
जानिए इस दिन का पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ-अशुभ मुहूर्त, ग्रह-नक्षत्र और धार्मिक दृष्टि से इस तिथि का महत्व।
10 फरवरी 2026 माघ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। इस दिन कुछ विशेष धार्मिक अनुष्ठान और व्रत किए जाते हैं, जिन्हें शुभ माना जाता है। इस लेख में जानिए 10 फरवरी 2026 से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ और परंपराएँ।
क्या आप जानना चाहते हैं कि 10 फरवरी 2026 को कौन-कौन से व्रत और त्योहार हैं और यह दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है? 10 फरवरी 2026, मंगलवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। यह दिन विशेष रूप से कालाष्टमी व्रत और भगवान काल भैरव की पूजा के लिए जाना जाता है। अष्टमी तिथि भगवान शिव की उपासना के लिए शुभ मानी जाती है और इस दिन किया गया व्रत भय, रोग और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।
1. कालाष्टमी व्रत
कालाष्टमी भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है। इस दिन व्रत, दीपदान और भैरव बाबा की पूजा करने से अकाल मृत्यु, भय और शत्रु बाधा से रक्षा होती है। यह व्रत विशेष रूप से तंत्र बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए फलदायी माना जाता है।
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करें।
काल भैरव को सरसों का तेल, काले तिल और दीप अर्पित करें।
अष्टमी व्रत रखें और सात्विक भोजन करें।
जरूरतमंदों को भोजन या काले वस्त्र का दान करें।
10 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व रखता है। फाल्गुन कृष्ण अष्टमी और कालाष्टमी व्रत इस दिन को अत्यंत फलदायी बनाते हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से जीवन में सुरक्षा, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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जानें इस दिन का पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्र की स्थिति। इस दिन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी हर जरूरी जानकारी विस्तार से पढ़ें।

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