
जानिए इस दिन का पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ-अशुभ मुहूर्त, ग्रह-नक्षत्र और धार्मिक दृष्टि से इस तिथि का महत्व।
23 फरवरी 2026 पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। यह दिन व्रत, संयम और आध्यात्मिक शुद्धि से जुड़ा माना जाता है। इस लेख में जानिए 23 फरवरी 2026 को क्या है और इस तिथि का महत्व।
क्या आप जानना चाहते हैं कि 23 फरवरी 2026 को कौन-कौन से व्रत और त्योहार हैं और यह दिन धार्मिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है? 23 फरवरी 2026, सोमवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। यह दिन विशेष रूप से भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) की उपासना से जुड़ा माना जाता है। शुक्ल षष्ठी तिथि साहस, शक्ति और विजय का प्रतीक मानी जाती है तथा इस दिन की गई पूजा से आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
1. शुक्ल षष्ठी (कार्तिकेय उपासना)
शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से रोग, भय और शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह तिथि विशेष रूप से आत्मविश्वास, पराक्रम और निर्णय शक्ति को मजबूत करती है।
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान कार्तिकेय या गणेश जी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
दीप, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
“ॐ स्कन्दाय नमः” मंत्र का जप करें।
दिन भर संयम और सात्त्विक आचरण रखें।
23 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। फाल्गुन मास की शुक्ल षष्ठी तिथि साहस, शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली मानी जाती है। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और मानसिक दृढ़ता प्रदान करती है।
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जानें इस दिन का पंचांग, व्रत-त्योहार और शुभ मुहूर्त। इस दिन के धार्मिक महत्व, तिथि और ग्रह-नक्षत्र की पूरी जानकारी विस्तार से जानें।

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