कूष्मांडा देवी कवच

कूष्मांडा देवी कवच

यह पाठ मनुष्य को रोग मुक्त करता है


कूष्मांडा देवी कवच (Kushmanda Devi Kavach)

हिंदू धर्म में मां भगवती दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। अपनी मंद हंसी द्वारा अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, चारों ओर अंधकार ही अंधकार था, तब कूष्माण्डा देवी ने अपने ईषत हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। इसी कारण इन्हें ही सृष्टि की आदि स्वरूपा आदि शक्ति भी कहा जाता है।

कवच शब्द का अर्थ होता है रक्षा करने वाला। अपने चारों ओर एक प्रकार का आवरण बना देना कवच कहलाता है। कूष्मांडा देवी कवच के पाठ से हमारे आसपास शरीर के चारों ओर एक कवच का निर्माण होता है। कहते हैं कि हमारे चारों ओर फैली नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रों का संग्रह देवी कवच के रूप में है। यह किसी भी बुरे हालात में रक्षा करने में एक कवच के रूप में कार्य करता है। इसका पाठ खासकर नवरात्रि के दिनों में किया जाता है। हालांकि, नवरात्रि के चौथे दिन कूष्मांडा देवी कवच का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

कूष्मांडा देवी कवच का महत्व (importance of Kushmanda Devi Kavach)

चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए माता कूष्मांडा को सभी दुखों को हरने वाली माता कहा जाता है। इनका निवास स्थान सूर्य माना जाता है। यही वजह है कि माता कूष्मांडा के पीछे सूर्य का तेज दर्शाया जाता है। मां दुर्गा का यह सिर्फ एक ऐसा रूप है जिन्हें सूर्यलोक में रहने की शक्ति प्राप्त है। नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा के पूजन व कवच पाठ करने का विशेष महत्व है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करता है और देवी कवच का पाठ करता है उसे लंबी आयु, यश और बल की प्राप्ति होती है। ध्यान रहे कि कूष्मांडा कवच के पाठ को करने से पहले आप पवित्रता बनाए रखें, इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है।

कूष्मांडा देवी कवच पढ़ने के फायदे (Benefits of reading Kushmanda Devi Kavach)

लंबे समय से बीमार व्यक्ति अगर सच्चे मन से देवी के इस कवच का पाठ करता तो वह रोग मुक्त हो जाता है। साथ ही उसके परिजन भी रोगों से दूर रहते हैं।

साधक अगर रोजाना कूष्मांडा देवी कवच का पाठ करते हैं तो बुराई अपने आप दूर होने लगती है और साथ ही सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

कूष्मांडा देवी कवच का पाठ करने से मनुष्य का सभी प्रकार का भय, डर, दोष, शोक दूर हो जाता है।

देवी कूष्मांडा की पूजा के साथ कवच का पाठ करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है।

कहते हैं कि कुष्मांडा देवी कवच के साथ-साथ अगर दुर्गा कवच का पाठ किया जाए तो इस कवच का बहुत लाभ मिलता है। कूष्मांडा देवी कवच का असर शीघ्र ही देखने को मिलता है।

कूष्मांडा देवी कवच के पाठ के साथ साथ दुर्गा चालीसा और दुर्गा स्तुति का भी पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण हो जाती है।

मान्यता है कि देवी कवच का अगर रोजाना नियमित रूप से पाठ किया जाए तो वर्षों से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते हैं।

कूष्मांडा देवी कवच का अर्थ (Hindi meaning of Kushmanda Devi Kavach)

हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।

हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥

कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।

दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु॥

हिंदी में अर्थ :

जिनका शरीर हंस के सिर जैसा हो, वही कूष्माण्डा माता का स्वागत करें, जिन्होंने भावनाओं को नष्ट किया, जिनकी आंखें हंसों के समान है, उन्होंने ललाट पर हंस के चिह्न को धारण किया है।

वही कौमारी रूप को सब शरीर पर पाती हैं, वही उत्तर में वाराही रूप और दक्षिण में वैष्णवी और इंद्राणी रूप को पाती हैं, वही सभी दिशाओं और सभी समयों में पूजी जाती हैं और सभी बीज को प्राप्त करने के योग्य हैं।

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