सफला एकादशी की पूजा विधि और महत्व

सफला एकादशी की पूजा विधि और महत्व

7 जनवरी, 2024 - इस व्रत से होंगे सारे कार्य सफल


सफला एकादशी 2024 (Safla Ekadashi 2024)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, सफला एकादशी सभी कार्यों को सफल करने वाली है। कल्याण और सौभाग्य प्रदान करने वाली इस एकादशी का क्या महत्व है और इसमें आपके लिए क्या खास है, इससे संबंधित संपूर्ण जानकारी हम आज लेकर आए हैं, तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें-

सफला एकादशी 2024 कब है (When is Safla Ekadashi in 2024)

साल 2024 में सफला एकादशी रविवार, 7 जनवरी , 2024 को एकादशी तिथि प्रारम्भ - 07 जनवरी , 2024 को मध्यरात्रि 12:41 पर एकादशी तिथि समाप्त - 08 जनवरी 2024 को मध्यरात्रि 12:46 पर

अब जानते हैं कि एकादशी व्रत पारण (व्रत तोड़ने) का समय क्या होगा?

सफला एकादशी व्रत के पारण का समय 07 जनवरी 2024 को मध्यरात्रि 12 बजकर 41 मिनट से 08 जनवरी 2024 को मध्यरात्रि 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा ।

आपको बता दें, इस तिथि से संबंधित कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें हैं, जिनका आपको ख़ास तौर पर ख्याल रखना चाहिए, तो चलिए उन बातों के बारे में भी जान लेते हैं- 8 जनवरी 2024 को पारण (व्रत तोड़ने का) समय सुबह 06 बजकर 45 मिनट से सुबह 08 बजकर 53 मिनट तक रहेगा

महत्वपूर्ण बातें-

  • एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना आवश्यक है।
  • यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए।
  • एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
  • हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है।
  • व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
  • अगर कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।
  • जब एकादशी व्रत दो दिन होता है, तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए।
  • दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं।
  • सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए।

सफला एकादशी का महत्व (Importance Of Safla Ekadashi)

हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष माह में आने वाली एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी पर व्रत एवं श्री हरि का ध्यान करने से व्यक्ति जीवन में सफलता के नए आयाम प्राप्त कर लेता है। हर उस हरि भक्त के लिए यह एकादशी बेहद महत्वपूर्ण है, जिसकी असीम आस्था भगवान में निहित है।

चलिए जानते हैं इस एकादशी पर व्रत करने से जातक को क्या-क्या लाभ मिलते हैं-

रुके हुए कार्य पूरे होते हैं-

इस व्रत को करने से विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों में आने वाली अटकलें और मुसीबतें दूर होती है, जिससे व्यक्ति के हर काम बिना किसी रुकावट के पूर्ण होते हैं।

सफलता-

इस एकादशी व्रत का पुण्यफल व्यक्ति के लिए सफलता के नए आयाम खोल देता है, और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता की प्राप्ति व्यक्ति को अवश्य होती है।

सौभाग्य-

यह एकादशी व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य की सौगात भी लेकर आती है और व्यक्ति को अपने परिश्रम के साथ अच्छे भाग्य का साथ भी मिलता है।

परिवार में सुख-समृद्धि-

जातक के साथ, उसके परिवार को भी इस व्रत के विशेष लाभ मिलते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही इस व्रत से अच्छे स्वास्थ्य का उपहार भी व्यक्ति और उसके परिवार को मिलता है।

मोक्ष की प्राप्ति-

हर एकादशी की तरह ही, इस एकादशी व्रत के पुण्यफल से व्यक्ति को जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

चलिए अब जान लेते हैं कि इस दिन को अधिक शुभ बनाने के लिए आपको क्या करना चाहिए और किन कार्यों को करने से बचना चाहिए-

  • एकादशी व्रत का पालन करने वाले लोगों को दशमी के दिन से ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
  • जातक को दशमी और एकादशी के दिन भूमि पर ही शयन करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु को तुलसी दल के साथ पंचामृत अर्पित करें।
  • शाम में तुलसी जी के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
  • पूरा दिन भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • इस दिन दान-पुण्य अवश्य करें।
  • भगवान विष्णु के स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा पाने के लिए आप उन्हें चढ़ावा अर्पित कर सकते हैं। अगर आप कहीं जाने में असमर्थ हैं तो श्री मंदिर की चढ़ावा सेवा का लाभ अवश्य उठाएं। इसके माध्यम से आप घर बैठे मथुरा में बांके बिहारी मंदिर और गोर्वधन के गिरिराज मुखारविंद मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को चढ़ावे के रूप में माखन, भोग, पुष्प आदि चढ़ा सकते हैं।

ध्यान रहे-

  • इस दिन घर में मांस-मदिरा का सेवन नहीं होना चाहिए।
  • इस दिन किसी भी प्रकार का कोई भी अनैतिक कार्य जैसे कि झूठ बोलना, निंदा करना, चोरी करना, किसी की भावनाओं को आहत करना आदि नहीं करने चाहिए।

सफला एकादशी व्रत कैसे किया जाता है? (How To Do Vrat Of Safla Ekadashi)

हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2024 में 07 जनवरी, रविवार को इस एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है, और इस लेख में आपको सफला एकादशी पर घर में की जाने वाली पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री सहित जानने को मिलेगी।

आइये सबसे पहले जानें सफला एकादशी की पूजा विधि की सामग्री

पूजा सामग्री - चौकी, भगवान विष्णु की प्रतिमा, पुष्प, माला, जनेऊ, धुप-दीप-अगरबत्ती, तुलसीदल, पञ्चामृत का सामान (दूध, घी, दही, शहद और मिश्री), तुलसीदल, मिष्ठान्न और ऋतुफल

सफला एकादशी की पूजा विधि -

  • सफला एकादशी का व्रत करने के लिए दशमी तिथि की शाम में व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है।
  • सफला एकादशी के दिन प्रातःकाल उठें, और किसी पेड़ की टहनी से दातुन करें, इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्वयं को चन्दन का तिलक अवश्य करें।
  • अब भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य दें और नमस्कार करते हुए, आपके व्रत और पूजा को सफल बनाने की प्रार्थना करें।
  • अब पूजा करने के लिए सभी सामग्री इकट्ठा करें और पूजा शुरू करें।
  • सबसे पहले पूजा स्थल पर एक चौकी स्थापित करें, और इसे गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  • इसके बाद चौकी पर एक पीला वस्त्र बिछाएं।
  • चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। चौकी की दायीं तरफ एक दीपक जलाएं।
  • भगवान को रोली-चन्दन का तिलक करें। कुमकुम हल्दी और अक्षत भी चढ़ाएं।
  • अब ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जप करते हुए श्रीहरि को पुष्प, जनेऊ और माला अर्पित करें।
  • भगवान विष्णु को पंचामृत में तुलसीदल डालकर अर्पित करें, भगवान विष्णु को तुलसी अतिप्रिय है इसीलिए भगवान के भोग में तुलसी को अवश्य शामिल करें।
  • भगवान को भोग में मिष्ठान्न और ऋतुफल अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम या श्री हरि स्त्रोतम का पाठ करें, इसे आप श्री मंदिर के माध्यम से सुन भी सकते हैं।
  • अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
  • अब सभी लोगों में भगवान को चढ़ाया गया भोग प्रसाद के रूप में वितरित करें।

श्री मंदिर द्वारा आयोजित आने वाली पूजाएँ