
रामलला प्राण प्रतिष्ठा दिवस 2026 कब है? 22 जनवरी को जानिए शुभ मुहूर्त और इस दिन को खास बनाने के तरीके!
अनगिनत बलिदानों और लंबे संघर्षों के बाद जिस पावन दिवस को मनाने का सौभाग्य देशवासियों को प्राप्त हुआ है वह है रामलला प्रतिष्ठा दिवस। यह दिन भगवान श्रीराम की प्रतिष्ठा, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। रामलला प्रतिष्ठा दिवस का इतिहास, इसका धार्मिक व सामाजिक महत्व तथा वर्ष 2026 में यह महोत्सव कब और कैसे मनाया जाएगा आदि महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए पढ़ें यह लेख ।
रामलला प्रतिष्ठा दिवस आखिर क्या है तो आपको बता दें कि रामलला प्रतिष्ठा दिवस एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय दिन है, जो सदियों की तपस्या, संघर्ष और बलिदानों का परिणाम है। यह दिवस उन अनगिनत लोगों के बलिदानों और संघर्षों का प्रतीक है, जिन्होंने मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम के आदर्शों की स्थापना के लिए न केवल समाज को प्रेरित किया बल्कि धरा पर रामराज लाने की एक छोटी सी आश को भी जीवंत कर दिया। सैकड़ों लोगों के संघर्षों का ही नतीजा है जिनकी वजह से हम सभी कोे यह दिवस मनाने का अवसर मिला।
वहीं, रामलला प्रतिष्ठा दिवस का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक है। इस दिवस से हमारे इतिहास, संस्कृति और परंपराओं का गहरा संबंध जुड़ा हुआ है। इसके अलावा राम लला प्रतिष्ठा दिवस अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के प्रति श्रद्धा और विश्वास का भी प्रतीक है। इस दिवस की मान्यता इतनी है कि इस दिवस न केवल भारत के लोग बल्कि दुनिया में रहने वाले श्रीराम के साधक श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाते हैं। यह प्राण प्रतिष्ठा समारोह साधकों और भक्तों के मन में आस्था, खुशी और आध्यात्मिक शांति का संचार करता है। यह दिवस भगवान राम के प्रति भक्ति और समर्पण को और भी गहरा करता है, जो मर्यादा और धार्मिक एकता का प्रतीक है।
जानकारी के अनुसार, रामलला प्रतिष्ठा दिवस महोत्सव 2026 में 22 जनवरी, गुरुवार के दिन को मनाया जाएगा। यह दिन विशेष रूप से 2024 में अयोध्या में हुई ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के रूप में मनाया जाएगा। हालांकि, इसे प्रतीकात्मक रूप से तीसरी वर्षगांठ भी माना जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा समारोह 2020 में हुआ था और यह 2026 में इसका दूसरा साल पूरा होने पर मनाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, इस दिन पर विशेष संयोग भी बन रहे हैं। जानकारी के अनुसार, गुरुवार का दिन गुरु तत्व, ज्ञान और धर्म से जुड़ा हुआ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब गुरु तत्व किसी पावन तिथि से मिलकर जुड़ता है, तो वह दिन भक्ति, मर्यादा और सद्बुद्धि को प्रबल करने वाला बन जाता है। साथ ही, यह दिन मकर संक्रांति के बाद आ रहा है जब सूर्य उत्तरायण हो चुका है। उत्तरायण को देवताओं का दिन और सकारात्मक ऊर्जा के व्रुद्धि का काल माना गया है। गुरु तत्व, उत्तरायण सूर्य और शुभ संवत के संयोग ने रामलला प्रतिष्ठा दिवस को एक अत्यंत पवित्र और शुभ अवसर बना दिया है।
साल 2026 में, रामलला प्रतिष्ठा दिवस का महोत्सव 22 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। यह दिन राम मंदिर में विशेष पूजा, भव्य कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाया जाएगा। भारत के पंचांग के अनुसार, हर साल रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ पौष शुक्ल द्वादशी को मनाई जाती है, जो कि 2026 में 22 जनवरी को है।
