नवरात्री विशेष नवदुर्गा पूजा, यज्ञ एवं आरती

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श्री दुर्गा कुंड मंदिर, काशी
pooja date
Warning Infoइस पूजा की बुकिंग बंद हो गई है
srimandir devotees
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अब तक2,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं

नवरात्री विशेष नवदुर्गा पूजा, यज्ञ एवं आरती

जीवन से सभी प्रकार की व्याधियां और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, घर-परिवार एवं व्यवसाय में धन और धान्य की कमी दूर करने तथा जीवन के सभी क्षेत्रों में विपुल यश, विजय, कीर्ति, लाभ आदि की प्राप्ति के लिए शारदीय नवरात्री के शुभ व्रत-पर्व प्रथम दिन, दिनांक 15 अक्टूबर 2023, रविवार के दिन श्री दुर्गा कुंड मंदिर, काशी के आचार्यों द्वारा आयोजित नवरात्री विशेष नवदुर्गा पूजा, यज्ञ एवं आरती में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लें और अपने जीवन को नकारात्मक शक्तियों से मुक्त करें।

पूजा लाभ

puja benefits
वास्तु से उत्पन्न दोषों का नाश
इस महापूजा के कारण निवास स्थान एवं व्यावसायिक जगह में वास्तु से उत्पन्न दोष एवं अशुभत्व का नाश होता है।
puja benefits
व्यावसायिक एवं पारिवारिक जीवन में उन्नति
घर- परिवार एवं व्यवसाय में धन-धान्य की कमी दूर होकर पैसों की बढ़ोतरी के साथ उन्नति की प्राप्ति होती है।
puja benefits
सभी क्षेत्रों में यश, विजय, लाभ की प्राप्ति
माँ दुर्गा एवं क्षेत्रपाल की कृपा से जीवन के हर एक क्षेत्र में यश, विजय, कीर्ति एवं लाभ की प्राप्ति होती है।
puja benefits
व्याधियां एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश
इस महापूजा के कारण मातारानी एवं क्षेत्रपाल की कृपा दृष्टि से जीवन से सभी प्रकार की विपत्तियां एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

पूजा प्रक्रिया

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श्री दुर्गा कुंड मंदिर,काशी

श्री दुर्गा कुंड मंदिर,काशी
भगवान शिव की नगरी काशी में स्थापित श्री दुर्गा कुंड मंदिर, जहाँ माँ आदिशक्ति दुर्गा अदृश्य रूप में विराजमान है। मान्यता है की मातारानी का यह मंदिर आदिकालीन है तथा यह सिद्ध मंदिर काशी के प्राचीनतम मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर का उल्लेख स्कन्द पुराण के काशी खंड में भी पाया जाता है। इस मंदिर में माँ दुर्गा यंत्र के रूप में विराजमान है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 17वीं शताब्दी में रानी भवानी ने करवाया था। इस मंदिर के एक तरफ कुंड है, जिसे दुर्गा कुंड कहा जाता है।

मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है की शुंभ-निशुंभ का वध करने के बाद मातारानी ने यहाँ विश्राम किया था। भक्तों में यह आस्था है की माँ दुर्गा यहाँ अपने चौथे स्वरुप कुष्मांडा के रूप में स्थित है। इसी लिए शारदीय नवरात्रि में इस मंदिर में देश के हर एक कोने से असंख्य श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा-अर्चना करने आते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने का आशीष प्राप्त करते हैं।

कैसा रहा श्री मंदिर पूजा सेवा का अनुभव?

क्या कहते हैं श्रद्धालु?
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