पूजा और विसर्जन विधिपूर्वक करने से परिवार में शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है। दोनों पर्व श्रद्धा, भक्ति और पारिवारिक मिलन का प्रतीक हैं, इसलिए इसे पूरी निष्ठा और प्रेम से मनाना चाहिए।

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Published by Sri Mandir·September 8, 2025

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