रामलला प्रतिष्ठा दिवस मनाने का उद्देश्य धार्मिक उत्सव से कहीं अधिक है। यह दिन श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म के प्रति अडिग विश्वास को याद करने का अवसर है। यह दिवस हमें जीवन में सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देता है, जिससे समाज में शांति, एकता और समृद्धि स्थापित हो सकती है। इस दिन को मनाने से न केवल श्रद्धालुओं की भक्ति और आस्था को बल मिलता है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता को भी प्रोत्साहित करता है। यह दिवस हमें अपने धर्म, परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहने का महत्व समझाता है। इसके अलावा, यह दिवस संघर्ष, बलिदान और धैर्य की महिमा से भी अवगत कराता है। श्रीराम के संघर्षों और उनके आदर्शों के माध्यम से यह दिन हमें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने, आत्मिक उन्नति और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा भी देता है। ऐसे में रामलला प्रतिष्ठा दिवस केवल एक धार्मिक अवसर नहीं बल्कि यह आत्मिक शांति, समाज में सामंजस्य और जीवन में सच्चे मार्ग पर चलने का प्रेरक भी है।
रामलला प्रतिष्ठा दिवस का महत्व केवल एक धार्मिक पर्व के रूप में नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, विश्वास और आस्था का प्रतीक है। इस दिन रामलला की मूर्ति को मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया था, जो एक लंबे संघर्ष के बाद संभव हुआ। यह दिन अयोध्यावासियों और राम भक्तों के लिए विशेष है, क्योंकि इससे जुड़ी भावनाएं और श्रद्धा लोगों के दिलों में गहरी हैं। यह दिन राम मंदिर निर्माण के सफर की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो भारतीय समाज में एकता और संप्रभुता का संदेश देता है।
रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर देशभर में विभिन्न धार्मिक और भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें विशेष रूप से सामूहिक पूजा, राम नाम जप और भजन संध्या शामिल होती है। इस दिन श्रद्धालु एक साथ मिलकर श्रीराम के दिव्य नाम का जाप करते हैं। इसके अलावा मंदिरों में दीपों का जलना, राम कथा का आयोजन और भजन-कीर्तन भी होता है। इस दिन दान, भंडारे का आयोजन आदि भी होता है। इसके साथ ही इस पावन अवसर पर श्रद्धालु उस ऐतिहासिक क्षण को भी श्रद्धा और भाव से स्मरण करते हैं, जिसकी वजह से रामलला प्रतिष्ठा दिवस मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर घर में पूजा करने का महत्व विशेष है। यदि आप इस दिन घर पर पूजा करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित तरीके से पूजा कर सकते हैं:
सबसे पहले अपने पूजा स्थल को स्वच्छ करें। वहां दीपक जलाएँ, अगरबत्ती लगाएँ और फूल चढ़ाएँ।
"राम" का जाप करें और श्रद्धा भाव से राम मंत्रों का उच्चारण करें। विशेष रूप से श्रीराम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
इस दिन घर में प्रसाद का वितरण करें और भजन-कीर्तन का आयोजन करें।
यदि आपके घर में रामलला की मूर्ति है, तो उनकी विशेष पूजा करें। उन्हें ताजे फूल, पंचामृत और अक्षत अर्पित करें।
दिनभर ध्यान में रहें और श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को समझें।
प्रभु का स्मरण: इस दिन विशेष रूप से राम का नाम लें और उनके जीवन के आदर्शों को याद करें।
भक्ति और साधना: रामलला के भव्य कार्यक्रमों का हिस्सा बनें, यदि आप अयोध्या में हैं, तो। अन्यथा, घर पर भक्ति भाव से पूजा करें।
संगीत और भजन: घर पर राम भजन और कीर्तन का आयोजन करें। यह वातावरण को पवित्र बनाए रखेगा।
दीन-दुखियों को मदद दें: इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन या अन्य सहायता देना बहुत शुभ माना जाता है।
शराब या मांसाहार से बचें: रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर मांसाहार और नशे से दूर रहना चाहिए।
झगड़ा या विवाद से बचें: इस दिन किसी भी प्रकार के विवाद से बचना चाहिए और शांति बनाए रखें।
लालच और स्वार्थ से दूर रहें: इस दिन का उद्देश्य सिर्फ भक्ति और समर्पण है, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए।
रामलला प्रतिष्ठा दिवस अयोध्या राम मंदिर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है। यह दिन हम सभी के लिए श्रद्धा और विश्वास का दिन है। इस दिन को भक्ति भाव से मनाना चाहिए, और श्रीराम के आदर्शों का पालन करना चाहिए। चाहे आप अयोध्या में हों या घर पर, यह अवसर हमें प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी आस्था और प्रेम को व्यक्त करने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।
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