
सावन शिवरात्रि 2025: भोलेनाथ की आराधना का पावन अवसर, जानें पूजा विधि, व्रत कथा और विशेष महत्व।
सावन शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा का पावन पर्व है, जो सावन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और शिव मंत्रों का जाप करते हैं।
साल के हर मास में आने वाली शिवरात्रियों में श्रावण शिवरात्रि और श्रावण शिवरात्रि विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रावण शिवरात्रि उत्तर भारतीय राज्यों में प्रमुख रूप से मनाई जाती है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की उपासना करने का विधान है। मान्यता है कि श्रावण शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्तों पर भगवान शिव अपनी कृपा दृष्टि सदैव बनाए रखते हैं।
23 जुलाई 2025 यानि श्रावण शिवरात्रि के दिन 4 प्रहर की पूजा के शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार हैं: -
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 03:56 ए एम से 04:39 ए एम तक |
प्रातः सन्ध्या | 04:17 ए एम से 05:21 ए एम तक |
अभिजित मुहूर्त | कोई नहीं |
विजय मुहूर्त | 02:19 पी एम से 03:13 पी एम तक |
गोधूलि मुहूर्त | 06:48 पी एम से 07:09 पी एम तक |
सायाह्न सन्ध्या | 06:48 पी एम से 07:51 पी एम तक |
अमृत काल | 08:32 ए एम से 10:02 ए एम तक |
निशिता मुहूर्त | 11:43 पी एम से 12:26 ए एम, 24 जुलाई तक |
दर्शकों, जहाँ भगवान भोलेनाथ के भक्त साल में एक बार बड़ी ही धूमधाम से श्रावण शिवरात्रि मनाते हैं, वहीं शिव की उपासना के लिए श्रावण शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की आराधना करने से कुंवारी कन्याओं को योग्य वर मिलता है, और शीघ्र विवाह का संयोग बनता है।
श्रावण शिवरात्रि, हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है और शिवभक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिवरात्रि, ‘रात्रि’ का अर्थ रात से है और ‘शिव’ से संबंधित होने के कारण इसे ‘शिवरात्रि’ कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है।
श्रावण शिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पुण्यकारी तिथि मानी जाती है। यह व्रत विशेष रूप से श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि "मासिक शिवरात्रि" श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है, परन्तु श्रावण मास में पड़ने के कारण इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। आइए जानते हैं श्रावण शिवरात्रि का महत्व और इसके धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहलुओं को।
श्रावण के पूरे मास भगवान शिव को समर्पित कई पर्व मनाए जाते हैं, इनमें श्रावण शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सभी शिव मंदिरों व काशी विश्वनाथ, बद्रीनाथ धाम जैसे तीर्थस्थानों पर पूजा-पाठ का आयोजन होता है। हजारों भक्त गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान भोलेनाथ की कृपा पाते हैं।
शिवरात्रि के एक दिन पहले, यानि त्रयोदशी तिथि पर एक समय ही भोजन करने का विधान है। शिवरात्रि के दिन भक्त सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। कुंवारी कन्याएं ये व्रत रखकर भगवान शिव से योग्य वर की कामना करती हैं, और विवाहित स्त्रियां इस दिन भोलेनाथ से अखंड सुहाग का वरदान मांगती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने व भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
