पोंगल में क्या खाया जाता है?
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पोंगल में क्या खाया जाता है? | Pongal Me Kya Khaya Jata Hai

जानिए पोंगल त्योहार के दौरान बनने वाले पारंपरिक व्यंजन, मीठा पोंगल, नमकीन पोंगल और प्रसाद।

पोंगल में खानपान के बारे में

पोंगल पर्व में खानपान केवल स्वाद तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह नई फसल, प्रकृति और समृद्धि के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है। इस दिन ताज़े चावल, दूध और गुड़ से बने पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। इस लेख में जानिए पोंगल के विशेष खानपान और उनसे जुड़ी परंपराएँ।

पोंगल के पारंपरिक व्यंजन

दक्षिण भारत का सांस्कृतिक रूप से समृद्ध त्योहार है, जिसे मुख्य रूप से तमिलनाडु में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व प्रकृति, सूर्य देव, पशुधन और अन्नदाता किसानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। पोंगल के चार दिन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इन दिनों बनने वाले पारंपरिक व्यंजन इस पर्व को और भी खास बना देते हैं। आइए जानते हैं कि पोंगल के अवसर पर क्या-क्या खाया जाता है और इन व्यंजनों का धार्मिक महत्व क्या है।

पोंगल पर्व का भोजन से संबंध

पोंगल शब्द का अर्थ ही होता है “उफनना” या “उबलकर बाहर आना”। इस पर्व पर नए धान से बने चावल और दूध को पकाकर जब बर्तन में उफान आता है, तो उसे समृद्धि, खुशहाली और अच्छे समय के आगमन का प्रतीक माना जाता है। पोंगल के समय हर घर में पारंपरिक तरीके से शुद्ध, सात्विक और ताजे अन्न से बने व्यंजन तैयार किए जाते हैं।

पोंगल के 4 दिन और उनसे जुड़े भोजन

पोंगल पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है और हर दिन का अपना अलग महत्व और अलग प्रकार का भोजन होता है।

1. भोगी पोंगल और उस दिन का भोजन

भोगी पोंगल पर्व का पहला दिन होता है, जिसमें पुराने और बिना जरूरत वाले सामान को हटाकर घर की सफाई की जाती है। इस दिन भोजन साधारण लेकिन शुद्ध और पौष्टिक होता है। कई घरों में इस दिन मीठा पोंगल या चावल से बने सरल व्यंजन बनाए जाते हैं, ताकि अगले दिन के मुख्य पर्व के लिए घर और मन दोनों शुद्ध हो जाएं।

2. थाई पोंगल: मुख्य दिन और विशेष व्यंजन

थाई पोंगल इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इसी दिन सूर्य देव की विशेष पूजा होती है और नए अन्न से पोंगल बनाया जाता है।

- मीठा पोंगल (सक्करै पोंगल)

यह पोंगल का सबसे प्रसिद्ध और अनिवार्य व्यंजन है। इसे नए चावल, मूंग दाल, गुड़, दूध, घी, काजू और किशमिश से बनाया जाता है। मान्यता है कि जब यह पकते समय उबलकर बाहर आता है, तो पूरे परिवार में खुशियां आती हैं। मीठा पोंगल समृद्धि, मिठास और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।

- वेन पोंगल (नमकीन पोंगल)

मीठे पोंगल के साथ-साथ वें पोंगल भी बहुत लोकप्रिय है। इसे चावल और मूंग दाल से बनाया जाता है, जिसमें काली मिर्च, जीरा, अदरक और घी का तड़का लगाया जाता है। यह स्वाद में हल्का, पौष्टिक और बेहद संतुलित भोजन होता है।

3. मट्टू पोंगल का विशेष पकवान

तीसरे दिन को मट्टू पोंगल कहा जाता है, जो पशुधन को समर्पित होता है। इस दिन गाय और बैलों की पूजा की जाती है, क्योंकि वे खेती में किसानों की मदद करते हैं।

इस दिन भी घरों में विशेष रूप से चावल, दाल और सब्जियों से बने पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। कई जगहों पर मीठा पोंगल दोबारा बनाया जाता है और उसे सबसे पहले गाय को अर्पित किया जाता है।

4. कानुम पोंगल के दिन का भोजन

चौथा दिन कानुम पोंगल कहलाता है। इस दिन लोग रिश्तेदारों और मित्रों से मिलने जाते हैं, पिकनिक मनाते हैं और सामूहिक रूप से भोजन करते हैं। इस दिन घरों में चावल के तरह-तरह के व्यंजन, नारियल से बने पकवान और मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।

पोंगल पर बनने वाले प्रमुख पारंपरिक व्यंजन

सक्कराई पोंगल (मीठा पोंगल)

यह पोंगल पर्व का प्राण है। बिना इसके पोंगल की कल्पना भी अधूरी मानी जाती है। यह भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में सभी को बांटा जाता है।

वेन पोंगल

यह एक प्रकार का खिचड़ी जैसा व्यंजन होता है, लेकिन इसका स्वाद और खुशबू इसे खास बनाती है। इसे अक्सर नारियल की चटनी और सांभर के साथ खाया जाता है।

सांभर

सांभर दक्षिण भारत का बहुत ही प्रसिद्ध व्यंजन है। पोंगल के दिन यह लगभग हर घर में बनता है और वें पोंगल या इडली के साथ परोसा जाता है।

नारियल की चटनी

नारियल पोंगल पर्व में विशेष महत्व रखता है। नारियल की चटनी न केवल स्वाद बढ़ाती है, बल्कि इसे शुभ और सात्विक भी माना जाता है।

अवियल

यह सब्जियों से बना एक पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन है, जिसमें नारियल और दही का उपयोग होता है। पोंगल के अवसर पर इसे बहुत शुभ माना जाता है।

पोंगल पर भोजन बनाने का धार्मिक महत्व

पोंगल के दिन भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं बनाया जाता, बल्कि इसे पूजा और भक्ति के भाव से तैयार किया जाता है। मिट्टी के नए बर्तन में पोंगल बनाना, सूर्य देव को अर्पित करना और पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना, ये सभी परंपराएँ इस पर्व को विशेष बनाती हैं।

इस पर्व पर अधिकतर घरों में सात्विक भोजन बनाया जाता है, जिसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं होता। माना जाता है कि इस दिन का भोजन शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

ये थी पोंगल पर्व पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन से जुड़ी जानकारी। मीठा पोंगल, वें पोंगल, सांभर, चटनी और अन्य व्यंजन मिलकर इस पर्व को और भी खास बना देते हैं। ‘श्री मंदिर’ कामना करता है कि आपका पोंगल पर्व शुभ हो, और घर में सुख- समृद्धि लाए।

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Published by Sri Mandir·January 15, 2026

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