नृसिंह द्वादशी कब है
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नृसिंह द्वादशी कब है

क्या आप जानना चाहते हैं कि नृसिंह द्वादशी 2026 में कब है और इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए नृसिंह द्वादशी की सही तिथि, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त और भगवान नृसिंह की आराधना का सरल तरीका – सब कुछ एक ही जगह।

नृसिंह द्वादशी के बारे में

हिंदू धर्म में नरसिंह द्वादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित होता है और इसे होली से तीन दिन पहले रखा जाता है। होली से कुछ दिन पहले नरसिंह द्वादशी का व्रत करने से विशेष रूप से शुभ फल मिलने की मान्यता है।

नरसिंह द्वादशी

हिंदू धर्म में नरसिंह द्वादशी का बहुत महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके नरसिंह अवतार की विशेष पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध करके भगवान ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। माना जाता है कि नरसिंह द्वादशी के दिन विधि-विधान के साथ व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

2026 में नरसिंह द्वादशी कब है?

नरसिंह द्वादशी -28 फरवरी 2026 (शनिवार)

  • शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नरसिंह द्वादशी का त्योहार मनाया जाता है।

द्वादशी तिथि

  • प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे
  • समाप्ति: 28 फरवरी 2026, शाम 08:43 बजे
  • पारण समय (व्रत खोलने का समय): 1 मार्च 2026, रविवार, सुबह 06:46 बजे से 09:05 बजे तक

नरसिंह द्वादशी का धार्मिक महत्व

1. नरसिंह अवतार की पूजा: नरसिंह द्वादशी भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान ने दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। इस दिन भगवान का स्मरण करने से भक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है।

2. पापों से मुक्ति: श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप दूर होते हैं। यह दिन जीवन में नकारात्मक प्रभावों को कम करने और आत्मा को शुद्ध करने का अवसर देता है।

3. मोक्ष की प्राप्ति: नरसिंह द्वादशी के दिन साधना और व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

4. संकट और रोग से सुरक्षा: भगवान की पूजा और व्रत करने से रोग, संकट और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह दिन जीवन में सुरक्षा और स्थिरता लाने वाला माना जाता है।

5. भक्ति और मानसिक शांति: इस दिन जप, ध्यान और व्रत करने से मन और हृदय शुद्ध होते हैं। नरसिंह द्वादशी भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्रदान करती है।

नरसिंह द्वादशी पौराणिक मान्यता

1. हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद की कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकशिपु एक शक्तिशाली दैत्यराज था, जिसे अपनी शक्ति पर बहुत घमंड था। उसने अपने भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने की कोशिश की। प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान के प्रति विश्वास ने हिरण्यकशिपु को हराया।

2. नरसिंह अवतार का उदय: भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण किया, जो आधा मानव और आधा सिंह था। उन्होंने हिरण्यकशिपु का वध करके प्रह्लाद की रक्षा की। यही घटना नरसिंह द्वादशी के पीछे मुख्य पौराणिक कारण है।

3. व्रत और पूजा की महत्वता: पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों को भगवान नरसिंह का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत पापों को दूर करने और जीवन में सुख-शांति लाने वाला माना गया है।

4. आध्यात्मिक संदेश: नरसिंह द्वादशी की कथा यह सिखाती है कि भक्ति और सच्चाई की शक्ति सबसे बड़ी है। चाहे कोई संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, भगवान की भक्ति करने वाले की रक्षा अवश्य होती है।

5. जीवन में पालन: इस पौराणिक मान्यता के अनुसार, नरसिंह द्वादशी पर की गई साधना और व्रत से जीवन में संकट निवारण, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति होती है

नरसिंह द्वादशी के दिन क्या करें? क्या ना करें?

नरसिंह द्वादशी के दिन क्या करें

1. व्रत और उपवास

  • निर्जला व्रत या फलाहार किया जा सकता है, सुबह से लेकर सूर्यास्त तक।

2. पूजा और भक्ति

  • भगवान नरसिंह की पूजा विशेष रूप से करें।
  • उनके चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और मन, वचन और कर्म से भक्ति करें।
  • भजन, कीर्तन और मंत्र जाप करना भी लाभकारी है।

3. दान और परोपकार

  • गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन दान करना शुभ माना गया है।
  • दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मन में संतोष की भावना आती है।

4. ध्यान और साधना

  • दिनभर भगवान का स्मरण करें।
  • मंत्र जाप और ध्यान से मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।

नरसिंह द्वादशी के दिन क्या न करें

  • गलत या अहितकारी कार्य: किसी को नुकसान पहुँचाना, झूठ बोलना या चोरी करना वर्जित है।

1. मांगलिक कार्य टालें

  • इस दिन विवाह, हवन या अन्य शुभ कार्य न करें।
  • यह दिन मुख्य रूप से व्रत, भक्ति और साधना के लिए माना जाता है।

2. नकारात्मक विचार और आलस्य

  • गुस्सा, नकारात्मक सोच और अनावश्यक तर्क-वितर्क से दूर रहें।
  • सकारात्मक कर्म और ध्यान पर फोकस करें।

3. स्वास्थ्य का ध्यान

  • यदि आप बीमार हैं या थके हुए हैं, तो कठोर व्रत की बजाय हल्का फलाहार या जलपान करें।
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Published by Sri Mandir·February 16, 2026

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