
जानिए बिहार में कब है छठ पूजा? और आस्था का ये महापर्व क्यों मनाया जाता है?
छठ पूजा सूर्य देव और माता छठी की आराधना का पवित्र पर्व है। भक्त व्रत रखकर नदी या तालाब किनारे सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह पर्व स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण का आशीर्वाद देता है।
आपके लिए चुनी गई पूजाएँ
अपने नाम और गोत्र से पूजा करवाएं और अपने परिवार के लिए ईश्वर का आशीर्वाद पाएं।
छठ पूजा चार दिनों तक चलता है और इसमें कई अनुष्ठान शामिल होते हैं-
नहाय-खाय : इस दिन व्रती महिलाएं पवित्र स्नान करती हैं और सात्विक भोजन करती हैं।
लोहंजा/खरना : इस दिन व्रती महिलाएं निर्जला व्रत रखना शुरू करती हैं और विशेष भोजन बनाया जाता है।
संध्या अर्घ्य : इस दिन सूर्यास्त के समय नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।
उषा अर्घ्य : इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत खोला जाता है।
बिहार से छठ पूजा का इतिहास जुड़ा है। मान्यताओं के अनुसार, बिहार में छठ पूजा की परंपरा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। द्रौपदी और पांडवों ने छठ पूजा का व्रत रखा था। उन्होंने अपना राज्य वापस पाने के लिए यह व्रत किया था। जब पांडव सारा राजपाठ जुए में हार गए तो द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई और पांडवों को सब कुछ वापस मिल गया। इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की पूजा करना फलदायी माना जाता है।
यदि नि:संतान महिलाएं यह पूजा करती हैं तो उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। कथाओं के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत महाभारत काल में बिहार राज्य में हुई थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्यपुत्र कर्ण बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले थे। यह तथ्य इस बात का प्रमाण देता है कि छठ पूजा की शुरुआत बिहार के मुंगेर जिले से हुई और आज भी यह पर्व बिहार के जिले में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने करवाया था। छठ पूजा के समय यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। औरंगाबाद स्थित देव सूर्य मंदिर में छठ पूजा का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक, माता सीता ने सबसे पहले यहां गंगा किनारे छठ पूजा की थी। आज भी यहां माता सीता के चरण चिह्न मौजूद हैं।
यह मंदिर अपनी भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां के तालाब में छठ पूजा करने के लिए बिहार के साथ-साथ झारखंड और उत्तर प्रदेश से भी लोग आते हैं।
गया में फलगु नदी के किनारे छठ पूजा का विशेष महत्व है। यहां लोग पिंडदान के साथ-साथ छठ पूजा भी करते हैं
भागलपुर में गंगा नदी के किनारे छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। यहां का छठ घाट काफी प्रसिद्ध है।
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