
गंगा दशहरा 2025 पर मां गंगा की विशेष पूजा करें। जानें पूजा विधि, तिथि, और व्रत का महत्व शुभ फल पाने के लिए यह जानकारी जरूर पढ़ें।
गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। गंगा स्नान, दान-पुण्य और जप से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं इसके बारे में...
हिंदू धर्म में गंगा दशहरा एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हर वर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां गंगा की उपासना करने से एवं गंगा स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं, और विशेष फल मिलता है।
साल 2025 में गंगा दशहरा 05 जून, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा।
| मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | 03:44 ए एम से 04:26 ए एम |
| प्रातः सन्ध्या | 04:05 ए एम से 05:07 ए एम |
| अभिजित मुहूर्त | 11:29 ए एम से 12:24 पी एम |
| विजय मुहूर्त | 02:13 पी एम से 03:08 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:45 पी एम से 07:06 पी एम |
| सायाह्न सन्ध्या | 06:46 पी एम से 07:48 पी एम |
| अमृत काल | 11:49 पी एम से 01:37 ए एम, जून 06 |
| निशिता मुहूर्त | 11:36 पी एम से 12:17 ए एम, जून 06 |
| रवि योग | पूरे दिन |
भक्तों, ये तो थी गंगा दशहरा के शुभ मुहूर्त से जुड़ी जानकारी। हमारी कामना है कि इस दिन आपका व्रत एवं उपासना सफल हो, और मां गंगा आप पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें।
भक्तों नमस्कार, श्री मंदिर पर आपका स्वागत है। हिंदू संस्कृति में कभी भी गंगा स्नान करना और मां गंगा की उपासना करना अक्षम्य पापों को नष्ट करने वाला होता है, परंतु गंगा दशहरा का पर्व गंगा जी की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
चलिए जानते हैं,
गंगा दशहरा पर्व पर सच्चे मन से गंगा मैया की आराधना करने वाले जातक दस प्रकार के महा पापों से मुक्त हो जाते हैं। इसीलिए आज हम आपको गंगा मैया की पूजा करने की सरल विधि बता रहे हैं। गंगा दशहरा के दिन यदि आप इस विधि से मां गंगा की पूजा करेंगे तो आपको उनकी संपूर्ण कृपा प्राप्त होगी।
इस लेख में जानिए,
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