गंगा दशहरा विशेष पापों से मुक्ति एवं शारीरिक कल्याण के लिए 1008 गंगा मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक और दीप दान
गंगा दशहरा विशेष पापों से मुक्ति एवं शारीरिक कल्याण के लिए 1008 गंगा मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक और दीप दान
गंगा दशहरा विशेष पापों से मुक्ति एवं शारीरिक कल्याण के लिए 1008 गंगा मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक और दीप दान
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गंगा दशहरा विशेष पापों से मुक्ति एवं शारीरिक कल्याण के लिए 1008 गंगा मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक और दीप दान
गंगा दशहरा विशेष

1008 गंगा मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक और दीप दान

पापों से मुक्ति एवं शारीरिक कल्याण के लिए
temple venue
श्री गंगा घाट, हरिद्वार , उत्तराखंड
pooja date
Warning Infoइस पूजा की बुकिंग बंद हो गई है
srimandir devotees
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अब तक2,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं

गंगा दशहरा विशेष पापों से मुक्ति एवं शारीरिक कल्याण के लिए 1008 गंगा मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक और दीप दान

शास्त्रों की मानें तो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर धरती पर मां गंगा का अवतरण हुआ था। इसलिए यह गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भागीरथ ऋषि ने अपने पूर्वजों की मोक्ष प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी और उनके अथक प्रयासों के बाद माँ गंगा का धरती पर आगमन हुआ, लेकिन माँ गंगा का वेग इतना अधिक था कि अगर वह सीधे धरती पर आतीं तो धरती में प्रलय की स्थिति बन जाती और वह पाताल में ही चली जातीं। भक्तों द्वारा अथक प्रार्थना करने पर भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में भर लिया और उसके बाद माँ गंगा कैलाश से होते हुए धरती पर पहुंची और भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार किया।

मान्यता है कि इस शुभ दिन पर विधि-विधान से मां गंगा की उपासना करने से जातक को सभी पापों, कष्टों एवं रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। इसके अलावा इस दिन दान, अन्न, भोजन और जल जैसे पुण्य कार्य करने की भी परंपरा है। यही कारण है कि गंगा दशहरा पर पूजा के लिए हर की पौड़ी, हरिद्वार में की जाने वाली माँ गंगा की पूजा विश्व प्रसिद्ध है। धार्मिक कथाओं के अनुसार हरिद्वार में लाखों करोड़ों वर्ष तक भगवान ब्रह्मा ने तपस्या की थी इसलिए हरिद्वार में गंगा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस शुभ अवसर पर श्री मंदिर 1008 गंगा मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक और दीप दान का आयोजन कर रहा है, जिसमें भाग लेकर भक्तों को पापों से मुक्ति एवं शारीरिक कल्याण का आशीष प्राप्त होता है।

पूजा लाभ

puja benefits
पापों से मुक्ति के लिए
गंगा दशहरा के शुभ दिन पर गंगा पूजन करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन लोग गंगा को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार से पूजा करते हैं, गंगा जी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जाप, गंगा पंचामृत अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस पूजा के साथ शुभ दिन पर दीप दान करने से व्यक्ति को हर पापों से मुक्ति मिलती है।
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शारीरिक कल्याण के लिए
संकट से मुक्ति के लिए मां गंगा की उपासना बहुत मायने रखती है। मान्यता है कि गंगाजल का स्पर्श करने मात्र से कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गंगा नदी को "अमृत" एवं "जीवनदायिनी" बताया गया है। गंगा नदी में स्नान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि अनेक रोगों से भी मुक्ति मिलती है। इस शुभ दिन पर गंगा की पूजा के साथ दीपदान करने से सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं और शारीरिक कल्याण का वरदान प्राप्त होता है।
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मोक्ष की प्राप्ति
गंगा दशहरा के दिन माता गंगा की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर माता गंगा की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इनकी पूजा से आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि इन्हें मोक्षदायिनी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा पूजा के साथ दीप दान का भी विधान है।

पूजा प्रक्रिया

Number-0

पूजा चयन करें

4 विभिन्न पूजा पैकेज ऑप्शन से चयन करें।
Number-1

अर्पण जोड़ें

अपनी पूजा के साथ गौ सेवा, वस्त्र दान, दीप दान भी करें। पूजा के लिए भुगतान करें।
Number-2

संकल्प विवरण दर्ज करें

अपना नाम और गोत्र दर्ज करें।
Number-3

पूजा दिन

अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक प्रक्रिया के अनुसार पूजा होगी। आपको अपने WhatsApp नंबर पर अपडेट्स मिलेंगे।
Number-4

पूजा वीडियो एबं तीर्थ प्रसाद डिलीवरी

अपने पंजीकृत WhatsApp नंबर पर पूजा के 4-5 दिनों में पूजा वीडियो एबं आपके दिए गए पते पर 8-10 दिनों बाद तीर्थ प्रसाद प्राप्त करें ।

श्री गंगा घाट, हरिद्वार , उत्तराखंड

श्री गंगा घाट, हरिद्वार , उत्तराखंड
पूरे विश्व में हरिद्वार, एक तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है, इसे कुंभ नगरी के नाम से भी जाना जाता है। महाकुंभ के दौरान हजारों लाखों की संख्या में देश-विदेश से लोग गंगा में डुबकी लगाने आते हैं। वहीं, हरिद्वार में गंगा दशहरा पर गंगा पूजा का महत्व काफी अधिक है। शास्त्रों के अनुसार धरती पर मां गंगा का अवतरण मानव कल्याण के लिए हुआ था गोमुख से पहाड़ों के बीच होते हुए मां गंगा मैदानी क्षेत्र के हरिद्वार में सबसे पहले आई थी।

धार्मिक कथाओं के अनुसार हरिद्वार में लाखों करोड़ों वर्ष तक भगवान ब्रह्मा ने तपस्या की थी इसलिए हरिद्वार में गंगा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। साथ ही समुद्र मंथन के बाद निकले अमृत की बूंदें हरिद्वार में गिरी थी इसलिए हरिद्वार में गंगा का महत्व सबसे अधिक बढ़ जाता है। कहा जाता है कि हरिद्वार में गंगा दशहरे पर गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है और यहां स्नान, ध्यान और दान करने से बहुत से लाभ मिलते हैं। जहां व्यक्ति के जन्म जन्मांतर के पाप खत्म होते हैं। वहीं उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

कैसा रहा श्री मंदिर पूजा सेवा का अनुभव?

क्या कहते हैं श्रद्धालु?
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जय राज यादव

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