
जानिए इस दिन का पंचांग, तिथि, वार, नक्षत्र, व्रत-त्योहार और शुभ-अशुभ मुहूर्त से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
19 जनवरी 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह दिन धार्मिक और शुभ अवसरों से जुड़ा हुआ है। इस लेख में जानिए इस दिन के व्रत, पर्व और शुभ-अशुभ समय की पूरी जानकारी, जो इसे खास बनाती है।
क्या आप जानना चाहते हैं कि 19 जनवरी 2026 को कौन-सा व्रत, त्योहार और शुभ योग बन रहे हैं और यह दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है? 19 जनवरी 2026, सोमवार को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन से गुप्त नवरात्रि का शुभ आरंभ होता है, जो विशेष रूप से शक्ति साधना, मंत्र-जप और तांत्रिक उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। माघ मास और उत्तरायण काल में आने वाला यह दिन आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है।
तिथि: शुक्ल पक्ष प्रतिपदा – रात 2:15 AM तक
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा – सुबह 11:53 AM तक
योग: वज्र – रात 8:46 PM तक
करण: किंस्तुघ्न – दोपहर 1:48 PM तक
वार: सोमवार
मास (अमांत): माघ
मास (पूर्णिमांत): माघ
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्ववासु)
सूर्य राशि: मकर
चंद्र राशि: मकर
ऋतु: शिशिर
अयन: उत्तरायण
दिशाशूल: पूर्व
चंद्र निवास: दक्षिण
गुप्त नवरात्रि प्रारंभ
19 जनवरी 2026 से माघ मास की गुप्त नवरात्रि आरंभ होती है।
यह नवरात्रि साधकों और भक्तों के लिए विशेष मानी जाती है।
इस दौरान मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की उपासना की जाती है।
मंत्र सिद्धि, जप, तप और ध्यान के लिए यह समय अत्यंत फलदायी माना जाता है।
शुभ मुहूर्त: 11:49 AM से 12:31 PM
राहुकाल: 8:07 AM से 9:28 AM
गुलिक काल: 1:30 PM से 2:51 PM
यमघंट काल: 10:49 AM से 12:10 PM
सूर्योदय: 6:46 AM
सूर्यास्त: 5:33 PM
चंद्रोदय: 7:10 AM
चंद्रास्त: 6:03 PM
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के पूजा स्थल में मां दुर्गा या शक्ति स्वरूप की स्थापना करें।
गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना कर सकते हैं।
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जप करें।
सोमवार होने से भगवान शिव का जलाभिषेक भी शुभ माना जाता है।
सात्विक आहार लें और संयम का पालन करें।
19 जनवरी 2026 का दिन गुप्त नवरात्रि के शुभ आरंभ के कारण धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। माघ मास, शुक्ल प्रतिपदा और सोमवार का संयोग इस दिन को शक्ति साधना, पूजा और आत्मिक शुद्धि के लिए विशेष बनाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना से साधक को मनोकामना पूर्ति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
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