श्रावण शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा-अर्चना का एक विशेष अवसर है। इस दिन भक्तगण रात्रि भर जागरण करके भगवान शिव की आराधना करते हैं। शिवरात्रि की रात्रि शिव के अन्नय स्वरूप का पूजन कर भक्तगण अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस रात को शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा विधि अपनाई जाती है, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है।
श्रावण मास में शिवरात्रि का महत्व बहुत अधिक होता है। यह समय धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विषपान किया था, जिससे उन्होंने सृष्टि को विनाशकारी विष से बचाया था। इसीलिए इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, शिवरात्रि आत्म-संयम और तपस्या का प्रतीक है। इस दिन उपवासी रहकर और रात्रि भर जागरण करके भक्तगण अपनी आत्मा की शुद्धि करते हैं और मानसिक स्थिरता प्राप्त करते हैं। शिवरात्रि पर उपवास और साधना से भक्तों को ध्यान और समाधि की स्थिति प्राप्त होती है, जो उनके आध्यात्मिक विकास में सहायक होती है।
श्रावण शिवरात्रि के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। एक प्रमुख कथा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने सती को पति के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन भगवान शिव और सती की विवाह की कहानी को भी याद किया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह भी माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने अपने तांडव नृत्य से सृष्टि को संजीवनी दी थी और अंधकार को नष्ट किया था।
श्रावण शिवरात्रि का पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण होता है। इस दिन विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं। शिवरात्रि के अवसर पर विशेष भंडारे और धार्मिक समारोहों का आयोजन होता है, जिसमें लोग एकत्रित होकर भगवान शिव की आराधना करते हैं और आपसी मिलन-संबंध को मजबूत करते हैं।
श्रावण शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति की समृद्धि, सुख, और शांति में वृद्धि होती है। भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन की पूजा विधि और व्रत को सही प्रकार से निभाना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि जो मनुष्य श्रावण शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक या महाभिषेक करता है, भगवान शिव उस जातक को अपनी शरण में ले लेते हैं, और उसपर समस्त शिवपरिवार की कृपादृष्टि होती है। श्रावण शिवरात्रि पर किये गए रुद्राभिषेक से जो अनेक लाभ हमें मिलते हैं, उनमें से विशेष हैं -
और ऐसे ही कई लाभ प्राप्त करने के लिए यदि आप श्रावण शिवरात्रि के दिन अपने घर में ही रुद्राभिषेक पूजा करना चाहते हैं, तो उसकी सम्पूर्ण सामग्री कुछ इस प्रकार होगी।
भोलेनाथ को प्रायः हल्दी अर्पित नहीं की जाती है, परन्तु मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास की श्रावण शिवरात्रि पर भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ था, इसलिए इस दिन शिवजी को हल्दी अर्पित की जा सकती है।
श्रावण शिवरात्रि की पूजा में शिवजी को 108 बिल्वपत्र एक-एक करके ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते हुए अर्पित करना बहुत फलदायक होता है। परन्तु यदि आपके पास 108 बिल्वपत्र उपलब्ध न हो पाए तो शिवजी अपनी क्षमतानुसार बिल्वपत्र अवश्य चढ़ाएं।
इन सामग्रियों से आप अपने घर में सरलता से रुद्राभिषेक सम्पन्न कर सकते हैं। हम आशा करते हैं आपकी रुद्राभिषेक पूजा सफल बनें और आपको भगवान शिव का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो।
ॐ नमः शिवाय, प्रिय भक्तों, श्रावण शिवरात्रि यानी भगवान शिव का दिन। कहा जाता है, कि इस दिन भगवान शिव की पूरे विधि-विधान से की गई पूजा, विशेष फल देती है। लेकिन आखिर क्या है यह विशेष पूजा? इसे करने का सही तरीका क्या है?
