गुड़ी पड़वा कब है 2026
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गुड़ी पड़वा कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि गुड़ी पड़वा 2026 में कब मनाया जाएगा और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए गुड़ी पड़वा की सही तिथि, मराठी नववर्ष के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व की परंपराएँ और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

गुड़ी पड़वा के बारे में

Gudi Padwa हिंदू नववर्ष का प्रमुख पर्व है, जो मुख्यतः महाराष्ट्र में मनाया जाता है। यह चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को आता है और नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों के बाहर गुड़ी (सजाया हुआ ध्वज) स्थापित की जाती है, जो विजय और समृद्धि का प्रतीक है। लोग घर सजाते हैं, विशेष पकवान बनाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

गुड़ी पड़वा 2026 कब है?

कब है मराठी नववर्ष? जानें तिथि, सूर्योदय और शुभ मुहूर्त

भारतीय संस्कृति में नववर्ष का स्वागत अलग-अलग परंपराओं के साथ किया जाता है। महाराष्ट्र में मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा इसी नवआरंभ का प्रतीक पर्व है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मराठी नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है। यही दिन विक्रम संवत और मराठी शक संवत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2026 में इसी तिथि से मराठी शक संवत 1948 का शुभारंभ होगा।

गुड़ी पड़वा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि नई आशाओं, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संकल्पों का दिन है। इस दिन घरों के मुख्य द्वार या छत पर गुड़ी स्थापित की जाती है, जो विजय, समृद्धि और मंगल का प्रतीक मानी जाती है।

चलिए जानते हैं इस साल गुड़ी पड़वा की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में

  • मराठी शक सम्वत 1948 प्रारम्भ
  • हर वर्ष की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा मनाया जाता है।
  • वर्ष 2026 में गुड़ी पड़वा 19 मार्च 2026, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा।
  • इस दिन सूर्योदय प्रातः काल 06 बजकर 03 मिनट होगा।
  • गुड़ी पड़वा के दिन सूर्यास्त शाम 06 बजकर 08 मिनट पर होगा।
  • प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 19 मार्च 2026, बृहस्पतिवार को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर होगा।
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त होगी 20 मार्च 2026, शुक्रवार को शाम 04 बजकर 52 मिनट पर।

सूर्योदय और सूर्यास्त

  • सूर्योदय: 19 मार्च 2026 को प्रातः 06 बजकर 03 मिनट
  • सूर्यास्त: 19 मार्च 2026 को सायं 06 बजकर 08 मिनट
  • उदयातिथि के अनुसार 19 मार्च को ही गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाएगा।

इस दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त

यदि आप गुड़ी स्थापना, पूजा या नया कार्य प्रारंभ करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए शुभ समय विशेष फलदायी रहेंगे -

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04 बजकर 28 मिनट से 05 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
  • प्रातः सन्ध्या: 04 बजकर 52 मिनट से 06 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 06 बजकर 06 मिनट से 06 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
  • सायाह्न सन्ध्या: सायं 06 बजकर 08 मिनट से 07 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
  • अमृत काल: रात्रि 11 बजकर 32 मिनट से 20 मार्च की प्रातः 01 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।
  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 42 मिनट से 20 मार्च की रात्रि 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।

विशेष योग

  • सर्वार्थ सिद्धि योग: 20 मार्च को प्रातः 04 बजकर 05 मिनट से 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।

यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवधि में किए गए मांगलिक कार्यों में सफलता और सिद्धि प्राप्त होने की मान्यता है।

गुड़ी पड़वा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

गुड़ी पड़वा को नवसंवत्सर का प्रारंभ माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि की रचना आरंभ हुई थी। महाराष्ट्र में लोग अपने घरों के बाहर रंगोली बनाते हैं, नए वस्त्र धारण करते हैं और पारंपरिक व्यंजन तैयार करते हैं। गुड़ी एक लंबी बाँस की डंडी पर रेशमी वस्त्र, नीम की पत्तियाँ, आम के पत्ते, फूलों की माला और ऊपर चांदी या तांबे का कलश सजाकर बनाई जाती है। इसे घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर स्थापित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह गुड़ी घर में सुख-समृद्धि लाती है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है। इस दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, इसलिए देवी पूजा का विशेष महत्व रहता है। कई लोग इस अवसर पर नया व्यवसाय, वाहन या संपत्ति खरीदना भी शुभ मानते हैं।

कैसे मनाएं गुड़ी पड़वा?

  • प्रातः स्नान के बाद घर की साफ-सफाई करें।
  • मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और आम के पत्तों की तोरण सजाएं।
  • शुभ मुहूर्त में गुड़ी की स्थापना करें।
  • भगवान विष्णु और मां दुर्गा की पूजा करें।
  • परिवार के साथ पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लें।
  • वर्ष 2026 में गुड़ी पड़वा 19 मार्च, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा, जो मराठी शक संवत 1948 का प्रारंभिक दिन है। प्रतिपदा तिथि प्रातः 06 बजकर 52 मिनट से आरंभ होकर अगले दिन सायं 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन के ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सर्वार्थ सिद्धि योग तक अनेक शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इसे और भी मंगलकारी बनाते हैं।
  • इस दिन घर के मुख्य द्वार या घर की छत पर गुड़ी लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह माना जाता है कि गुड़ी हम सभी के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करती है, और घर में सुख-सौभाग्य एवं समृद्धि का वास होता है।

तो भक्तों, हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नववर्ष का यह पावन अवसर आपके जीवन में नई ऊर्जा, समृद्धि और सफलता लेकर आए - इसी मंगलकामना के साथ ऐसी ही धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए।

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Published by Sri Mandir·March 12, 2026

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