
सुब्रह्मण्य षष्ठी 2025 कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व। पूरी जानकारी के लिए अभी पढ़ें!
सुब्रह्मण्य षष्ठी भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित पावन पर्व है। इस दिन भक्त उपवास रखकर स्नान, पूजा और व्रत करते हैं। यह दिन बुराइयों पर विजय, स्वास्थ्य, साहस और संतान सुख की प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है।
नमस्कार भक्तों, सुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी के दिन मां पार्वती और शिव जी के पुत्र कार्तिकेय जी की आराधना की जाती है। कुमार कार्तिकेय का नाम स्कंद भी है। इसलिए इसे सुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि परिवार में सुख-शांति और संतान प्राप्ति के लिए सुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी का व्रत बेहद खास महत्व रखता है।
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 04:37 ए एम से 05:30 ए एम |
प्रातः सन्ध्या | 05:03 ए एम से 06:23 ए एम |
अभिजित मुहूर्त | कोई नहीं |
विजय मुहूर्त | 01:33 पी एम से 02:16 पी एम |
गोधूलि मुहूर्त | 05:05 पी एम से 05:32 पी एम |
सायाह्न सन्ध्या | 05:07 पी एम से 06:27 पी एम |
अमृत काल | 02:27 पी एम से 04:10 पी एम |
निशिता मुहूर्त | 11:19 पी एम से 12:12 ए एम, नवम्बर 27 |
रवि योग | 06:23 ए एम से 01:33 ए एम, नवम्बर 27 |
इस व्रत को दक्षिण भारत में प्रमुख त्यौहारों में से एक माना जाता है। यहां भगवान कार्तिकेय को कुमार, मुरुगन, सुब्रह्मण्यम जैसे कई नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में कार्तिकेय को गणेश का बड़ा भाई माना जाता है लेकिन दक्षिण भारत में कार्तिकेय गणेश जी के छोटे भाई माने जाते हैं। इसलिए हर महीने की षष्ठी कोसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी की तिथि होने के कारण इसे कौमारिकी भी कहा जाता है।
स्कंद षष्ठी के दिन मां पार्वती और शिव के पुत्र कार्तिकेय की आराधना की जाती है। कुमार कार्तिकेय का नाम स्कंद भी है। इसलिए इसेसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि परिवार में सुख-शांति और संतान प्राप्ति के लिएसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी का व्रत बेहद खास महत्व रखता है। इस व्रत को दक्षिण भारत में प्रमुख त्यौहारों में से एक माना जाता है। यहां पर भगवान कार्तिकेय को कुमार, मुरुगन, सुब्रह्मण्यम जैसे कई नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में कार्तिकेय को गणेश का बड़ा भाई माना जाता है लेकिन दक्षिण भारत में कार्तिकेय गणेश जी के छोटे भाई माने जाते हैं। इसलिए हर महीने की षष्ठी कोसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी की होने के कारण इसे कौमारिकी भी कहा जाता है।
माना जाता है कि, इस दिन संसार में हो रहे कुकर्मों को समाप्त करने के लिए कार्तिकेय का जन्म हुआ था। बताया जाता है किसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आंखों की ज्योति प्राप्त हुई थी। इस दिन यह भी बताया गया है किसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी की कृपा से प्रियव्रत के मृत शिशु के प्राण लौट आए थे। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस दिन अगर विधि-विधान से भगवान कार्तिकेय का व्रत रखकर उनकी आराधना की जाए तो व्यक्ति को तमाम प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा संतान को भी उनकी तमाम समस्याओं से छुटकारा मिलता है साथ ही धन-वैभव की भी प्राप्ति होती है।
स्कंद षष्ठी के दिन दान आदि कार्य करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन स्कंद देव की स्थापना करके अखंड दीपक जलाना चाहिए। इसके अलावासुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी के दिन पूजन में तामसिक भोजन मांस, शराब, प्याज, लहसुन नहीं शामिल करना चाहिए । साथ ही इस दिन व्रत का पालन करने वाले लोग ब्रह्मचर्य का पालन करें । वहीं अगर कोई व्यक्ति व्यावसायिक कष्टों से जूझ रहा है तो उसे इस दिन कुमार कार्तिकेय को दही में सिंदूर मिलाकर अर्पित करें।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,सुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी का दिन भगवान कार्तिकेय को अधिक प्रिय है, इसलिए इस शुभ दिन पर उनकी आराधना की जाती है। मान्यता है किसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी के दिन विधि विधान से पूजा करने से मनुष्य को ग्रह बाधा से मुक्ति मिलती है साथ ही जीवन की तमाम समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है। इसके अलावा जो लोग भगवान कार्तिकेय का आशीष प्राप्त करने के लिए पूरे समर्पण और आस्था के साथ इस व्रत का पालन करते हैं। उन्हें जीवन में सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। ये भी कहा जाता है किसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी के व्रत का पालन करने से पुत्र प्राप्ति की इच्छा भी पूर्ण होती है।
आज इस लेख के माध्यम से हम आपकोसुब्रहमन्य स्कंद षष्ठी की व्रत से जुड़ी हुई संपूर्ण पूजा विधि के बारे में बताएंगे, जिससे आप पूरे विधि-विधान से इस पूजा व व्रत का पालन कर सकें।
सुब्रहमन्य षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करते समय विशेष मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है। ये मंत्र न केवल मानसिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि साधक को शक्ति, साहस और विजय का आशीर्वाद भी देते हैं। मुख्य मंत्र:
ॐ स्कन्दाय नमः
ॐ कुमाराय नमः
ॐ सुब्रह्मण्याय नमः
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से साधक को विशेष मानसिक, आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं।
सुब्रहमन्य षष्ठी का व्रत एवं पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ भी अनगिनत हैं। इस दिन भगवान कार्तिकेय की आराधना करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
संतान सुख की प्राप्ति:
व्यवसायिक और आर्थिक संकटों से मुक्ति:
शत्रु नाश एवं विजय की प्राप्ति:
ग्रह दोषों से मुक्ति:
मानसिक शांति और आत्मबल की वृद्धि:
इस प्रकार, सुब्रहमन्य षष्ठी की पूजा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है जो व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सफलता और सौभाग्य लेकर आती है।
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