आइए, श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर श्री मंदिर की इस ख़ास प्रस्तुति में जानते हैं, पावन श्रावण शिवरात्रि पूजा की विधि।
श्रावण शिवरात्रि की चारों प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त इस लेख की शुरुआत में आपके लिए उपलब्ध है।
हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को बेहद ख़ास और शुभ माना गया है। रात के आख़िरी पहर के बाद और सूर्योदय से ठीक पहले का जो समय होता है उसे ब्रह्म मुहूर्त कहा जाता है, यानी सुबह से 4 बजे से लेकर सुबह के साढ़े 5 बजे तक का जो समय होता है, वो ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। और इसी मुहूर्त में भगवान की पूजा का महत्व होता है।
श्रावण शिवरात्रि के इस पावन दिन की शुरुआत, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, दैनिक कार्यों से निवृत होकर स्नान करने से करें। स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। स्वच्छ वस्त्र डालकर, किसी शिवालय में शिवलिंग के सामने बैठकर, भगवान शिव का ध्यान करें।
भगवान शिव की पूजा में त्रिपुंड लगाने का बहुत महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि, त्रिपुंड लगाने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इसीलिए पूजा शुरू करने से पहले शिवलिंग पर चंदन का त्रिपुंड लगाएं। इसके लिए तीन अंगुलियों पर चंदन लगाएं और फिर शिवलिंग पर बाईं ओर से दाईं ओर त्रिपुंड लगाएं। आप अपने माथे पर भी त्रिपुंड लगा सकते है।
और फिर माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं। कहते हैं इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इस दिन माता पार्वती की पूजा भी अति फलदायी होती है।
अब भोलेशंकर को षोडशोपचार अर्थात पुष्प, अक्षत् यानी साबुत चावल , बेल पत्र, आक-धतूरा के फूल, भांग, इत्र, साबुत हल्दी, इलायची, लौंग, फल, सुपारी एक एक करके शिवलिंग पर चढ़ाएं, फिर भगवान शिव को खीर या मिठाई और फलों का भोग लगाएं। और मन में उनका ध्यान और ॐ नमः शिवाय का जाप करते रहे।
अब भगवान शंकर के सामने धूप, अगरबत्ती, कपूर या घी का दीया जलाकर उनकी आरती करें और उनसे अपने भूल-चूक की माफ़ी मांगते हुए, अपने उज्वल भविष्य की कामना करें। आप शिव चालीसा का भी पाठ कर सकते है। हो सके तो रात भर जाग कर चार पहर की पूजा में भी सम्मिलित हो जाएँ।
अगर घर के पास शिव मंदिर नहीं है तो आप घर में पार्थिव शिवलिंग यानी मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा कर सकते हैं। ध्यान रखें की पार्थिव शिवलिंग में शुद्ध मिट्टी का प्रयोग करें।
पार्थिव शिवलिंग, मिट्टी, गाय के गोबर, गुड़, मक्खन, राख और गंगा जल को मिलाकर बनाया जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाते समय इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर, इसमें गंगाजल मिला लें। हम कामना करते है, श्रावण शिवरात्रि पर आपकी पूजा सिद्ध हो और आप भोले शंकर की विशेष कृपा के हकदार बनें।
श्रावण शिवरात्रि पर पूरे विधि-विधान से की गई यह पूजा, पूरी उम्र के पापों का निवारण है। आप भी पूर्ण भक्ति और आस्था के साथ महादेव की अर्चना कर, भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें, इस श्रावण शिवरात्रि पर हम आपके लिए लेकर आएं है, इस पर्व से जुड़ी कुछ बेहद ही महत्वपूर्ण बातें, तो आप बने रहिये श्री मंदिर पर। भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामना पूरी करें,
हिंदू धर्म में शिवरात्रि अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, और इन्हीं मासिक शिवरात्रियों में से श्रावण मास की शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है। दोनों ही भगवान शिव की उपासना के लिए महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन इनमें कुछ स्पष्ट अंतर होते हैं।
मासिक शिवरात्रि – यह हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है। यानी साल भर में 12 बार मनाई जाती है। सावन शिवरात्रि – यह केवल श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) की कृष्ण चतुर्दशी को आती है। वर्ष में एक बार आती है, लेकिन इसका महत्व सबसे अधिक माना जाता है।
मासिक शिवरात्रि – यह शिवभक्तों के लिए नियमित आराधना की तिथि है। ध्यान, जप, व्रत आदि के लिए उत्तम दिन होता है। सावन शिवरात्रि – यह शिव भक्तों के लिए विशेष पुण्यकारी तिथि है क्योंकि श्रावण महीना स्वयं भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन किया गया जप, व्रत और पूजा कई गुना अधिक फल देती है।
