
इस नाग पंचमी पर कहीं आप ये भूल तो नहीं कर रहे? जानिए पूजा की सही विधि और वो काम जिन्हें बिल्कुल करने से बचना चाहिए।
नाग पंचमी एक पावन पर्व है जिसमें नाग देवता की पूजा की जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और नागों को दूध अर्पित कर उनसे जीवन में सुख-शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं। इस दौरान कई बातों का ध्यान रखना भी ज़रूरी होता है, आइये जानते हैं ऐसी कुछ बातों के बारे में...
श्रावण मास में मनाया जाने वाला नाग पंचमी का पर्व सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह दिन नाग देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय, कालसर्प दोष, व शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, नाग पंचमी पर किए गए विशेष उपाय जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाते हैं। लेकिन इस दिन कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी है, जिनका हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए।
चलिए इस लेख में जानते हैं, नाग पंचमी का महत्व और इस दिन क्या करें व क्या न करें...
श्रावण मास में मनाया जाने वाला नाग पंचमी का पर्व सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इस दिन लोग नाग देवता की पूजा कर भय, कष्ट और जीवन की नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की कामना करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नाग भगवान शिव के गले का आभूषण हैं और शेषनाग भगवान विष्णु की शय्या माने जाते हैं। इसलिए नागों की पूजा करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
नाग पंचमी का दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है, जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से नाग देवता की पूजा करने से इस दोष का निवारण होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में नाग पंचमी का पर्व खेतों की रक्षा और सांप जैसे जहरीले जीवों से बचाव की कामना के रूप में भी मनाया जाता है। लोग मानते हैं कि इस दिन नागों की पूजा करने से फसल के साथ-साथ गांव के लोगों की भी रक्षा होती है।
नाग पंचमी के दिन घर में या मंदिर में नाग देवता की प्रतिमा या चित्र बनाकर उसकी पंचोपचार विधि से पूजा करें। हल्दी, कुमकुम, फूल, चंदन और दूध से नाग देवता का पूजन करना शुभ माना जाता है।
इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करना चाहिए। व्रत करने वाले जातक को एक समय भोजन या फलाहार करना चाहिए, सोच सकारात्मक रखनी चाहिए और भगवान शिव का सुमिरन करना चाहिए।
नाग पंचमी व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करना चाहिए। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो इस दिन चांदी या पंच धातु से बने नाग-नागिन की पूजा और अभिषेक करें। साथ ही इस दिन भगवान शिव व नाग देवता के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
नाग पंचमी के दिन निर्धन लोगों को भोजन कराना, वस्त्र दान करना और ब्राह्मणों को दान देना पुण्यकारी माना गया है।
इस दिन सांप को पकड़ना, परेशान करना या मारना महापाप माना गया है। इससे जीवन में कष्ट और बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए नाग देवता के प्रतीक स्वरुप उनकी प्रतिमा की ही पूजा करें।
सांप स्वाभाविक रूप से दूध नहीं पीते हैं और उन्हें जबरन दूध पिलाना उनके और आपके दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए नाग पंचमी पर सांप की पूजा करें, लेकिन उन्हें जबरन दूध न पिलाएं। अगर दूध चढ़ाना ही है तो उनका आह्वान कर प्रतीकात्मक रूप से अर्पित करें।
नाग पंचमी के पूजन में लोहे के पात्र या धातु का उपयोग वर्जित माना गया है। पूजा के लिए मिट्टी, पीतल या तांबे के पात्रों का ही प्रयोग करें।
इस दिन नीम, करेला या किसी भी कड़वी वस्तु का सेवन वर्जित माना जाता है। यह व्रत की शुद्धता में बाधक माना गया है।
नाग पंचमी के दिन भूमि खुदाई या पेड़ काटना अशुभ माना जाता है। क्योंकि इससे सांपों के वास स्थल को हानि पहुंच सकती है।
नाग पंचमी का पर्व हमें संदेश देता है कि हर जीव, चाहे वह भय का कारण ही क्यों न हो, हमारे जीवन चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नाग पंचमी के दिन पूजा-अर्चना के साथ-साथ यदि हम इस लेख में बताई गई बातों का ध्यान रखें, तो जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। हमारी कामना है कि इस नाग पंचमी आपकी पूजा विधिवत संपन्न हो, और नागदेवता के साथ-साथ भगवान शिव व भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त हो।
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