अकेलेपन से राहत एवं मानसिक स्पष्टता के लिए शनि केतु युति विशेष 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ
अकेलेपन से राहत एवं मानसिक स्पष्टता के लिए शनि केतु युति विशेष 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ
अकेलेपन से राहत एवं मानसिक स्पष्टता के लिए शनि केतु युति विशेष 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ
अकेलेपन से राहत एवं मानसिक स्पष्टता के लिए शनि केतु युति विशेष 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ
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अकेलेपन से राहत एवं मानसिक स्पष्टता के लिए शनि केतु युति विशेष 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ
शनि केतु युति विशेष

19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ

अकेलेपन से राहत एवं मानसिक स्पष्टता के लिए
temple venue
श्री नवग्रह शनि मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश
pooja date
Warning Infoइस पूजा की बुकिंग बंद हो गई है
srimandir devotees
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अब तक2,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं

अकेलेपन से राहत एवं मानसिक स्पष्टता के लिए शनि केतु युति विशेष 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ

ज्योतिष शास्त्र में शनि और केतु की युति को एक महत्वपूर्ण एवं संघर्षपूर्ण घटना मानी गई है। जब शनि और केतु एक ही राशि में होते हैं, तो इसे शनि-केतु युति कहा जाता है। यह युति व्यक्ति के जीवन में गहरा असर डालती है, जिससे जीवन की दिशा और दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण परिवर्तन आने लगते हैं। शनि ग्रह आयु, न्याय, नौकरी, सेवा, अपमान और निष्ठा के कारक हैं, जबकि केतु को रहस्यमय, वैराग्य एवं त्याग का कारक माना गया है। जब ये दोनों ग्रह मिलते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, अस्थिरता और मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। विशेष रूप से यह युति कुंडली के कुछ महत्वपूर्ण घरों में हो, तो इसका प्रभाव और भी गहरा और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

शनि व्यक्ति को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर देता है, जबकि केतु रिश्तों का त्याग कर वैराग्य की भावना उत्पन्न करता है। इस युति के कारण व्यक्ति में मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ज्योतिष विद्या के अनुसार, मूला नक्षत्र का स्वामी केतु होता है और शनिवार का दिन शनि ग्रह को समर्पित है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इस विशेष संयोग के समय शनि एवं केतु की पूजा करते हैं, वे इस युति के अशुभ प्रभावों से मुक्ति पा सकते हैं।

पूजा लाभ

puja benefits
अकेलेपन से राहत
शनि एवं केतु की युति जातक को अकेलापन और अलग-थलग महसूस कराती है। वे भौतिक संसार से अलग होने की भावना महसूस करते हैं और उन्हें किसी भी चीज़ में दिलचस्पी नहीं होती। ऐसे में इस युति के प्रभाव को कम करने यानि अकेलेपन से राहत के लिए 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ लाभकारी साबित होता है।
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मानसिक स्पष्टता के लिए
शनि और केतु दोनों ही निराशा, अत्यधिक सोच, असंतोष, इंकार और देरी के दाता माने जाते हैं। जब इनकी युति बनती है तो व्यक्ति में नकारात्मकता, असंतोष और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है जो जातक के मानसिक प्रवृत्ति को प्रभावित करती है। इससे किसी भी निर्णय को लेने में समस्या उत्पन्न होती है। ऐसे में मानसिक स्पष्टता की प्राप्ति के लिए इस पूजा को करना प्रभावशाली होता है।
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आर्थिक समस्याओं से मुक्ति
शनि केतु की युति जब कुंडली में बनती है तो व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पडता है। माना जाता है कि शनि और केतु की युति आय के सभी स्रोतों को ध्वस्त कर देती है। यहाँ यह दोनों ग्रह धन की उत्पत्ति में पूर्ण सर्वनाश का कारण बनते हैं। इसलिए इन ग्रहों की शांति के लिए 19,000 शनि मूल मंत्र जाप, 7,000 केतु मूल मंत्र जाप और यज्ञ लाभकारी साबित होता है।

पूजा प्रक्रिया

Number-0

पूजा चयन करें

4 विभिन्न पूजा पैकेज ऑप्शन से चयन करें।
Number-1

अर्पण जोड़ें

अपनी पूजा के साथ गौ सेवा, वस्त्र दान, दीप दान भी करें। पूजा के लिए भुगतान करें।
Number-2

संकल्प विवरण दर्ज करें

अपना नाम और गोत्र दर्ज करें।
Number-3

पूजा दिन

अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक प्रक्रिया के अनुसार पूजा होगी। आपको अपने WhatsApp नंबर पर अपडेट्स मिलेंगे।
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पूजा वीडियो एबं तीर्थ प्रसाद डिलीवरी

अपने पंजीकृत WhatsApp नंबर पर पूजा के 4-5 दिनों में पूजा वीडियो एबं आपके दिए गए पते पर 8-10 दिनों बाद तीर्थ प्रसाद प्राप्त करें ।

श्री नवग्रह शनि मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश

श्री नवग्रह शनि मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश
क्षिप्रा नदी के तट पर बसी नगरी उज्जैन में स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने की थी। वर्णित हैं कि, राजा विक्रमादित्य ने इस मंदिर की स्थापना शनि की साढ़ेसाती से मुक्त होने के बाद कराई थी। शनिदेव के साथ भगवान नवग्रह शांति मंडल के स्वरुप में विराजमान है, सभी ग्रहों की दशाएं विराजमान हैं। कहा जाता है कि विक्रमादित्य ने इस मंदिर को बनाने के बाद ही विक्रम संवत की शुरुआत की थी। इस मंदिर में शनिदेव भगवान शिव के रूप में विराजमान हैं।

यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाते हैं। मान्यता है कि जो भी यहां सच्चे मन से शनिदेव को प्रसन्न करता है उसे शनिदेव कभी दुख नहीं देते और सारे कष्ट दूर कर देते हैं। साथ ही देश के कोने-कोने से लोग यहां ग्रह दोष या फिर ग्रहों से होने वाले नकारात्मक प्रभाव एवं उससे आने वाले कार्य में बाधाओं से मुक्ति के लिए यहां पूजा करते हैं।

कैसा रहा श्री मंदिर पूजा सेवा का अनुभव?

क्या कहते हैं श्रद्धालु?
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जय राज यादव

दिल्ली
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रमेश चंद्र भट्ट

नागपुर
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अपर्णा मॉल

पुरी
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शिवराज डोभी

आगरा
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मुकुल राज

लखनऊ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों