जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ
जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ
जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ
जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ
जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ
जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ
जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ
पूर्णिमा काशी विशेष

काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ

जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए
temple venue
श्री काल भैरव मंदिर, काशी, उत्तर प्रदेश
pooja date
22 जून, शनिवार, ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा
Warning Infoइस पूजा की बुकिंग बंद हो गई है
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
अब तक2,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं

जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा के लिए पूर्णिमा काशी विशेष काल भैरव स्तोत्र पाठ और आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ

मंदिरों का शहर कहा जाने वाला काशी, अपने आप में धार्मिक महत्व रखता है। यहां मौजूद प्राचीन 'काल भैरव मंदिर' को लेकर मान्यता है कि, यहां भगवान शिव अपने उग्र रूप काल भैरव के रूप में विराजमान हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा जी में सर्वश्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। दोनों एक दूसरे को अपना पुत्र बता रहे थे। तब एक अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ और कहा कि जो इसका ओर-छोर जान लेगा, वही सर्वश्रेष्ठ होगा। ब्रह्मा जी हंस रूप में स्तंभ के ऊपरी भाग का पता लगाने गए, जबकि विष्णु जी वराह रूप में निचले भाग का। विष्णु जी ने सत्य बताया कि उन्हें स्तंभ का अंत नहीं मिला, लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ कहा कि उन्होंने अंत का पता लगा लिया। तब अग्नि स्तंभ ने पुरुष रूप लिया और वो भगवान शिव के रूप में प्रकट हुए। शिवजी ने ब्रह्मा जी को असत्य बोलने पर कभी न पूजे जाने का श्राप दे दिया। क्रोधित ब्रह्मा जी ने शिवजी को अपशब्द कहे, जिसके कारण शिवजी ने अपने अंश से विकराल भैरव को उत्पन्न किया।

भैरव ने ब्रह्मा जी के पांचवे मुख को काट दिया, जो उनके हाथ से नहीं छूटा। यह ब्रह्महत्या थी, जिससे मुक्ति के लिए भैरव को सृष्टि का विचरण करना पड़ा। अंततः काशी में भैरव के हाथ से ब्रह्मा जी का कपाल छूट गया और वे ब्रह्महत्या से मुक्त हो गए। शिवजी ने कहा कि भैरव ने कालचक्र पर विजय प्राप्त की है, इसलिए उनका नाम 'काल भैरव' होगा और वे काशी के कोतवाल रहेंगे, तभी से वो काशी की रक्षा करते हैं और भक्तों को बुरी शक्तियों से बचाते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा का शुभ दिन किसी भी पूजा के लिए अत्यंत फलदायी साबित होता है इस शुभ दिन पर काशी में काल भैरव की विशेष पूजा से भक्त निर्भयता और बाधा मुक्त जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पूजा लाभ

puja benefits
नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा
मान्यता है कि काल भैरव स्तोत्र पाठ के साथ आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। भगवान भैरव की पूजा नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा के लिए एक ढाल के रूप में काम करती है जो दिमाग से नकारात्मक विचारों और बुरी ऊर्जा को खत्म करने में मदद करता है। इसके साथ यज्ञ करने से भगवान अपने भक्तों को नकारात्मक उर्जाओं से बचाकर रखते हैं।
puja benefits
बुरी शक्तियों से रक्षा
पूर्णिमा के शुभ दिन पर भगवान भैरव की पूजा अत्यंत प्रभावशाली हो जाती है। काल भैरव स्तोत्र पाठ करने से जातक को गुप्त विरोधियों, राक्षसों, बुरी ताकतों, काला जादू और बुरी ऊर्जाओं से सुरक्षा प्राप्त होता है। पूर्णिमा पर काल भैरव स्तोत्र पाठ के साथ आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ करने से भगवान भैरव जल्दी प्रसन्न होते हैं और आपको अपने इच्छित उद्देश्य में शीघ्र सफलता का आशीष भी देते हैं।
puja benefits
बाधाओं से मुक्ति
कई बार दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के बाद भी, कुछ अनचाही बाधाओं के कारण कार्य में सफलता नहीं मिलती है। इन बाधाओं एवं कठिनाईयों को दूर करने के लिए पूर्णिमा पर किया गया काल भैरव स्तोत्र पाठ अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस पाठ के साथ आदिकाल भैरव तंत्र युक्त यज्ञ करने से भगवान भैरव की कृपा से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पूजा प्रक्रिया

Number-0

पूजा चयन करें

4 विभिन्न पूजा पैकेज ऑप्शन से चयन करें।
Number-1

अर्पण जोड़ें

अपनी पूजा के साथ गौ सेवा, वस्त्र दान, दीप दान भी करें। पूजा के लिए भुगतान करें।
Number-2

