
मां काली की महिमा, निर्भयता और कृपा को दर्शाती भावनात्मक पंक्तियाँ पढ़ें, साझा करें और नकारात्मकता से मुक्ति पाएं।
काली माँ को शक्ति और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। उनका नाम लेते ही मन से डर कम होता है और भीतर एक अलग सा साहस महसूस होता है। जब हालात मुश्किल हों, तब काली माँ की भक्ति इंसान को टूटने नहीं देती। इस लेख में जानिए काली माँ की शायरी, जिसे आप अपने स्टेटस, कैप्शन या भक्ति भाव के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
काली माँ शक्ति, साहस और निडरता की प्रतीक मानी जाती हैं। उनका रूप अधर्म और नकारात्मकता का अंत करने वाला माना गया है। काली माँ की भक्ति मन को भीतर से मजबूत बनाती है और हर भय से मुक्त होने की शक्ति देती है। भक्तों का विश्वास है कि माँ काली का स्मरण करने से जीवन में आत्मबल बढ़ता है और संकट दूर होते हैं। काली माँ की शायरी इन्हीं भावनाओं को प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है, जो मन में भक्ति के साथ साहस और विश्वास भी जगाती है।
महाकाली का देख रूप विकराल
केवल बुरी आत्मा होती है भयभीत,
भक्तों के सारे कष्ट हरती है माँ
अंत में अच्छाई की होती है जीत।
महाकाली के चरणों में जब-जब शीश झुकाते है,
जिंदगी की सारी मुसीबतों से लड़ने की ताकत पाते है।
माँ काली जिसे बुलाती है
वही उनके दर पर जाता है,
जो उनके दर पर जाता है,
अपनी झोली भरकर लाता है।
जरूरी नहीं है किसी बड़े आदमी का साथ,
जरूरी है सिर पर सिर्फ महाकाली का हाथ।
महाकाली के दरबार में जरूर जाएँ,
अगर चाहते है कि जीवन में दुःख ना आयें।
भक्तों पर माँ काली अपनी कृपा बरसाती है,
उनके जीवन से सारे दुःख-दर्द हर ले जाती है।
अरि मद मान मिटावन हारी ।
मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥
अष्टभुजी सुखदायक माता ।
दुष्टदलन जग में विख्याता ॥
भक्तों की सारी चिंता हर लेती है,
उनके जीवन को आशा से भर देती है,
महाकाली की पूजा-अर्चना और स्तुति
भक्तों के सारे दुखों को खत्म कर देती है।
कालचक्र की गति हूँ मैं,
चंडी, दुर्गा और सती हूँ मैं,
जिससे बुराई आज भी काँपती है
हाँ! वही महाकाली हूँ मैं।
जो पूरा जीवन महाकाली की भक्ति करता है,
फिर वह दुश्मन की हस्ती से नहीं डरता है।
जिसने अपनी शक्ति को पहचान ली,
उसे खुद के अंदर मिलेगी महाकाली।
जब भी कोई मुसीबत आई,
या हो गई मैं अकेली,
तूने ही सहारा दिया
वो माँ महाकाली।
जय काली कंकाल मालिनी,
जय मंगला महा कपालिनी,
रक्तबीज बधकारिणी माता
सदा भक्त जनकी सुखदाता।
महाकाली और भक्तों में नहीं होती कोई दूरी,
दुःख सारे हर कर, माँ मन की मुराद करती है पूरी।
महाकाली का भक्त होना बड़ी बात होती है,
यह हर किसी के बस की बात नहीं होती है।
कालों की काल महाकाली
भवानी माई कलकत्ता वाली
अंगारा जैसे नैयन लाल-लाल
क्रोधित मुख-मंडल गले मुंड माल
दुष्ट दानव का करें संघार
भक्तों का रखे ख्याल
कालों की काल महाकाली
भवानी माई कलकत्ता वाली
मैं आदि हूँ, मैं अंत हूँ, मैं सृजन हूँ, मैं विनाश हूँ, मैं जन-जन में हूँ, मैं कण-कण में हूँ, मैं क्रूर हूँ, मैं करुणा हूँ, मैं आत्मा भी हूँ, मैं परमात्मा भी हूँ, मैं काल भी हूँ, मैं काली भी हूँ, मैं महाकाली हूँ।
समस्त सृष्टि की शक्ति जिसमें समाई है,
जिनके आँखों में क्रोधाग्नि की लाली है,
जो पापियों को डराने वाली है
वही तो हमारी माँ महाकाली है।
दुःख, पाप, दुष्ट संघारक है वो,
वो ही है अष्टभुजाओं वाली माँ काली
जो भी माँ के दरबार में आता है
उनका दामन खुशियों से भर जाता है।
माँ महाकाली तेरे ही संतान तो है हम,
फिर क्यों है जीवन में इतना दुःख और गम।
माँ काली की पूजा-भक्ति ध्यान करूंगा,
पूरा जीवन महाकाली का गुणगान करूंगा।
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