
महा संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष पर्व है, जिसे माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त गणेश जी की आराधना करते हैं और रात्रि में चंद्रदर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं।
महा संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष व्रत है, जो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन उपवास रखकर चंद्रदर्शन के बाद पूजा होती है, जिससे विघ्न दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
महा सकंद हर चतुर्थी या हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। आपको बता दें कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में 'संकष्टी चतुर्थी' को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी कहा जाता है।
महा सकंद हर चतुर्थी यानी कि संकट हरा चतुर्थी व्रत 12 अगस्त, मंगलवार को तमिल के अवनि मासम, यानि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर किया जायेगा।
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय रात 08:59 बजे होगा। आपको बता दें कि चतुर्थी तिथि के दौरान कोई चन्द्रोदय नहीं है।
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 04:23 ए एम से 05:06 ए एम तक |
प्रातः सन्ध्या | 04:44 ए एम से 05:49 ए एम तक |
अभिजित मुहूर्त | 11:59 ए एम से 12:52 पी एम तक |
विजय मुहूर्त | 02:38 पी एम से 03:31 पी एम तक |
गोधूलि मुहूर्त | 07:03 पी एम से 07:25 पी एम तक |
सायाह्न सन्ध्या | 07:03 पी एम से 08:08 पी एम तक |
सर्वार्थ सिद्धि योग | 11:52 ए एम से 05:49 ए एम, 13 अगस्त तक |
निशिता मुहूर्त | 12:05 ए एम, अगस्त 13 से 12:48 ए एम, 13 अगस्त तक |
संकटहरा चतुर्थी व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग 13 अगस्त, बुधवार को सुबह 11:52 ए एम से प्रातः 05:49 ए एम तक रहेगा।
महा सकंद हर चतुर्थी, जिसे संकटहर या संकष्टि चतुर्थी भी कहा जाता है, भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। यह हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, लेकिन जब यह तिथि विशेष नक्षत्र या पर्व के साथ आती है, तब इसे 'महा' चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि में चंद्रदर्शन कर व्रत का पारण करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पर्व दक्षिण भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि अपने नाम के अनुरूप संकष्टी चतुर्थी का व्रत सभी संकटों से मुक्ति दिलाने वाला होता है। कहते हैं कि ये व्रत यदि पूरे विधि विधान से किया जाए, तो घर से नकारात्मकता का प्रभाव दूर होता है, और सुख-शांति बनी रहती है। इसके अलावा संकष्टी चतुर्थी का व्रत निर्धनता को भी समाप्त करने वाला होता है। मान्यता ये भी है कि इस व्रत के प्रभाव से जातक की शीघ्र विवाह, धन प्राप्ति और उत्तम संतान आदि मनोकामनायें पूर्ण होती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार संकटहरा चतुर्थी व्रत जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं से छुटकारा दिलाता है।
ऐसा कहा जाता कि यदि संकटहरा चतुर्थी व्रत मंगलवार के दिन पड़े, तो इस दिन किया गया व्रत उपवास अत्यधिक पुण्यदायी होता है।
यह पर्व विशेष रूप से दक्षिण भारत, जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक आदि राज्यों में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। साथ ही, महाराष्ट्र और उत्तर भारत में भी संकष्टि चतुर्थी व्रत के रूप में इसका प्रचलन है।
यह पर्व भक्तों के लिए आस्था, विश्वास और संकटों से मुक्ति का प्रतीक है।
इस दिन भगवान गणेश की विशेष रूप से पूजा की जाती है। संकटमोचक रूप में उनकी आराधना कर भक्त जीवन के कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। दक्षिण भारत में इसे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) के साथ भी जोड़ा जाता है, इसीलिए इसे “महा सकंद हर चतुर्थी” कहा जाता है।
भगवान गणेश के भक्त संकटहरा चतुर्थी के दिन सूर्योदय से चन्द्रोदय तक उपवास रखते हैं, और पूरे दिन व्रत रखकर भगवान गणेश का ध्यान करते हैं। इसके बाद शाम को चंद्रोदय के समय वे किसी गणेश मंदिर में जाते हैं और पूजा में भाग लेते हैं, या फिर घर पर ही पूजा करते हैं। पारंपरिक पूजा में भगवान गणेश की पूजा, उनके नाम का जाप करना, फूलों के साथ-साथ मोदक जैसे पारंपरिक प्रसाद चढ़ाना और उसके बाद आरती करने जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
तो भक्तों, यह थी संकटहरा चतुर्थी व्रत के शुभ मुहूर्त से जुड़ी जानकारी। हमारी कामना है कि इस पावन पर्व पर आपका व्रत व आराधना सफल हो, और विघ्नहर्ता भगवान गणेश आपके जीवन में आने वाले सभी विघ्न दूर करें। व्रत- त्यौहारों की जानकारी पाने व देश के प्रमुख धर्म स्थलों पर समय-समय पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए जुड़े रहिए 'श्री मंदिर' के इस धार्मिक मंच पर।
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