संकल्प विवरण दर्ज करें

भुगतान के बाद, अपना नाम और गोत्र दर्ज करें।
Number-3

पूजा दिन

अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक प्रक्रिया के अनुसार पूजा होगी। आपको अपने WhatsApp नंबर पर अपडेट्स मिलेंगे।
Number-4

पूजा वीडियो एबं तीर्थ प्रसाद डिलीवरी

अपने पंजीकृत WhatsApp नंबर पर पूजा के 4-5 दिनों में पूजा वीडियो एबं आपके दिए गए पते पर 8-10 दिनों बाद तीर्थ प्रसाद प्राप्त करें ।

श्री काल भैरव मंदिर, काशी, उत्तर प्रदेश

श्री काल भैरव मंदिर, काशी, उत्तर प्रदेश
महादेव की नगरी कही जानेवाली काशी में भैरव बाबा की मर्जी के बिना कुछ भी नहीं होता है और पूरी नगरी की देखरेख उन्हीं के हाथों में है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्माजी और विष्णुजी के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ी की इनमें सबसे महान कौन है। इस चर्चा के बीच शिवजी का जिक्र आने पर ब्रह्माजी के पांचवें मुख ने शिवजी की आलोचना की, जिससे शिवजी को गुस्सा आया। उसी क्षण भगवान शिव के क्रोध से काल भैरव का जन्म हुआ।

काल भैरव ने शिवजी की आलोचना करने वाले ब्रह्माजी के पांचवें मुख को काट दिया, लेकिन वो मुख काल भैरव के हाथ से अलग ही नहीं हो रहा था। तभी शिव जी ने काल भैरव से कहा, तुम्हे तो ब्रह्म हत्‍या का दोष लग गया। इस दोष को मिटाने का एक ही तरीका है कि तुम तीनों लोकों का भ्रमण करो। जिस स्थान पर ब्रह्मा का ये पांचवां मुख तुम्‍हारे हाथ से छूटेगा, वहीं तुम्हें इस पाप से मुक्‍ति मिलेगी। भैरव बाबा के हाथ से काशी में ब्रह्माजी का मुख अलग हुआ, वहीं उनको मुक्ति मिली। जिसके बाद शिवजी ने काल भैरव को काशी का कोतवाल बनाया। मान्यता है कि यहां विराजित बाबा कालभैरव की अराधना करने से सारा दुख, नजर बाधा, विकार और कष्ट को भी हरते हैं।

पूजा का चयन करें

851

व्यक्तिगत पूजा

अधिकतम 1 व्यक्ति के लिए पूजा कराएं

पूजा संकल्प के दौरान पंडित जी आपके नाम और गोत्र का उच्चारण करेंगे
आपके नाम-संकल्प के साथ संपन्न हुई पूजा का वीडियो आपके साथ साझा किया जाएगा और तीर्थ प्रसाद आपके द्वारा दिए गए पते पर भेजा जाएगा।

1251

पार्टनर पूजा

अधिकतम 2 व्यक्ति के लिए पूजा कराएं

पूजा संकल्प के दौरान पंडित जी आपके नाम और गोत्र का उच्चारण करेंगे
आपके नाम-संकल्प से संपन्न हुई पूजा का वीडियो आपके साथ शेयर किया जायेगा एवं तीर्थ-प्रसाद आपके दिए गए पते पर भेजा जायेगा।

2001

पारिवारिक पूजा

अधिकतम 4 सदस्यों के लिए पूजा कराएं

पूजा संकल्प के दौरान पंडित जी आपके नाम और गोत्र का उच्चारण करेंगे
आपके नाम-संकल्प के साथ संपन्न हुई पूजा का वीडियो आपके साथ साझा किया जाएगा और तीर्थ प्रसाद आपके द्वारा दिए गए पते पर भेजा जाएगा।
पूजा के अंत में फल, मिठाई और सूखे मेवे का प्रसाद चढ़ाया जाएगा।

3001

संयुक्त परिवार पूजा

अधिकतम 6 सदस्यों के लिए पूजा कराएं

पूजा संकल्प के दौरान पंडित जी आपके नाम और गोत्र का उच्चारण करेंगे
आपके नाम-संकल्प के साथ संपन्न हुई पूजा का वीडियो आपके साथ साझा किया जाएगा और तीर्थ प्रसाद आपके द्वारा दिए गए पते पर भेजा जाएगा।
इस पूजा के अंत में फल, मिठाई और सूखे मेवे का प्रसाद चढ़ाया जाएगा एवं पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।

कैसा रहा श्री मंदिर पूजा सेवा का अनुभव?

क्या कहते हैं श्रद्धालु?
User review
User Image

जय राज यादव

दिल्ली
User review
User Image

रमेश चंद्र भट्ट

नागपुर
User review
User Image

अपर्णा मॉल

पुरी
User review
User Image

शिवराज डोभी

आगरा
User review
User Image

मुकुल राज

लखनऊ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों