
मिट्टी के करवा का करवा चौथ व्रत में क्या महत्व है? जानिए इसके पीछे के धार्मिक कारण और परंपराएँ।
करवा चौथ व्रत में मिट्टी के करवा का क्या महत्व होता है? क्या इसके पीछे कोई पुरानी धारणा है? क्या इसके बिना करवाचौथ का व्रत असफल है? ऐसे ही सवालों को हम इस आर्टिकल में जानेंगे कि मिट्टी से बना करवा अपने अदर कौन सी राज को छुपाए बैठा है?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस साल करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर 2024 को रखा जाएगा। करवा चौथ का व्रत हर सुहागन स्त्री के लिए बहुत महत्वपूण होता है। इस दौरान पति-पत्नी को मिट्टी के बर्तन यानी करवा से पानी पिलाकर व्रत खुलवाते है, तो चलिए जानते हैं, करवा चौथ की पूजा में करवा को अखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों बताया गया है।
करवा शब्द का अर्थ मिट्टी का बर्तन होता है, जबकि चौथ का शाब्दिक अर्थ चतुर्थी है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सफलता की मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए व्रत रखती है। करवा चौथ के दिन सुहागन स्त्री सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती है और अपने पति की दीर्घायु की भगवान से कामना करती है। इस दिन शाम को महिलाएं चंद्रमा के दर्शन और पूजन करने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं।
उम्मीद करते हैं, आपको हमारा करवा चौथ से जुड़ा लेख पसंद आया होगा।
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