श्रावण, भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र माह है, सनातन धर्म में इसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। इस माह में भक्त शिव साधना (भगवान शिव की पूजा) में संलग्न होते हैं ताकि वह आशीर्वाद, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक विकास प्राप्त कर सकें। इसलिए आज के इस लेख में हम आपको भगवान शिव के 5 अत्यंत प्रिय मंत्र के साथ-साथ पहली बार श्रावण सोमवार का व्रत करने वाले भक्तों के लिए भी एक खास मंत्र बताने वाले हैं।
"ॐ नमः शिवाय"
"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्"
"ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्"
"ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ"
"ॐ ह्रौं ह्रीं ह्रौं ॐ नमः शिवाय"
यदि आप पहली बार श्रावण सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो आपके लिए इस सरल और शक्तिशाली मंत्र का जाप करना उचित रहेगा:-
यह मंत्र याद रखने में आसान और शक्तिशाली है। यह भक्त के मन और हृदय को भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का आभास करवाता है, इसलिए यह पहली बार व्रत करने वाले भक्तों के लिए एक अच्छी शुरुआत मानी जाती है।
श्रावण के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं, जिनमें शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक विकास शामिल हैं। पहली बार श्रावण सोमवार का व्रत करने वालों के लिए "ॐ नमः शिवाय" एक उत्तम मंत्र है। इन मंत्रों के जाप से अपने हृदय में भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा कि अनुभूति करें और और अपने जीवन को एक आदर्श रूप दें।
सावन शिवरात्रि, भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पावन व्रत है। श्रावण मास में आने वाली शिवरात्रि को "सावन शिवरात्रि" कहा जाता है और इसे विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से अनेक सांसारिक व आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
सावन शिवरात्रि व्रत करने वाले भक्तों पर भगवान शिव की विशेष अनुकंपा बनी रहती है। भोलेनाथ की कृपा से जीवन के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ होता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने वाली कन्याओं को शिव जैसे श्रेष्ठ पति की प्राप्ति होती है।
विवाहित स्त्रियाँ इस व्रत को पति की लंबी उम्र, प्रेम और सौहार्द के लिए करती हैं। इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम बढ़ता है।
सावन शिवरात्रि पर रात्रि जागरण, शिव नाम जप और जलाभिषेक करने से व्यक्ति के पूर्वजन्मों के पाप नष्ट होते हैं। यह व्रत मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
यह व्रत मन को संयमित करता है और साधना की ओर अग्रसर करता है। भगवान शिव का ध्यान करने से तनाव कम होता है और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
भक्तों का मानना है कि सावन शिवरात्रि पर व्रत करने और शिवलिंग पर बेलपत्र, गंगाजल, दूध आदि अर्पित करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
इस दिन घर में शिवपूजन, आरती और मंत्रजप करने से वातावरण पवित्र होता है, घर में शुभ ऊर्जा का वास होता है और नकारात्मकता दूर होती है। सावन शिवरात्रि का व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह एक ऐसा अवसर है जब व्यक्ति अपने जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास का अनुभव कर सकता है। यह व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति का प्रतीक है और इसके फल स्वरूप शिवभक्त को शिव कृपा सहज ही प्राप्त होती है।
गंगाजल व काला तिल से करें अभिषेक
शिवलिंग के पास घी का दीपक जलाएं
गेहूं और जौ से करें ये उपाय
चंदन से त्रिपुंड बनाएं
श्रावण शिवरात्रि का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक भी है। यह दिन भगवान शिव की विशेष आराधना का अवसर प्रदान करता है और भक्तों को उनके जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है। इस दिन की पूजा विधियों को सही तरीके से अपनाकर, व्यक्ति भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकता है और अपने जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध बना सकता है। हम आशा करते हैं कि आपका व्रत सफल हो, और शिव शम्भू आपकी मनोकामना पूर्ण करें। इसी के साथ सभी भक्तजनों को श्रावण शिवरात्रि की शुभकामनाएं। ऐसे ही व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए 'श्री मंदिर' के इस धार्मिक मंच पर।
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