4 अगस्त 2025 को क्या है?
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4 अगस्त 2025 को क्या है?

4 अगस्त 2025 को क्या है? जानें इस दिन का पंचांग, एकादशी तिथि का महत्व, पूजा विधि, राहुकाल और शुभ मुहूर्त।

आज के दिन के बारे में

4 अगस्त 2025 का दिन आस्था और पवित्रता से भरपूर रहेगा। इस दिन कौन से व्रत और पर्व मनाए जाएंगे, इनके पीछे की पौराणिक मान्यताएं क्या हैं और कौन से शुभ मुहूर्त आपके लिए खास रहेंगे, यह जानना दिलचस्प होगा। इस लेख में जानिए 4 अगस्त 2025 से जुड़ी पूरी जानकारी, जो इस दिन को विशेष बनाती है।

4 अगस्त 2025 को क्या है?

4 अगस्त 2025 को सोमवार का दिन है और यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन श्रावण पुरुषोत्तम एकादशी या श्रावण एकादशी का व्रत रखा जाता है जो भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

पंचांग विवरण

  • तिथि: एकादशी

  • प्रारंभ: 4 अगस्त को सुबह 11:42 बजे

  • समाप्ति: 5 अगस्त को दोपहर 1:12 बजे तक

  • नक्षत्र: ज्येष्ठा (सुबह 9:12 बजे तक), फिर मूल

  • योग: इंद्र योग (सुबह 11:42 तक), फिर वैधृति

  • करण: वणिजा (11:42 AM तक), फिर विष्टि

  • वार: सोमवार

एकादशी तिथि का महत्व

श्रावण शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु के व्रत के रूप में मनाया जाता है। इसे पुरुषोत्तम एकादशी भी कहा जाता है। यह तिथि मोक्ष प्राप्ति, पापों के क्षय और मानसिक शांति के लिए विशेष मानी जाती है। जो भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और सच्चे मन से विष्णु भगवान का पूजन करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

पूजा और व्रत विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

  • तुलसी दल, चंदन, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें

  • विष्णु सहस्रनाम, हरि स्तोत्र या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें

  • घी का दीपक जलाकर विष्णु आरती करें

  • दिन भर व्रत रखें, केवल फलाहार करें

  • संध्या काल में पूजा कर प्रसाद ग्रहण करें

  • यथाशक्ति दान-पुण्य करें

राहुकाल और शुभ मुहूर्त

  • राहुकाल: सुबह 7:07 बजे से 8:46 बजे तक

  • इस अवधि में शुभ कार्यों से बचना चाहिए

  • शुभ समय: सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे और फिर 3 बजे से 5 बजे तक

निष्कर्ष

4 अगस्त 2025 का दिन आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य लाभ और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम अवसर है। श्रावण मास की एकादशी तिथि का महत्व और सोमवार का संयोग इस दिन को और भी पवित्र बना देता है। व्रत, उपवास, पूजा और ध्यान से मन को शुद्धि मिलती है और जीवन में शुभता आती है।

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Published by Sri Mandir·August 13, 2025

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